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गढ़वाल विवि शिक्षणेतर कर्मचारी परिषद के चुनाव से पूर्व मची रार
Updated Tue, 07 Aug 2018 10:44 PM IST
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श्रीनगर। एचएनबी केंद्रीय गढ़वाल विवि शिक्षणेत्तर कर्मचारी परिषद के चुनाव से पहले रार मच गई है। कर्मचारियों के एक गुट ने अस्थायी कर्मचारियों को परिषद में शामिल करने पर आपत्ति जताई है। जिस पर फर्म सोसाइटी एवं चिट्स फंड्स के उपनिबंधक पौड़ी ने 13 अगस्त को परिषद के अध्यक्ष राजेंद्र भंडारी और शिकायतकर्ता नरेश खंडूड़ी को अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया है। वहीं, उक्त गुट ने इस मामले में अधिवक्ता के माध्यम से गढ़वाल विवि के कुलसचिव, चुनाव अधिकारी व उप निबंधक को नोटिस भी भेजा है।
मंगलवार को गढ़वाल विवि के शिक्षणेत्तर कर्मचारी परिषद के पूर्व अध्यक्ष नरेश खंडूड़ी व अन्य कर्मचारियों ने उप निबंधक फर्म सोसाइटी एवं चिट्स फंड्स/मुख्य कोषाधिकारी से मुलाकात कर लगभग 167 कर्मचारियों को हस्ताक्षर युक्त पत्र सौंपा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में जब परिषद का पंजीकरण हुआ था, तो उसमें स्पष्ट कर दिया गया था कि शिक्षणेत्तर कर्मचारी परिषद के सदस्य नियमित/स्थायी कर्मचारी होंगे और उन्हें मतदान का अधिकार होगा, लेकिन कर्मचारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर वर्ष 2018 में नियमावली में फेरबदल कर दिया गया। इसमें लिख दिया गया कि कर्मचारी परिषद के सदस्य नियमित/स्थायी/नियत वेतन कर्मचारी जिनको विवि द्वारा ग्रेड पे, मूल वेतन व डीए देय है, को ही मतदान का अधिकार होगा। यदि वर्तमान कार्यकारिणी ने नियमावली में संशोधन करना था तो आम बैठक बुलाकर संशोधन कर सकते थे।
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मंगलवार को गढ़वाल विवि के शिक्षणेत्तर कर्मचारी परिषद के पूर्व अध्यक्ष नरेश खंडूड़ी व अन्य कर्मचारियों ने उप निबंधक फर्म सोसाइटी एवं चिट्स फंड्स/मुख्य कोषाधिकारी से मुलाकात कर लगभग 167 कर्मचारियों को हस्ताक्षर युक्त पत्र सौंपा। उन्होंने बताया कि वर्ष 2010 में जब परिषद का पंजीकरण हुआ था, तो उसमें स्पष्ट कर दिया गया था कि शिक्षणेत्तर कर्मचारी परिषद के सदस्य नियमित/स्थायी कर्मचारी होंगे और उन्हें मतदान का अधिकार होगा, लेकिन कर्मचारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर वर्ष 2018 में नियमावली में फेरबदल कर दिया गया। इसमें लिख दिया गया कि कर्मचारी परिषद के सदस्य नियमित/स्थायी/नियत वेतन कर्मचारी जिनको विवि द्वारा ग्रेड पे, मूल वेतन व डीए देय है, को ही मतदान का अधिकार होगा। यदि वर्तमान कार्यकारिणी ने नियमावली में संशोधन करना था तो आम बैठक बुलाकर संशोधन कर सकते थे।
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