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साहित्यकार मोहनलाल बाबुलकर का एम्स में निधन
Updated Mon, 08 Oct 2018 09:44 PM IST
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देवप्रयाग। लोक साहित्यकार व कई पत्र-पत्रिकाओं के संपादक मोहनलाल बाबुलकर का रविवार शाम ऋषिकेश एम्स में निधन हो गया। 87 वर्षीय बाबुलकर को पिछले हफ्ते बीमार होने पर एम्स में भर्ती करवाया गया था।
गढ़वाली भाषा साहित्य के क्षेत्र में अहम योगदान देने वाले बाबुलकर का जन्म 1931 में देवप्रयाग के निकट मुछियाली गांव में हुआ था। शुरूआती शिक्षा पौड़ी के बाद वह इलाहाबाद लोक सेवा आयोग के माध्यम से शिक्षा अधिकारी बने। हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से 1964 में उनकी पहली कृति गढ़वाली लोक साहित्य का विवेचनात्मक अध्ययन प्रकाशित हुई, जिसके बाद उनकी गढ़वाल की लोकधर्मी कला, जौनसारी बोली, साहित्य व कला, हिमालय में मत मतांतर, जमना से गंगा, लोक नाट्य की पीठिका सहित गढ़वाली साहित्य की सर्वानुक्रमणिका आदि महत्वपूर्ण कृतियां प्रकाशित हुई। उनकी कई कृतियां उत्तर प्रदेश शासन से पुरस्कृत भी हुई। शिक्षा विभाग पर भी उन्होंने करीब 32 पुस्तकें लिखी हैं। इसके अलावा बाबुलकर ने पर्वतीय साहित्य कोष, गढ़वाल की जीवित विभूतियां, उप्र शासन की पत्रिका नवज्योति सहित वसुधारा, सरहदी, निरीक्षण आदि पत्रिकाओं का संपादन भी किया। जबकि उत्तराखंड की विभूतियों के जीवन पर प्रकाशित करीब 15 ग्रंथों का संपादन भी बाबुलकर द्वारा किया गया। गढ़वाल की लोक कला, संस्कृति व साहित्य पर उनके तीन सौ से अधिक महत्वपूर्ण लेख पत्र पत्रिकाओ में प्रकाशित हुए। वर्ष 2006 में बाबुलकर पर अभिनंदन ग्रंथ भी निकाला गया। उत्तराखंड की लोक कला व साहित्य को समर्पित मोहनलाल बाबुलकर के निधन पर जाह्नवी संस्था, देवप्रयाग प्रकाश पुंज सोसायटी सहित अनेक साहित्यकारों व पत्रकारों ने गहरा शोक जताया है।
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गढ़वाली भाषा साहित्य के क्षेत्र में अहम योगदान देने वाले बाबुलकर का जन्म 1931 में देवप्रयाग के निकट मुछियाली गांव में हुआ था। शुरूआती शिक्षा पौड़ी के बाद वह इलाहाबाद लोक सेवा आयोग के माध्यम से शिक्षा अधिकारी बने। हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग से 1964 में उनकी पहली कृति गढ़वाली लोक साहित्य का विवेचनात्मक अध्ययन प्रकाशित हुई, जिसके बाद उनकी गढ़वाल की लोकधर्मी कला, जौनसारी बोली, साहित्य व कला, हिमालय में मत मतांतर, जमना से गंगा, लोक नाट्य की पीठिका सहित गढ़वाली साहित्य की सर्वानुक्रमणिका आदि महत्वपूर्ण कृतियां प्रकाशित हुई। उनकी कई कृतियां उत्तर प्रदेश शासन से पुरस्कृत भी हुई। शिक्षा विभाग पर भी उन्होंने करीब 32 पुस्तकें लिखी हैं। इसके अलावा बाबुलकर ने पर्वतीय साहित्य कोष, गढ़वाल की जीवित विभूतियां, उप्र शासन की पत्रिका नवज्योति सहित वसुधारा, सरहदी, निरीक्षण आदि पत्रिकाओं का संपादन भी किया। जबकि उत्तराखंड की विभूतियों के जीवन पर प्रकाशित करीब 15 ग्रंथों का संपादन भी बाबुलकर द्वारा किया गया। गढ़वाल की लोक कला, संस्कृति व साहित्य पर उनके तीन सौ से अधिक महत्वपूर्ण लेख पत्र पत्रिकाओ में प्रकाशित हुए। वर्ष 2006 में बाबुलकर पर अभिनंदन ग्रंथ भी निकाला गया। उत्तराखंड की लोक कला व साहित्य को समर्पित मोहनलाल बाबुलकर के निधन पर जाह्नवी संस्था, देवप्रयाग प्रकाश पुंज सोसायटी सहित अनेक साहित्यकारों व पत्रकारों ने गहरा शोक जताया है।
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