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जलेथा में एनआइटी के स्थायी कैंपस के निर्माण के आसार
Updated Thu, 11 Oct 2018 10:57 PM IST
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श्रीनगर। एनआईटी (राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान) के स्थायी परिसर के जलेथा में निर्माण के आसार दिखाई दे रहे हैं। जिला प्रशासन से नाप और सरकारी भूमि की रजिस्ट्री एनआईटी के नाम करने का प्रस्ताव राजस्व विभाग को चला गया है। फिलहाल कैंपस निर्माण के लिए लगभग 112 एकड़ (45 हेक्टेअर) भूमि चयनित की गई है। प्रशासन को आस है कि यदि एक बार यहां निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा, तो जलेथा या आसपास के गांवों में जमीन मिल जाएगी।
उत्तराखंड को वर्ष 2009 में एनआईटी मिला था। वर्ष 2010 से श्रीनगर में इसका अस्थायी रुप से संचालन भी हो गया। लंबी इंतजारी के बाद सुमाड़ी और आसपास के इलाकों में जमीन देखी गई, लेकिन इसको अनुपयुक्त बताकर खारिज कर दिया गया। अब काफी तलाश के बाद सुमाड़ी के समीप और श्रीनगर से करीब 18 किलोमीटर दूर जलेथा गांव में जमीन चिहिृृत की गई है। यहां 25.986 हे. सरकारी भूमि और 18.939 हे. नाप भूमि मिल चुकी है। विगत 26 जून को ग्रामीण नाप भूमि हस्तांतरण की एनओसी प्रशासन को सौंप चुके हैं। जबकि गत सितंबर माह में जिला प्रशासन की ओर से 44.925 हे. भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव शासन के राजस्व विभाग को भेज दिया है। जितनी जल्दी राजस्व विभाग उक्त भूमि की रजिस्ट्री एनआईटी के नाम करता है, उतनी ही जल्दी स्थायी कैंपस निर्माण का रास्ता साफ होगा। सूत्रों की माने, तो एमएचआरडी (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) तो 50 एकड़ जमीन उपलब्ध होने पर भी निर्माण कार्य कराने को तैयार बैठा है। क्योंकि एमएचआरडी का मानना है कि वर्तमान में निर्माण तकनीकी काफी बदल चुकी है। कम जगह में भी जरूरत के मुताबिक निर्माण हो सकता है।
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-- राज्य सरकार से स्थायी कैंपस के लिए जमीन मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। फिलहाल निर्माण मद में 75 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं। जैसे-जैसे काम होगा, बजट मिलता जाएगा। प्रो. आरबी पटेल, कार्यवाहक निदेशक एनआईटी उत्तराखंड
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--- जलेथा में 112 एकड़ जमीन मिल गई है। राजस्व विभाग से रजिस्ट्री होनी है। इस प्रक्रिया में थोड़ा समय लगता है। एमएचआरडी मंत्री से भी इस विषय में बात हो चुकी है। डा. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री उत्तराखंड
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जारी
सन्दीप
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उत्तराखंड को वर्ष 2009 में एनआईटी मिला था। वर्ष 2010 से श्रीनगर में इसका अस्थायी रुप से संचालन भी हो गया। लंबी इंतजारी के बाद सुमाड़ी और आसपास के इलाकों में जमीन देखी गई, लेकिन इसको अनुपयुक्त बताकर खारिज कर दिया गया। अब काफी तलाश के बाद सुमाड़ी के समीप और श्रीनगर से करीब 18 किलोमीटर दूर जलेथा गांव में जमीन चिहिृृत की गई है। यहां 25.986 हे. सरकारी भूमि और 18.939 हे. नाप भूमि मिल चुकी है। विगत 26 जून को ग्रामीण नाप भूमि हस्तांतरण की एनओसी प्रशासन को सौंप चुके हैं। जबकि गत सितंबर माह में जिला प्रशासन की ओर से 44.925 हे. भूमि हस्तांतरण का प्रस्ताव शासन के राजस्व विभाग को भेज दिया है। जितनी जल्दी राजस्व विभाग उक्त भूमि की रजिस्ट्री एनआईटी के नाम करता है, उतनी ही जल्दी स्थायी कैंपस निर्माण का रास्ता साफ होगा। सूत्रों की माने, तो एमएचआरडी (मानव संसाधन विकास मंत्रालय) तो 50 एकड़ जमीन उपलब्ध होने पर भी निर्माण कार्य कराने को तैयार बैठा है। क्योंकि एमएचआरडी का मानना है कि वर्तमान में निर्माण तकनीकी काफी बदल चुकी है। कम जगह में भी जरूरत के मुताबिक निर्माण हो सकता है।
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-- राज्य सरकार से स्थायी कैंपस के लिए जमीन मिलने के बाद निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। फिलहाल निर्माण मद में 75 करोड़ रुपये उपलब्ध हैं। जैसे-जैसे काम होगा, बजट मिलता जाएगा। प्रो. आरबी पटेल, कार्यवाहक निदेशक एनआईटी उत्तराखंड
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--- जलेथा में 112 एकड़ जमीन मिल गई है। राजस्व विभाग से रजिस्ट्री होनी है। इस प्रक्रिया में थोड़ा समय लगता है। एमएचआरडी मंत्री से भी इस विषय में बात हो चुकी है। डा. धन सिंह रावत, उच्च शिक्षा मंत्री उत्तराखंड
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