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नंदा लोक जात के लिए ग्रामीणों ने गदेरे में बनाया लकड़ी का पुल
Updated Mon, 10 Sep 2018 10:25 PM IST
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देवाल। वेदनी से देवराड़ा आने वाले मार्ग पर घयान गदेरे को पार करने के लिए ग्रामीणों ने स्वयं ही लकड़ी की अस्थायी पुलिया बनाई है। यहां नंदा देवी की यात्रा 16 सितंबर को पहुंचेगी।
वांक गांव के पास घयान गदेरे में 15 जुलाई की आपदा में पुलिया बह गई थी, तब से ग्रामीण विभाग और प्रशासन से यहां नंदा लोक जात यात्रा के लिए वैकल्पिक पुल बनाने की मांग कर रहे हैं लेकिन कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। हर साल होने वाली नंदा लोक जात यात्रा इस बार 16 सितंबर की सुबह वेदनी कुुंड पहुंचेगी। यहां पूजा के बाद नंदा की डोली वांक गांव के लिए रवाना होगी, लेकिन रास्ते में घयान गदेरे में 15 जुलाई को पुलिया बह जाने से आवाजाही बंद पड़ी है। ऐसे में नंदा की डोली को गदेरा पार करवाने के लिए ग्रामीणों ने खुद ही प्रयास शुरू किए। उन्होंने शनिवार से अस्थायी पुलिया बनाने का काम शुरू किया और सोमवार को यहां लकड़ी की पुलिया तैयार कर दी। इससे पूर्व भी घाट के स्यांरी गांव में रस्सी के सहारे नंदा की यात्रा को पार करवाया गया था। ग्राम प्रधान खड़क सिंह ने कहा कि यहां पुल न बनने पर देवी की डोली नहीं उठाने की चेतावनी तक दी थी। इसके बावजूद प्रशासन नहीं जागा तो ग्रामीणों ने खुद ही पहल की। ग्रामीणों ने यहां आवाजाही के लिए तीन दिनों में अस्थायी पुलिया बना दी। पुलिया बनाने में खड़क सिंह, उमराव सिंह, इंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, नंदी देवी, खुशाल सिंह, देवराम, पदम राम, कलम राम, पान सिंह, बिमला देवी आदि ने सहयोग दिया। वहीं वाण, हाटकल्याणी सहित अन्य गांवों में भी नंदा की यात्रा के लिए स्वागत के लिए ग्रामीण रास्तों की सफाई और मरम्मत करने में जुटे हैं।
वांक गांव के पास घयान गदेरे में 15 जुलाई की आपदा में पुलिया बह गई थी, तब से ग्रामीण विभाग और प्रशासन से यहां नंदा लोक जात यात्रा के लिए वैकल्पिक पुल बनाने की मांग कर रहे हैं लेकिन कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। हर साल होने वाली नंदा लोक जात यात्रा इस बार 16 सितंबर की सुबह वेदनी कुुंड पहुंचेगी। यहां पूजा के बाद नंदा की डोली वांक गांव के लिए रवाना होगी, लेकिन रास्ते में घयान गदेरे में 15 जुलाई को पुलिया बह जाने से आवाजाही बंद पड़ी है। ऐसे में नंदा की डोली को गदेरा पार करवाने के लिए ग्रामीणों ने खुद ही प्रयास शुरू किए। उन्होंने शनिवार से अस्थायी पुलिया बनाने का काम शुरू किया और सोमवार को यहां लकड़ी की पुलिया तैयार कर दी। इससे पूर्व भी घाट के स्यांरी गांव में रस्सी के सहारे नंदा की यात्रा को पार करवाया गया था। ग्राम प्रधान खड़क सिंह ने कहा कि यहां पुल न बनने पर देवी की डोली नहीं उठाने की चेतावनी तक दी थी। इसके बावजूद प्रशासन नहीं जागा तो ग्रामीणों ने खुद ही पहल की। ग्रामीणों ने यहां आवाजाही के लिए तीन दिनों में अस्थायी पुलिया बना दी। पुलिया बनाने में खड़क सिंह, उमराव सिंह, इंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, नंदी देवी, खुशाल सिंह, देवराम, पदम राम, कलम राम, पान सिंह, बिमला देवी आदि ने सहयोग दिया। वहीं वाण, हाटकल्याणी सहित अन्य गांवों में भी नंदा की यात्रा के लिए स्वागत के लिए ग्रामीण रास्तों की सफाई और मरम्मत करने में जुटे हैं।
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