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उतारु राज के कपड़े बनाऊं भेष मुनियों का...
Updated Fri, 19 Oct 2018 10:16 PM IST
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पीपलकोटी। ज्योति क्लब की ओर से आयोजित रामलीला के चौथे दिन राम वनवास का मंचन हुआ। चौदह वर्ष के लिए श्रीराम, सीता और लक्ष्मण वनवास पर जाने पर अयोध्यावासी भावुक हो उठे।
रामलीला में राजा दशरथ सुमंत को राज तिलक की तैयारी के आदेश देते हैं। जब मंथरा को राम के राज तिलक का पता चलता है तो वह सीधे रानी कैकेयी के पास जाकर उसके कान भरती है। कैकेयी मंथरा के बहकावे में आ जाती है। जब राजा दशरथ कैकेयी से कोप भवन में जाने के बारे में पूछते हैं तो वह राम को चौदह वर्ष का वनवास और भरत को राजगद्दी देने का वचन मांगती है। राजा दशरथ व्यथित होकर अपनी परंपरा रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाए का पालन करते हुए कैकेयी को वचन दे देते हैं। तब श्रीराम पिता की आज्ञा को स्वीकार कर उतारु राज के कपड़े, बनाऊं वेष मुनियों का कहकर... भ्राता लक्ष्मण और सीता के साथ वनवास पर चले जाते हैं। वनवास का मंचन देख दर्शकों की आंखें भी नम हो जाती हैं। इस मौके पर पुलिस चौकी इंचार्ज चंद्र प्रकाश, दीप शाह, संतोष वर्मा, राकेश लाल, संदीप शाह, कन्हैया, विवेक शाह और रजत शाह आदि मौजूद थे। वहीं गोपेश्वर में लक्ष्मण शक्ति की लीला का मंचन हुआ। इस दौरान भोलेनाथ की पूजा की गई।
राज्याभिषेक के साथ रामलीला का समापन
कर्णप्रयाग। मां चंडिका रामलीला कमेटी सिमली की ओर से आयोजित रामलीला श्री राम के राज्याभिषेक के साथ संपन्न हो गई। इस दौरान श्री राम परिवार की भव्य झांकी भी निकाली गई। श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा और जयकारों के साथ झांकी का स्वागत किया।
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रामलीला मंचन के समापन पर मुख्य अतिथि कर्णप्रयाग विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि ऐसे आयोजनों से ही हमारी पौराणिक संस्कृति जीवंत है। उन्होंने श्रद्धालुओं से श्री राम के आचरण को अपनाकर सद आचरण अपनाने का आह्वान किया। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी ने कलाकारों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस मौके पर क्षेत्र पंचायत सदस्य रविंद्र खंडूड़ी, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष गौचर मुकेश नेगी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य बीरेंद्र सिंह नेगी, व्यापार संघ कर्णप्रयाग के अध्यक्ष बृजेश बिष्ट, रविंद्र खंडूड़ी, जयदीप गैरोला, पुनीत डिमरी और हरेंद्र सिंह लडोला सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे।
रामलीला में राजा दशरथ सुमंत को राज तिलक की तैयारी के आदेश देते हैं। जब मंथरा को राम के राज तिलक का पता चलता है तो वह सीधे रानी कैकेयी के पास जाकर उसके कान भरती है। कैकेयी मंथरा के बहकावे में आ जाती है। जब राजा दशरथ कैकेयी से कोप भवन में जाने के बारे में पूछते हैं तो वह राम को चौदह वर्ष का वनवास और भरत को राजगद्दी देने का वचन मांगती है। राजा दशरथ व्यथित होकर अपनी परंपरा रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाए का पालन करते हुए कैकेयी को वचन दे देते हैं। तब श्रीराम पिता की आज्ञा को स्वीकार कर उतारु राज के कपड़े, बनाऊं वेष मुनियों का कहकर... भ्राता लक्ष्मण और सीता के साथ वनवास पर चले जाते हैं। वनवास का मंचन देख दर्शकों की आंखें भी नम हो जाती हैं। इस मौके पर पुलिस चौकी इंचार्ज चंद्र प्रकाश, दीप शाह, संतोष वर्मा, राकेश लाल, संदीप शाह, कन्हैया, विवेक शाह और रजत शाह आदि मौजूद थे। वहीं गोपेश्वर में लक्ष्मण शक्ति की लीला का मंचन हुआ। इस दौरान भोलेनाथ की पूजा की गई।
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राज्याभिषेक के साथ रामलीला का समापन
कर्णप्रयाग। मां चंडिका रामलीला कमेटी सिमली की ओर से आयोजित रामलीला श्री राम के राज्याभिषेक के साथ संपन्न हो गई। इस दौरान श्री राम परिवार की भव्य झांकी भी निकाली गई। श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा और जयकारों के साथ झांकी का स्वागत किया।
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रामलीला मंचन के समापन पर मुख्य अतिथि कर्णप्रयाग विधायक सुरेंद्र सिंह नेगी ने कहा कि ऐसे आयोजनों से ही हमारी पौराणिक संस्कृति जीवंत है। उन्होंने श्रद्धालुओं से श्री राम के आचरण को अपनाकर सद आचरण अपनाने का आह्वान किया। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह नेगी ने कलाकारों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इस मौके पर क्षेत्र पंचायत सदस्य रविंद्र खंडूड़ी, पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष गौचर मुकेश नेगी, पूर्व जिला पंचायत सदस्य बीरेंद्र सिंह नेगी, व्यापार संघ कर्णप्रयाग के अध्यक्ष बृजेश बिष्ट, रविंद्र खंडूड़ी, जयदीप गैरोला, पुनीत डिमरी और हरेंद्र सिंह लडोला सहित कई श्रद्धालु मौजूद थे।