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केमिकल युक्त जहरीला पानी पीने से 13 मवेशियों की मौत
Updated Fri, 24 Aug 2018 02:20 AM IST
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- पशुपालकों ने कंपनी प्रबंधन पर लगाया आरोप, पुलिस को दी तहरीर, पीसीबी टीम ने पानी का सैंपल लिए
ब्यूरो/अमर उजाला/सेलाकुई।
औद्योगिक क्षेत्र में एक फार्मा कंपनी के प्लांट से निकलने वाला केमिकल युक्त जहरीला पानी पीने से 13 मवेशियों की मौत हो गई, जबकि सात मवेशियों की हालत गंभीर बनी हुई है। पशुपालकों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने एनजीटी के नियमों को ताक पर प्लांट के पीछे बने खाली मैदान में जहरीले वेस्टेज पानी को छोड़ा हुआ था। मवेशियों ने जहरीले पानी का सेवन किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मवेशियों की मौत का कारण लिक्विड जहर आया है। सूचना पाकर मौके पर पहुंची प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की टीम ने कंपनी के पीछे बने खाली प्लांट से पानी के सैंपल भी भरें। मामले में पशुपालकों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है।
पुलिस की तहरीर में जहूर हसन और उसका पुत्र मोहम्मद अली पुत्र जहूर हसन दोनों निवासी सभावाला ने आरोप लगाया कि इन दिनों औद्योगिक क्षेत्र के पास खैरी गांव के पास अकबर कॉलोनी सेलाकुई में गुर्जरों ने डेरा डाला हुआ है। 21 अगस्त को वह दोनों 20 भैंसों को चराने के लिए आईजीए मेडिकल फार्मा कंपनी के पीछे स्थित मैदान में ले गए थे। जहां घास चरने के दौरान भैंसों ने कंपनी से निकलने वाले केमिकल युक्त जहरीले पानी का सेवन कर लिया। जिसके बाद से भैंसों की तबीयत खराब हो गई। स्थानीय डॉक्टर से इलाज के बाद भी उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। जिसके बाद बृहस्पतिवार की सुबह 13 भैंसों की अचानक मौत हो गई। सात भैंसों की हालत गंभीर बनी हुई है। मृतक भैंसों की पोस्टमार्टम जांच में मौत का कारण लिक्विड जहर आया है। पशुपालकों ने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधन ने एनजीटी के नियमों को ताक पर रख कंपनी से निकलने वाले जहरीले वेस्टेज पानी को मैदान में छोड़ा हुआ है। नियमानुसार जहरीले वेस्टेज को प्यूरीफाई करने के बाद दुबारा से प्रयोग में लाए जाने का प्रावधान है। लेकिन कंपनी प्रबंधन ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। घटना की जानकारी पता लगने के बाद कंपनी प्रबंधन ने मैदान में छोड़े गए पाइपों को वहां से हटा लिया।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक शिव सिंह राणा के नेतृत्व में पहुंची टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। जहां जहरीला केमिकल युक्त पानी के ट्रेस मिले हैं। टीम ने जांच के लिए पानी के सैंपल भरकर लैब भेज दिया है। वहीं, पीड़ित पशुपालक ने कंपनी प्रबंधन से मुआवजे की मांग की है।
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कंपनी के पीछे बने मैदान से पानी के सैंपल भरे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने में एक सप्ताह का समय लगेगा। जिसके बाद अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।
- शिव सिंह राणा, क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
आरोप बेबुनियाद हैं। कंपनी से किसी भी तरह के पानी का कोई रिसाव नहीं है। कंपनी प्रबंधन किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हैं।
- हेम कुमार सनवाल, प्लांट हेड
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ब्यूरो/अमर उजाला/सेलाकुई।
औद्योगिक क्षेत्र में एक फार्मा कंपनी के प्लांट से निकलने वाला केमिकल युक्त जहरीला पानी पीने से 13 मवेशियों की मौत हो गई, जबकि सात मवेशियों की हालत गंभीर बनी हुई है। पशुपालकों का आरोप है कि कंपनी प्रबंधन ने एनजीटी के नियमों को ताक पर प्लांट के पीछे बने खाली मैदान में जहरीले वेस्टेज पानी को छोड़ा हुआ था। मवेशियों ने जहरीले पानी का सेवन किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी मवेशियों की मौत का कारण लिक्विड जहर आया है। सूचना पाकर मौके पर पहुंची प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) की टीम ने कंपनी के पीछे बने खाली प्लांट से पानी के सैंपल भी भरें। मामले में पशुपालकों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ पुलिस को तहरीर दी है।
पुलिस की तहरीर में जहूर हसन और उसका पुत्र मोहम्मद अली पुत्र जहूर हसन दोनों निवासी सभावाला ने आरोप लगाया कि इन दिनों औद्योगिक क्षेत्र के पास खैरी गांव के पास अकबर कॉलोनी सेलाकुई में गुर्जरों ने डेरा डाला हुआ है। 21 अगस्त को वह दोनों 20 भैंसों को चराने के लिए आईजीए मेडिकल फार्मा कंपनी के पीछे स्थित मैदान में ले गए थे। जहां घास चरने के दौरान भैंसों ने कंपनी से निकलने वाले केमिकल युक्त जहरीले पानी का सेवन कर लिया। जिसके बाद से भैंसों की तबीयत खराब हो गई। स्थानीय डॉक्टर से इलाज के बाद भी उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ। जिसके बाद बृहस्पतिवार की सुबह 13 भैंसों की अचानक मौत हो गई। सात भैंसों की हालत गंभीर बनी हुई है। मृतक भैंसों की पोस्टमार्टम जांच में मौत का कारण लिक्विड जहर आया है। पशुपालकों ने आरोप लगाया कि कंपनी प्रबंधन ने एनजीटी के नियमों को ताक पर रख कंपनी से निकलने वाले जहरीले वेस्टेज पानी को मैदान में छोड़ा हुआ है। नियमानुसार जहरीले वेस्टेज को प्यूरीफाई करने के बाद दुबारा से प्रयोग में लाए जाने का प्रावधान है। लेकिन कंपनी प्रबंधन ने ऐसा कुछ भी नहीं किया। घटना की जानकारी पता लगने के बाद कंपनी प्रबंधन ने मैदान में छोड़े गए पाइपों को वहां से हटा लिया।
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प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय प्रबंधक शिव सिंह राणा के नेतृत्व में पहुंची टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। जहां जहरीला केमिकल युक्त पानी के ट्रेस मिले हैं। टीम ने जांच के लिए पानी के सैंपल भरकर लैब भेज दिया है। वहीं, पीड़ित पशुपालक ने कंपनी प्रबंधन से मुआवजे की मांग की है।
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कंपनी के पीछे बने मैदान से पानी के सैंपल भरे गए हैं। जांच रिपोर्ट आने में एक सप्ताह का समय लगेगा। जिसके बाद अग्रिम कार्यवाही की जाएगी।
- शिव सिंह राणा, क्षेत्रीय प्रबंधक प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
आरोप बेबुनियाद हैं। कंपनी से किसी भी तरह के पानी का कोई रिसाव नहीं है। कंपनी प्रबंधन किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हैं।
- हेम कुमार सनवाल, प्लांट हेड