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एम्स में हुआ मेनिस्कस का पहला प्रत्यारोपण
Updated Thu, 25 Oct 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
एम्स ऋषिकेश में अब घुटने के मेनिस्कस (झिल्ली) का प्रत्यारोपण हो सकेगा। प्रत्यारोपण का पहला सफल ऑपरेशन डॉ. तरुण गोयल की देखरेख में दूरबीन विधि से किया गया है। खुशखबरी ये है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच एम्स ऋषिकेश इकलौता संस्थान है जहां मेनिस्कस का प्रत्यारोपण हो सकेगा।
एम्स के अस्थि रोग विभाग के आर्थो चिकित्सक डॉ. तरुण गोयल ने बताया कि खिलाड़ियों को चोट लगने की वजह से अक्सर घुटने में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है। घुटने का मेनिस्कस फटने की दशा में लोगों को दिल्ली एम्स जाना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा एम्स ऋषिकेश में भी मिलेगी। डॉ. तरुण ने बताया कि देहरादून निवासी एक 25 वर्षीय खिलाड़ी के घुटने में चोट लगने से दर्द की शिकायत थी। परीक्षण में मेनिस्कस के फटने की पुष्टि होने पर बीते मंगलवार को दूरबीन विधि से सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया। अब खिलाड़ी पूरी तरह से स्वस्थ है, बुधवार को खिलाड़ी को वार्ड में चलाकर भी परीक्षण किया गया। खिलाड़ी को दो दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। 20 हजार आया खर्च
डॉ. तरुण गोयल के अनुसार संस्थान में ऑपरेशन पर करीब 20 हजार का खर्च आया है, जबकि निजी अस्पताल में इस ऑपरेशन पर करीब दो लाख का खर्च आता है। टीम में प्रोफेसर शोभा, सीनियर रेजिडेंट डॉ. आनंद, डॉ. सोविक, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अजीत, प्रवीन आदि शामिल रहे।
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बोन बैंक से मिली मदद
मेनिस्कस का प्रत्यारोपण एम्स संस्थान में स्थापित अस्थि संचय कोष (बोन बैंक) से संभव हो सका है। डॉ. तरुण ने बताया कि पांच दिन पूर्व अस्पताल में एक अन्य 55 वर्षीय व्यक्ति के घुटने का ऑपरेशन किया गया था, रोगी से परामर्श के बाद मेनिस्कस को सुरक्षित रखा गया था। उक्त मेनिस्कस खिलाड़ी के घुटने में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया है।
निदेशक ने किया ट्रेनिंग के लिए प्रोत्साहित
एम्स के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर डॉ. रविकांत ने बताया कि संस्थान के आर्थो चिकित्सक डॉ. तरुण गोयल को संस्थान की ओर से इसी वर्ष कनाडा व जर्मनी में मेनिस्कस ट्रांसप्लांट की ट्रेनिंग दिलाई गई थी। इसके बाद ही संस्थान में इस तरह का जटिल ऑपरेशन संभव हो सका है।
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एम्स ऋषिकेश में अब घुटने के मेनिस्कस (झिल्ली) का प्रत्यारोपण हो सकेगा। प्रत्यारोपण का पहला सफल ऑपरेशन डॉ. तरुण गोयल की देखरेख में दूरबीन विधि से किया गया है। खुशखबरी ये है कि उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के बीच एम्स ऋषिकेश इकलौता संस्थान है जहां मेनिस्कस का प्रत्यारोपण हो सकेगा।
एम्स के अस्थि रोग विभाग के आर्थो चिकित्सक डॉ. तरुण गोयल ने बताया कि खिलाड़ियों को चोट लगने की वजह से अक्सर घुटने में दर्द की समस्या का सामना करना पड़ता है। घुटने का मेनिस्कस फटने की दशा में लोगों को दिल्ली एम्स जाना पड़ता था, लेकिन अब यह सुविधा एम्स ऋषिकेश में भी मिलेगी। डॉ. तरुण ने बताया कि देहरादून निवासी एक 25 वर्षीय खिलाड़ी के घुटने में चोट लगने से दर्द की शिकायत थी। परीक्षण में मेनिस्कस के फटने की पुष्टि होने पर बीते मंगलवार को दूरबीन विधि से सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया। अब खिलाड़ी पूरी तरह से स्वस्थ है, बुधवार को खिलाड़ी को वार्ड में चलाकर भी परीक्षण किया गया। खिलाड़ी को दो दिन बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। 20 हजार आया खर्च
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डॉ. तरुण गोयल के अनुसार संस्थान में ऑपरेशन पर करीब 20 हजार का खर्च आया है, जबकि निजी अस्पताल में इस ऑपरेशन पर करीब दो लाख का खर्च आता है। टीम में प्रोफेसर शोभा, सीनियर रेजिडेंट डॉ. आनंद, डॉ. सोविक, एनेस्थीसिया विभाग के डॉ. अजीत, प्रवीन आदि शामिल रहे।
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बोन बैंक से मिली मदद
मेनिस्कस का प्रत्यारोपण एम्स संस्थान में स्थापित अस्थि संचय कोष (बोन बैंक) से संभव हो सका है। डॉ. तरुण ने बताया कि पांच दिन पूर्व अस्पताल में एक अन्य 55 वर्षीय व्यक्ति के घुटने का ऑपरेशन किया गया था, रोगी से परामर्श के बाद मेनिस्कस को सुरक्षित रखा गया था। उक्त मेनिस्कस खिलाड़ी के घुटने में सफलतापूर्वक प्रत्यारोपित किया गया है।
निदेशक ने किया ट्रेनिंग के लिए प्रोत्साहित
एम्स के निदेशक पद्मश्री प्रोफेसर डॉ. रविकांत ने बताया कि संस्थान के आर्थो चिकित्सक डॉ. तरुण गोयल को संस्थान की ओर से इसी वर्ष कनाडा व जर्मनी में मेनिस्कस ट्रांसप्लांट की ट्रेनिंग दिलाई गई थी। इसके बाद ही संस्थान में इस तरह का जटिल ऑपरेशन संभव हो सका है।