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यमुना नदी में खनन कार्य पर लगी रोक हटाई जाए
Updated Tue, 16 Oct 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
यमुना नदी में खनन कार्य पर लगी रोक हटाने की मांग पर आम आदमी पार्टी ने तहसील मुख्यालय पर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। उन्होंने खनन कार्य पर लगी रोक हटाने की मांग पर तहसीलदार प्रकाश शाह के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा।
ज्ञापन में जिलाध्यक्ष संदीप दुबे ने कहा कि वर्तमान में आसन वैटलैंड से लेकर डाकपत्थर बैराज तक 10 किमी के दायरे में किसी भी प्रकार के खनन कार्य पर रोक लगी हुई है। इससे नदी का रूख खेतों की ओर हो गया है। खेतों के नीचे भू कटाव होने लगा है। कई बीघा भूमि नदी में बह चुकी है, जबकि नदी के दूसरी ओर पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में खनन कार्य पर किसी भी तरह की रोक नहीं है। हिमाचल प्रदेश से खनन माफिया रेत, बजरी और पत्थर उठाकर प्लांट में ले जा रहा है। इससे राज्य को भी राजस्व की हानी हो रही है। रोक के हटने से जहां सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं नदी पर मंडराने वाला बाढ़ का खतरा भी समाप्त हो जाएगा। कहा कि किसी भी राज्य में वन्य जीव क्षेत्र के वास स्थान के पांच किमी के दायरे में खनन कार्य पर रोक होती है। लेकिन उत्तराखंड में यह दायरा 10 किमी किया हुआ है।
ज्ञापन सौंपने वालों में मनोज चौधरी, रामकुमार शर्मा, पारस कन्नौजिया, डॉ. हरेंद्र चौधरी, अनु शर्मा, रोमा, योगेंद्र सिंह, साहिल पठान, सुरेश चौबे, रवि कन्नौजिया, राज चौहान, सतार, उमेश, सोनू, राहुल, रमेश चंद्र आदि शामिल रहे।
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यमुना नदी में खनन कार्य पर लगी रोक हटाने की मांग पर आम आदमी पार्टी ने तहसील मुख्यालय पर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। उन्होंने खनन कार्य पर लगी रोक हटाने की मांग पर तहसीलदार प्रकाश शाह के माध्यम से राज्यपाल को ज्ञापन भेजा।
ज्ञापन में जिलाध्यक्ष संदीप दुबे ने कहा कि वर्तमान में आसन वैटलैंड से लेकर डाकपत्थर बैराज तक 10 किमी के दायरे में किसी भी प्रकार के खनन कार्य पर रोक लगी हुई है। इससे नदी का रूख खेतों की ओर हो गया है। खेतों के नीचे भू कटाव होने लगा है। कई बीघा भूमि नदी में बह चुकी है, जबकि नदी के दूसरी ओर पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में खनन कार्य पर किसी भी तरह की रोक नहीं है। हिमाचल प्रदेश से खनन माफिया रेत, बजरी और पत्थर उठाकर प्लांट में ले जा रहा है। इससे राज्य को भी राजस्व की हानी हो रही है। रोक के हटने से जहां सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं नदी पर मंडराने वाला बाढ़ का खतरा भी समाप्त हो जाएगा। कहा कि किसी भी राज्य में वन्य जीव क्षेत्र के वास स्थान के पांच किमी के दायरे में खनन कार्य पर रोक होती है। लेकिन उत्तराखंड में यह दायरा 10 किमी किया हुआ है।
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ज्ञापन सौंपने वालों में मनोज चौधरी, रामकुमार शर्मा, पारस कन्नौजिया, डॉ. हरेंद्र चौधरी, अनु शर्मा, रोमा, योगेंद्र सिंह, साहिल पठान, सुरेश चौबे, रवि कन्नौजिया, राज चौहान, सतार, उमेश, सोनू, राहुल, रमेश चंद्र आदि शामिल रहे।
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