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अफवाहों से खोटे हो गए एक व पांच के सिक्के
Updated Sat, 27 Oct 2018 02:45 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
इन दिनों तीर्थनगरी में एक व पांच के सिक्कों को लेकर अफवाहों का बाजार गरमाया हुआ है। आलम यह है कि दुकानदार एक और पांच के सिक्कों को लेने से मना कर रहे हैं। इसके पीछे बैंकों में चिल्लर गिनने की झंझट से बचने का तर्क दिया जा रहा है। प्रमाण के तौर पर कई दुकानदार सिक्कों की गठरी भी दिखा रहे हैं। वहीं बैंक अफसरों का कहना है कि सिक्कों के लेनदेन पर कोई रोक नहीं है। ऐसे में दो पाटों के बीच आम लोग परेशान हो रहे हैं।
-शीशमझाड़ी के व्यापारी रामचंद्र का कहना है कि ग्राहकों से सिक्के तो लिए जा रहे हैं, लेकिन जब दुकान का सामान लेने थोक व्यापारी के पास जाते हैं तो वह सिक्के लेने से इनकार कर देता है। इसलिए हमारी भी मजबूरी हो जाती है कि हम भी सिक्के लेने में परहेज कर रहे हैं।
-शिवचन शाह का कहना है कि शीशमझाड़ी क्षेत्र में अधिकांश पूर्वांचल और बिहार के मजदूर कार्य करते हैं। यह लोग सामान खरीदते वक्त दुकानदारों को सिक्के देते हैं, लेकिन जब दुकानदार उन्हें सिक्के देता है तो वह लेने इनकार कर देते हैं। मजदूरों कहना है कि पूर्वांचल और बिहार में सिक्कों का प्रचलन बहुत कम है, जिससे सिक्कों को एकत्रित करना नुकसान दायक है।
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- चंद्रेश्वरनगर के व्यापारी संदीप ने सीधे तौर पर बैंक को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि जब एक बार वह बैंक ऑफ बड़ौदा में सिक्के जमा करने गए तो बैंक ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जब बैंक ही सिक्के लेने से मना कर रहे हैं तो ग्राहकों से सिक्के का लेनदेन कौन करेगा।
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बैंक ग्राहकों को कभी सिक्के लेने से मना नहीं करता है। बैंक ग्राहकों से बराबर सिक्कों का लेनदेन कर रहा है। आरबीआई के निर्देशानुसार बैंक ग्राहक से एक बार में एक हजार तक के सिक्के ही जमा कर सकता है।
-समीर मेहता, मैनेजर, बैंक आफ बड़ौदा
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दुकानदार अफवाहों पर कदापि ध्यान न दें। बैंक बराबर ग्राहकों से सिक्कों का लेनदेन कर रहा है। अगर कोई ग्राहक सिक्के नहीं लेने का आरोप बैंक पर लगाता है तो वह सरासर गलत है। जब हम अपने ग्राहकों को सिक्के दे रहे हैं तो इसमें नहीं लेने की बात ही निराधार है। ग्राहक के पास जितने भी सिक्के हों वह अपने एकाउंट में जमा कर सकता है।
-विक्रम नेगी, बैंक मैनेजर, भारतीय स्टेट बैंक
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इन दिनों तीर्थनगरी में एक व पांच के सिक्कों को लेकर अफवाहों का बाजार गरमाया हुआ है। आलम यह है कि दुकानदार एक और पांच के सिक्कों को लेने से मना कर रहे हैं। इसके पीछे बैंकों में चिल्लर गिनने की झंझट से बचने का तर्क दिया जा रहा है। प्रमाण के तौर पर कई दुकानदार सिक्कों की गठरी भी दिखा रहे हैं। वहीं बैंक अफसरों का कहना है कि सिक्कों के लेनदेन पर कोई रोक नहीं है। ऐसे में दो पाटों के बीच आम लोग परेशान हो रहे हैं।
-शीशमझाड़ी के व्यापारी रामचंद्र का कहना है कि ग्राहकों से सिक्के तो लिए जा रहे हैं, लेकिन जब दुकान का सामान लेने थोक व्यापारी के पास जाते हैं तो वह सिक्के लेने से इनकार कर देता है। इसलिए हमारी भी मजबूरी हो जाती है कि हम भी सिक्के लेने में परहेज कर रहे हैं।
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-शिवचन शाह का कहना है कि शीशमझाड़ी क्षेत्र में अधिकांश पूर्वांचल और बिहार के मजदूर कार्य करते हैं। यह लोग सामान खरीदते वक्त दुकानदारों को सिक्के देते हैं, लेकिन जब दुकानदार उन्हें सिक्के देता है तो वह लेने इनकार कर देते हैं। मजदूरों कहना है कि पूर्वांचल और बिहार में सिक्कों का प्रचलन बहुत कम है, जिससे सिक्कों को एकत्रित करना नुकसान दायक है।
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- चंद्रेश्वरनगर के व्यापारी संदीप ने सीधे तौर पर बैंक को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि जब एक बार वह बैंक ऑफ बड़ौदा में सिक्के जमा करने गए तो बैंक ने साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि जब बैंक ही सिक्के लेने से मना कर रहे हैं तो ग्राहकों से सिक्के का लेनदेन कौन करेगा।
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बैंक ग्राहकों को कभी सिक्के लेने से मना नहीं करता है। बैंक ग्राहकों से बराबर सिक्कों का लेनदेन कर रहा है। आरबीआई के निर्देशानुसार बैंक ग्राहक से एक बार में एक हजार तक के सिक्के ही जमा कर सकता है।
-समीर मेहता, मैनेजर, बैंक आफ बड़ौदा
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दुकानदार अफवाहों पर कदापि ध्यान न दें। बैंक बराबर ग्राहकों से सिक्कों का लेनदेन कर रहा है। अगर कोई ग्राहक सिक्के नहीं लेने का आरोप बैंक पर लगाता है तो वह सरासर गलत है। जब हम अपने ग्राहकों को सिक्के दे रहे हैं तो इसमें नहीं लेने की बात ही निराधार है। ग्राहक के पास जितने भी सिक्के हों वह अपने एकाउंट में जमा कर सकता है।
-विक्रम नेगी, बैंक मैनेजर, भारतीय स्टेट बैंक