फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   नहीं टूट रही उतराखंड सरकार की नींद

नहीं टूट रही उतराखंड सरकार की नींद

Tue, 23 Oct 2018 10:32 PM IST
Updated Tue, 23 Oct 2018 10:32 PM IST
विज्ञापन
नहीं टूट रही उतराखंड सरकार की नींद
श्रीनगर। एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) के स्थायी परिसर के निर्माण के लिए जनता और छात्रों के आंदोलन के बाद भी सरकार नींद से नहीं जगी है। अब जमीन तलाशने के लिए एनआईटी को कमेटी गठित करने का फरमान जारी किया गया है, जबकि संस्थान को जमीन दिलाने की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार की है। एनआईटी ने इसे अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर बता दिया है। इस पत्र को भेजे हुए भी 10 दिन से ऊपर हो चुके हैं, लेकिन सरकार से इस संबंध में पुन: कोई दिशा-निर्देश नहीं आया है।
विज्ञापन

भारत सरकार ने वर्ष 2009 में उत्तराखंड को एनआईटी जैसा महत्वपूर्ण इंजीनियरिंग संस्थान को तोहफा दिया था। वर्ष 2010 से श्रीनगर में इसका अस्थायी रुप से आईटीआई और पॉलीटेक्निक के भवन में संचालन भी हो गया। लंबी इंतजारी के बाद सुमाड़ी और आसपास के इलाकों में जमीन देखी गई। वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इसका शिलान्यास भी कर दिया, लेकिन बाद में इसको अनुपयुक्त बताकर खारिज कर दिया गया।
विज्ञापन

काफी तलाश के बाद सुमाड़ी के समीप और श्रीनगर से करीब 18 किलोमीटर दूर जलेथा गांव में जमीन चिह्नित की गई है। यहां 25.986 हेक्टेयर सरकारी भूमि और 18.939 हेक्टेयर नाप भूमि मिल चुकी है। विगत 26 जून को ग्रामीण नाप भूमि हस्तांतरण की एनओसी प्रशासन को सौंप चुके हैं, जबकि गत सितंबर माह में जिला प्रशासन की ओर से 44.925 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव शासन के राजस्व विभाग को भेज दिया है, लेकिन अभी तक इस भूमि के हस्तांतरण की प्रगति के बारे में एनआईटी को जानकारी नहीं है। उल्टे संस्थान को पत्र भेजकर कहा गया कि कमेटी बनाकर जमीन चयनित की जाए। एनआईटी के कार्यवाहक निदेशक प्रो. आरबी पटेल ने बताया कि शासन से मिले पत्र का 10 दिन पहले जवाब दे दिया गया है। उन्होंने कहा कि वह जमीन ढूंढने के लिए अधिकृत नहीं है। जमीन प्रदेश सरकार को ही देनी है। प्रदेश सरकार को प्रपोजल भेजा गया है कि जमीन ढूंढने वाली कमेटी में आईआईटी और सीपीडब्लूडी जैसे तकनीकी संस्थानों के विशेषज्ञों को शामिल किया जाए। उन्होंने बताया कि जलेथा की जमीन के अधिग्रहण के संबंध में शासन से कोई अपडेट नहीं मिला है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed