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आयुषज्ञान परीक्षण, गांव संरक्षण एवं वैश्विक पर्यावरण बदलाव सम्मेलन का आयोजन
Updated Sat, 27 Oct 2018 02:45 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
स्वामी भास्कारानंद आयुर्वेद शोध संस्थान थानो की ओर से आयुष ज्ञान परीक्षण, गाय संरक्षण एवं वैश्विक पर्यावरण बदलाव सम्मेलन पर शुक्रवार को दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। पहले दिन आयुर्वेद और योगमय जीवन पद्धति पर विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए गए।
स्वर्गाश्रम स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि, सचिव उत्तराखंड सरकार मिनाक्षी सुंदरम, मुख्य वन संरक्षक जयराज, एम्स निदेशक प्रोफेसर डॉ. रविकांत, आयुर्वेद यूनियन सर्विर्सेस देहरादून के निदेशक प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी, रूरल बिजनेस हब इंडिया के चेयरमेन डॉ. कमल टावरी, पूजा सिकेरा एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
इस मौके पर आयुर्वेद शोध संस्थान के स्वामी भास्करानंद ने कहा कि हमारी संस्कृति हमें सिखाती है कि सभी जीवों में परमात्मा का वास है। सभी जीवात्माओं को आयुर्वेद से लाभांवित करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में विशेषज्ञों ने आयुर्वेद के संबध में बहुमूल्य सुझाव दिए हैं। इसका मकसद आयुर्वेद का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। उन्होंने आयुर्वेद के संवर्द्घन के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग कर चिकित्सा पद्धति को बढ़ाने पर जोर दिया। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आयुर्वेद और योगमय जीवन पद्धति ही उत्कृष्ट जीवन पद्धति है। हमारे पास हिमालय जैसा आयुर्वेद का खजाना है जिससे पलायन को रोकने और हरित पर्यटन को बढ़ाया जा सकता है। कार्यशाला में आयुर्वेद विशेषज्ञ, प्रसिद्ध वैद्य ने आयुर्वेद और वैद्य उपचार विषय पर चर्चा की।
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स्वामी भास्कारानंद आयुर्वेद शोध संस्थान थानो की ओर से आयुष ज्ञान परीक्षण, गाय संरक्षण एवं वैश्विक पर्यावरण बदलाव सम्मेलन पर शुक्रवार को दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। पहले दिन आयुर्वेद और योगमय जीवन पद्धति पर विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए गए।
स्वर्गाश्रम स्थित परमार्थ निकेतन में आयोजित कार्यशाला का उद्घाटन स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि, सचिव उत्तराखंड सरकार मिनाक्षी सुंदरम, मुख्य वन संरक्षक जयराज, एम्स निदेशक प्रोफेसर डॉ. रविकांत, आयुर्वेद यूनियन सर्विर्सेस देहरादून के निदेशक प्रो. अरुण कुमार त्रिपाठी, रूरल बिजनेस हब इंडिया के चेयरमेन डॉ. कमल टावरी, पूजा सिकेरा एवं अन्य विशिष्ट अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
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इस मौके पर आयुर्वेद शोध संस्थान के स्वामी भास्करानंद ने कहा कि हमारी संस्कृति हमें सिखाती है कि सभी जीवों में परमात्मा का वास है। सभी जीवात्माओं को आयुर्वेद से लाभांवित करना हमारा लक्ष्य होना चाहिए। उन्होंने बताया कि कार्यशाला में विशेषज्ञों ने आयुर्वेद के संबध में बहुमूल्य सुझाव दिए हैं। इसका मकसद आयुर्वेद का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है। उन्होंने आयुर्वेद के संवर्द्घन के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग कर चिकित्सा पद्धति को बढ़ाने पर जोर दिया। परमार्थ निकेतन के परमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि आयुर्वेद और योगमय जीवन पद्धति ही उत्कृष्ट जीवन पद्धति है। हमारे पास हिमालय जैसा आयुर्वेद का खजाना है जिससे पलायन को रोकने और हरित पर्यटन को बढ़ाया जा सकता है। कार्यशाला में आयुर्वेद विशेषज्ञ, प्रसिद्ध वैद्य ने आयुर्वेद और वैद्य उपचार विषय पर चर्चा की।
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