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आस्था के आंगन में लगा गंदगी का अंबार
Updated Sat, 20 Oct 2018 01:52 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। त्रिवेणी घाट पर गंगा की जलधारा में गंदगी का अंबार लगा है, जिससे गंगा स्वच्छता को लेकर सरकारी योजनाओं पर पलीता लग रहा है। आस्था के नाम पर गंगा प्रतिदिन मैली की जा रही है, गंगा घाट से पूजा अर्चना के बाद पूजा सामग्री के बचे अवशेष को गंगा में सीधे प्रवाहित किया जा रहा है, जिससे गंगा घाट के आसपास ही गंदगी का अंबार लग रहा है। शनिवार को त्रिवेणी घाट पर गंगा की जलधारा में पूजा सामग्री के अवशेष का ढेर पड़ा था।
गौरतलब है कि त्रिवेणी घाट पर रोजाना हजारों की संख्या में देश विदेश से तीर्थयात्री और पर्यटक गंगा आरती और पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में गंगा की धारा में पसरी गंदगी सरकार के गंगा स्वच्छता अभियान की मुहिम पर स्थानीय प्रशासन की सुस्ती से पलीता लग रहा है। प्रदूषण का दंश झेल रही गंगा को स्वच्छ रखने के लिए सरकार की ओर से पूजा सामग्री और विसर्जन के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से आए दिन लोग गंगा में पूजा सामग्री और खंडित मूर्तियां प्रवाहित करते हैं, जिससे गंगा में प्रदूषण बढ़ता है। परंतु संबधित विभाग गंगा तट पर फैली गंदगी को साफ कराने के प्रति उदासीन बना हुआ है।
एक दूसरे पर डाल रहे जिम्मा
गंगा निर्माण अनुरक्षण इकाई के इंजीनियर अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि यह उनके कार्यक्षेत्र में नहीं है। सफाई का जिम्म जल के पास है। इसके बाद जल संस्थान के जलकल अभियंता से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह नगर निगम देखता है। इस क्रम में सहायक नगर आयुक्त को फोन किया गया लेकिन वार्ता नहीं हो पाई। उनका पक्ष आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
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गौरतलब है कि त्रिवेणी घाट पर रोजाना हजारों की संख्या में देश विदेश से तीर्थयात्री और पर्यटक गंगा आरती और पूजा अर्चना के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में गंगा की धारा में पसरी गंदगी सरकार के गंगा स्वच्छता अभियान की मुहिम पर स्थानीय प्रशासन की सुस्ती से पलीता लग रहा है। प्रदूषण का दंश झेल रही गंगा को स्वच्छ रखने के लिए सरकार की ओर से पूजा सामग्री और विसर्जन के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से आए दिन लोग गंगा में पूजा सामग्री और खंडित मूर्तियां प्रवाहित करते हैं, जिससे गंगा में प्रदूषण बढ़ता है। परंतु संबधित विभाग गंगा तट पर फैली गंदगी को साफ कराने के प्रति उदासीन बना हुआ है।
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एक दूसरे पर डाल रहे जिम्मा
गंगा निर्माण अनुरक्षण इकाई के इंजीनियर अरविंद कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि यह उनके कार्यक्षेत्र में नहीं है। सफाई का जिम्म जल के पास है। इसके बाद जल संस्थान के जलकल अभियंता से बात की गई तो उन्होंने बताया कि यह नगर निगम देखता है। इस क्रम में सहायक नगर आयुक्त को फोन किया गया लेकिन वार्ता नहीं हो पाई। उनका पक्ष आने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
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