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35 साल से जीर्णशीर्ण पड़ी जल विद्युत परियोजना उगलेगी बिजली
Updated Thu, 01 Nov 2018 10:28 PM IST
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गोपेश्वर। 35 साल से जीर्णशीर्ण पड़ी कोठियालसैंण जल विद्युत परियोजना से जल्द दोबारा बिजली उत्पादन शुरू होगा। उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) विभाग ने परियोजना को पुनर्जीवित कर इससे तीन मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। इसके लिए उरेड़ा विभाग ने 22 करोड़ की डीपीआर तैयार कर शासन को भेज दी है।
वर्ष 1955 में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद की ओर से कोठियालसैंण में 750 किलोवाट की जल विद्युत परियोजना शुरू की गई थी। सिंचाई विभाग की ओर से बालखिला नदी से तीन किलोमीटर नहर का निर्माण भी किया गया। परियोजना से चमोली बाजार, गोपेश्वर के साथ ही आसपास के गांवों को बिजली सप्लाई की गई, लेकिन वर्ष 1983 में अतिवृष्टि और भूस्खलन से परियोजना ठप हो गई। उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद परियोजना जल विद्युत निगम के सुपुर्द की गई, लेकिन परियोजना का संचालन शुरू नहीं हो पाया। वर्ष 2013 में राज्य सरकार ने परियोजना को पुन: संचालित करने के लिए इसे उरेडा विभाग के सुपुर्द कर दिया। अब उरेडा ने परियोजना का उच्चीकरण कर इससे तीन मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। उरेडा के परियोजना अधिकारी वाईएस बिष्ट ने बताया कि परियोजना का नए सिरे से निर्माण किया जाएगा। इस पर करीब 22 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके लिए डीपीआर तैयार कर शासन को भेज दी गई है। यदि परियोजना से बिजली उत्पादन शुरू हुआ तो यह उरेडा विभाग की जिले में पहली सरकारी विद्युत परियोजना होगी।
वर्ष 1955 में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत परिषद की ओर से कोठियालसैंण में 750 किलोवाट की जल विद्युत परियोजना शुरू की गई थी। सिंचाई विभाग की ओर से बालखिला नदी से तीन किलोमीटर नहर का निर्माण भी किया गया। परियोजना से चमोली बाजार, गोपेश्वर के साथ ही आसपास के गांवों को बिजली सप्लाई की गई, लेकिन वर्ष 1983 में अतिवृष्टि और भूस्खलन से परियोजना ठप हो गई। उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद परियोजना जल विद्युत निगम के सुपुर्द की गई, लेकिन परियोजना का संचालन शुरू नहीं हो पाया। वर्ष 2013 में राज्य सरकार ने परियोजना को पुन: संचालित करने के लिए इसे उरेडा विभाग के सुपुर्द कर दिया। अब उरेडा ने परियोजना का उच्चीकरण कर इससे तीन मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा है। उरेडा के परियोजना अधिकारी वाईएस बिष्ट ने बताया कि परियोजना का नए सिरे से निर्माण किया जाएगा। इस पर करीब 22 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके लिए डीपीआर तैयार कर शासन को भेज दी गई है। यदि परियोजना से बिजली उत्पादन शुरू हुआ तो यह उरेडा विभाग की जिले में पहली सरकारी विद्युत परियोजना होगी।
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