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उतराखंड के 20 फीसदी पुरुष करते हैं धुआं रहित तंबाकू सेवन
Updated Sat, 03 Nov 2018 02:13 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। रिबेका चौधरी एम्स ऋषिकेश की पहली पीएचडी स्कालर बन गई हैं। उन्होंने तंबाकू सेवन और उससे होने वाले मुख कैंसर पर अपना पीएचडी शोध पत्र तैयार किया है। रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड के 20 प्रतिशत पुरुष धुआंरहित तंबाकू के आदि हैं, जबकि 3 फीसदी महिलाएं भी इस लत की गिरफ्त में हैं। इससे मुख कैंसर का ग्राफ तेजी से बढ़ रहा है।
रिबेका के मुताबिक तंबाकू की वजह से प्रदेश की आबादी में ओरोफेरेनियल कैंसर एक कॉमन बीमारी के रूप में पैठ बना रहा है। यह तंबाकू और गुटखे के सेवन से होता है। रिबेका का सपना है कि वे आगे चलकर देवभूमि को तंबाकू मुक्त प्रदेश बनाने की मुहिम का हिस्सा बनेंगी। वह एम्स के डेंटिस्ट्री डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश की पहली पीएचडी स्कालर बनने पर वह बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। इससे भी बड़ी खुशी की बात है कि उन्हें यह डिग्री खुद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों प्रदान किया जाएगा। रिबेका ने बीडीएस और एमडीएस पेरियोडोंटोलॉजी में किया है। उनका कहना है कि शोध पत्र प्रदेश में तंबाकू निषेध अभियान में मददगार साबित होगा।
मां और एम्स निदेशक ने किया सहयोग
रिबेका अपने शोध कार्य और सफलता पूर्वक पीएचडी पूरी करने का श्रेय मां डॉ. नीना चौधरी और और एम्स निदेशक प्रो. रविकांत को दिया है। रिबेका की मां दिल्ली विवि से पिछले वर्ष सेवानिवृत्त हुई हैं। उनका कहना है कि एम्स की पहली पीएचडी स्कालर बनना सपना सच होने जैसा है। इस सफलता में प्रो. रविकांत को खूब सहयोग रहा जिन्होंने कदम-कदम पर सहयोग और मार्गदर्शन दिया।
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रिबेका के मुताबिक तंबाकू की वजह से प्रदेश की आबादी में ओरोफेरेनियल कैंसर एक कॉमन बीमारी के रूप में पैठ बना रहा है। यह तंबाकू और गुटखे के सेवन से होता है। रिबेका का सपना है कि वे आगे चलकर देवभूमि को तंबाकू मुक्त प्रदेश बनाने की मुहिम का हिस्सा बनेंगी। वह एम्स के डेंटिस्ट्री डिपार्टमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने बताया कि एम्स ऋषिकेश की पहली पीएचडी स्कालर बनने पर वह बेहद गौरवान्वित महसूस कर रही हैं। इससे भी बड़ी खुशी की बात है कि उन्हें यह डिग्री खुद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के हाथों प्रदान किया जाएगा। रिबेका ने बीडीएस और एमडीएस पेरियोडोंटोलॉजी में किया है। उनका कहना है कि शोध पत्र प्रदेश में तंबाकू निषेध अभियान में मददगार साबित होगा।
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मां और एम्स निदेशक ने किया सहयोग
रिबेका अपने शोध कार्य और सफलता पूर्वक पीएचडी पूरी करने का श्रेय मां डॉ. नीना चौधरी और और एम्स निदेशक प्रो. रविकांत को दिया है। रिबेका की मां दिल्ली विवि से पिछले वर्ष सेवानिवृत्त हुई हैं। उनका कहना है कि एम्स की पहली पीएचडी स्कालर बनना सपना सच होने जैसा है। इस सफलता में प्रो. रविकांत को खूब सहयोग रहा जिन्होंने कदम-कदम पर सहयोग और मार्गदर्शन दिया।
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