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नहीं पूरा हो पाया पिछला वादा, फिर से कुर्सी पाने का इरादा
Updated Tue, 23 Oct 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/ऋषिकेश/अमर उजाला।
ट्रंचिंग ग्राउंड की शिफ्टिंग, आवारा पशुओं से निजात, कांजी हाउस निर्माण। ये वे मुद्दे हैं जो पिछले कई साल से समाधान की राह देख रहे हैं। चुनाव के दौरान नेता बेधड़क चुटकी बजाते ही निराकरण का दावा ठोंकते हैं। कुर्सी मिलने के बाद वादे हवा हो जाते हैं। ऐसे में नेताओं के वादों-आश्वासनों से आजिज नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक के लोगों ने मूलभूत समस्याओं और सुविधाओं पर स्पष्ट नजरिया रखने वाले को ही मतदान करने का संकल्प लिया है।
क्या कहती है जनता -
सामाजिक कार्यकर्ता विधि गुप्ता का कहना है कि लक्ष्मणझूला क्षेत्र में बस्ती के बीच बना कूड़ा निस्तारण केंद्र परेशानी का सबब बना हुआ है। केंद्र को शिफ्ट करने के लिए कई बार शासन-प्रशासन को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया चुका है। इस मुद्दे पर स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का रवैया भी निराशजनक है।
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता मोहन नागर का कहना है कि चुनाव के दौरान जनता को आश्वासन तो दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य नहीं होता है। ट्रंचिंग ग्राउंड व कांजी हाउस के निर्माण की मांग काफी समय से हो रही है। जनसमस्यों के प्रति जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के वक्त ही गंभीर दिखते हैं। कुर्सी मिलने के बाद प्राथमिकताएं बदल जाती हैं।
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ट्रंचिंग ग्राउंड की शिफ्टिंग, आवारा पशुओं से निजात, कांजी हाउस निर्माण। ये वे मुद्दे हैं जो पिछले कई साल से समाधान की राह देख रहे हैं। चुनाव के दौरान नेता बेधड़क चुटकी बजाते ही निराकरण का दावा ठोंकते हैं। कुर्सी मिलने के बाद वादे हवा हो जाते हैं। ऐसे में नेताओं के वादों-आश्वासनों से आजिज नगर पंचायत स्वर्गाश्रम जौंक के लोगों ने मूलभूत समस्याओं और सुविधाओं पर स्पष्ट नजरिया रखने वाले को ही मतदान करने का संकल्प लिया है।
क्या कहती है जनता -
सामाजिक कार्यकर्ता विधि गुप्ता का कहना है कि लक्ष्मणझूला क्षेत्र में बस्ती के बीच बना कूड़ा निस्तारण केंद्र परेशानी का सबब बना हुआ है। केंद्र को शिफ्ट करने के लिए कई बार शासन-प्रशासन को लिखित व मौखिक रूप से अवगत कराया चुका है। इस मुद्दे पर स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का रवैया भी निराशजनक है।
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स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता मोहन नागर का कहना है कि चुनाव के दौरान जनता को आश्वासन तो दिया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्य नहीं होता है। ट्रंचिंग ग्राउंड व कांजी हाउस के निर्माण की मांग काफी समय से हो रही है। जनसमस्यों के प्रति जनप्रतिनिधि केवल चुनाव के वक्त ही गंभीर दिखते हैं। कुर्सी मिलने के बाद प्राथमिकताएं बदल जाती हैं।
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