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एबीवीपी ने आर्यन को दिया झटका
Updated Mon, 03 Sep 2018 01:44 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, विकासनगर
छात्रसंघ चुनाव नजदीक आते ही जोड़ तोड़ की राजनीति भी शुरू हो गई है। रविवार को एबीवीपी ने आर्यन को जोर का झटका देते हुए संगठन की ओर से कोषाध्यक्ष पद के उम्मीदवार आकाश सिंह को एबीवीपी में शामिल करा लिया। आकाश के एबीवीपी में शामिल होते ही आर्यन छात्र संगठन में खलबली मच गई। अब तक एबीवीपी में पड़ी फूट के कारण आर्यन छात्र संगठन से जुड़े छात्र नेता अपना पक्ष मजबूत मान रहे थे। लेकिन नोमिनेशन के बाद अचानक आकाश के एबीवीपी में चले जाने से आर्यन छात्र संगठन में खलबली मची हुई है।
उल्लेखनीय है कि अध्यक्ष पद पर चयन को लेकर एबीवीपी में दो फाड़ हो चुके हैं। 150 से अधिक कार्यकर्ताओं ने संगठन को छोड़कर निर्दलीय प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। इस कारण एबीवीपी महज अध्यक्ष पद पर ही अपना उम्मीदवार खड़ा करने में कामयाब हो सकी थी। कॉलेज के चुनाव में हमेशा एबीवीपी और आर्यन के बीच ही सीधा मुकाबला रहा है। ऐसे में एबीवीपी में पड़ी इस फूट का सबसे ज्यादा फायदा आर्यन को ही मिलने वाला था। अचानक आकाश के एबीवीपी में शामिल होने से आर्यन छात्र संगठन में खलबली मची हुई है। दिनभर यह घटनाक्रम अन्य संगठनों में भी चर्चा का विषय बना रहा।
एबीवीपी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य शुभम गर्ग ने बताया कि चार सितंबर के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी कि संगठन कितने पदों पर चुनाव लड़ेगी। संगठन छोड़ कर बाहर गए कार्यकर्ताओं से वार्ता के प्रयास जारी हैं। जल्द ही इसका परिणाम देखने को मिलेगा। दूसरे संगठनों के भी कई छात्र नेता भी एबीवीपी के संपर्क में हैं।
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छात्रसंघ चुनाव नजदीक आते ही जोड़ तोड़ की राजनीति भी शुरू हो गई है। रविवार को एबीवीपी ने आर्यन को जोर का झटका देते हुए संगठन की ओर से कोषाध्यक्ष पद के उम्मीदवार आकाश सिंह को एबीवीपी में शामिल करा लिया। आकाश के एबीवीपी में शामिल होते ही आर्यन छात्र संगठन में खलबली मच गई। अब तक एबीवीपी में पड़ी फूट के कारण आर्यन छात्र संगठन से जुड़े छात्र नेता अपना पक्ष मजबूत मान रहे थे। लेकिन नोमिनेशन के बाद अचानक आकाश के एबीवीपी में चले जाने से आर्यन छात्र संगठन में खलबली मची हुई है।
उल्लेखनीय है कि अध्यक्ष पद पर चयन को लेकर एबीवीपी में दो फाड़ हो चुके हैं। 150 से अधिक कार्यकर्ताओं ने संगठन को छोड़कर निर्दलीय प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है। इस कारण एबीवीपी महज अध्यक्ष पद पर ही अपना उम्मीदवार खड़ा करने में कामयाब हो सकी थी। कॉलेज के चुनाव में हमेशा एबीवीपी और आर्यन के बीच ही सीधा मुकाबला रहा है। ऐसे में एबीवीपी में पड़ी इस फूट का सबसे ज्यादा फायदा आर्यन को ही मिलने वाला था। अचानक आकाश के एबीवीपी में शामिल होने से आर्यन छात्र संगठन में खलबली मची हुई है। दिनभर यह घटनाक्रम अन्य संगठनों में भी चर्चा का विषय बना रहा।
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एबीवीपी के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य शुभम गर्ग ने बताया कि चार सितंबर के बाद ही पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी कि संगठन कितने पदों पर चुनाव लड़ेगी। संगठन छोड़ कर बाहर गए कार्यकर्ताओं से वार्ता के प्रयास जारी हैं। जल्द ही इसका परिणाम देखने को मिलेगा। दूसरे संगठनों के भी कई छात्र नेता भी एबीवीपी के संपर्क में हैं।
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