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किस किसकी चौखट तक नहीं पहुंचे बाढ़ पीड़ित
Updated Wed, 08 Aug 2018 01:09 AM IST
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हर बार छले गए गौहरीमाफी के ग्रामीण
समय रहते जागती सरकार, तो बेकाबू नहीं होते हालात
ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
ऋषिकेश। ग्रामसभा गौहरीमाफी में बाढ़ के संकट से पहली बार नहीं जूझ रही है। करीब आधा दशक से गांव के बाशिंदे बाढ़ से जूझते हैं। दर्जनों बार ग्रामीण स्थाई बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चौखट पर गुहार लगा चुके हैं। ग्रामीण सड़कों पर भी उतरे। बावजूद इसके बाढ़ से गांव की सुरक्षा के लिए आजतक मुकम्मल इंतजाम नहीं किए गए।
रायवाला क्षेत्र अंतर्गत गौहरीमाफी गांव तीन नदियों से घिरा है। इनमें सुसवा, सौंग और गंगा शामिल है। वर्ष 2013 की आपदा में गंगा और सौंग की बाढ़ से गांव की कई हेक्टेयर उपजाऊ भूमि बह गई थी। गांव में गंगा और सौंग ही नहीं, बल्कि सुसवा की बाढ़ ने भी कहर बरपाया था। इससे पहले से ही ग्रामीण बाढ़ सुरक्षा कार्यों कराने की मांग को लेकर समय-समय पर आंदोलित रहे हैं। ग्रामीणों ने अपनी मांग को मनवाने के लिए धरना-प्रदर्शन से लेकर नेशनल हाईवे तक जाम किया। बावजूद इसके न शासन और न ही प्रशासन ने उनकी सुनवाई की। जनप्रतिनिधियों ने भी महज आश्वासन का झुनझुना थमाया।
पानी की आवाज से सिहर जा रहे हैं ग्रामीण
गौहरीमाफी के ग्रामीणों में सौंग नदी की बाढ़ का खौफ घर कर गया है। ग्रामीण पानी की आवाज से डर रहे हैं। बाढ़ से ग्रामीणों की रातों की नींद हराम हो गई है। उन्हें हरवक्त बाढ़ में बहने का खतरा सता रहा है। ग्रामीण देवेंद्र सेमवाल, रोहित नौटियाल, रमेश कंडारी, चतर सिंह आदि ने बताया कि कई बार मांग करने पर भी बाढ़ सुरक्षा कार्य नहीं हुए।
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समय रहते जागती सरकार, तो बेकाबू नहीं होते हालात
ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
ऋषिकेश। ग्रामसभा गौहरीमाफी में बाढ़ के संकट से पहली बार नहीं जूझ रही है। करीब आधा दशक से गांव के बाशिंदे बाढ़ से जूझते हैं। दर्जनों बार ग्रामीण स्थाई बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की चौखट पर गुहार लगा चुके हैं। ग्रामीण सड़कों पर भी उतरे। बावजूद इसके बाढ़ से गांव की सुरक्षा के लिए आजतक मुकम्मल इंतजाम नहीं किए गए।
रायवाला क्षेत्र अंतर्गत गौहरीमाफी गांव तीन नदियों से घिरा है। इनमें सुसवा, सौंग और गंगा शामिल है। वर्ष 2013 की आपदा में गंगा और सौंग की बाढ़ से गांव की कई हेक्टेयर उपजाऊ भूमि बह गई थी। गांव में गंगा और सौंग ही नहीं, बल्कि सुसवा की बाढ़ ने भी कहर बरपाया था। इससे पहले से ही ग्रामीण बाढ़ सुरक्षा कार्यों कराने की मांग को लेकर समय-समय पर आंदोलित रहे हैं। ग्रामीणों ने अपनी मांग को मनवाने के लिए धरना-प्रदर्शन से लेकर नेशनल हाईवे तक जाम किया। बावजूद इसके न शासन और न ही प्रशासन ने उनकी सुनवाई की। जनप्रतिनिधियों ने भी महज आश्वासन का झुनझुना थमाया।
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पानी की आवाज से सिहर जा रहे हैं ग्रामीण
गौहरीमाफी के ग्रामीणों में सौंग नदी की बाढ़ का खौफ घर कर गया है। ग्रामीण पानी की आवाज से डर रहे हैं। बाढ़ से ग्रामीणों की रातों की नींद हराम हो गई है। उन्हें हरवक्त बाढ़ में बहने का खतरा सता रहा है। ग्रामीण देवेंद्र सेमवाल, रोहित नौटियाल, रमेश कंडारी, चतर सिंह आदि ने बताया कि कई बार मांग करने पर भी बाढ़ सुरक्षा कार्य नहीं हुए।
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