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मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर विचार गोष्ठी
Updated Wed, 01 Aug 2018 02:09 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, डोईवाला।
कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 138वीं जयंती के मौके पर पब्लिक इंटर कॉलेज डोईवाला में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर में जयंती पर तमाम लोगों ने उनके चित्र के समक्ष पुष्प चढ़ाए। सर्वप्रथम इंटर की छात्रा सरला और सुजीत सिंह ने प्रेमचंद के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता के रूप में कॉलेज प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार ने कहा कि समाज के दर्द, किसान और दलित पीड़ा को जितना सजीव तरीके से प्रेमचंद ने लेखबद्ध किया है उतना किसी अन्य लेखक नहीं कर पाया।
प्रेमचंद की रचनाएं आम पाठक को उत्साहित करती हैं। वरिष्ठ शिक्षक बीडी ममंगाई और नरेश वर्मा ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं में तत्कालीन समाज के दर्शन होते हैं, साथ ही उन्होंने अपनी रचनाओं में भविष्य को दिखाने का प्रयास किया था। गोष्ठी संयोजक हिंदी विभागाध्यक्ष अश्वनी गुप्ता ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं वर्तमान समय में अधिक प्रासंगिक हो गई है। गोष्ठी में आरपी बड़ोनी, जेपी चमोली, रत्नेश द्विवेदी, ओमप्रकाश काला, आशुतोष डबराल, चेतन कोठारी, वेदप्रकाश धीमान और मदनलाल थपलियाल आदि तमाम लोग मौजूद रहे थे।
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कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की 138वीं जयंती के मौके पर पब्लिक इंटर कॉलेज डोईवाला में विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। विद्यालय परिसर में जयंती पर तमाम लोगों ने उनके चित्र के समक्ष पुष्प चढ़ाए। सर्वप्रथम इंटर की छात्रा सरला और सुजीत सिंह ने प्रेमचंद के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डाला। मुख्य वक्ता के रूप में कॉलेज प्रधानाचार्य जितेंद्र कुमार ने कहा कि समाज के दर्द, किसान और दलित पीड़ा को जितना सजीव तरीके से प्रेमचंद ने लेखबद्ध किया है उतना किसी अन्य लेखक नहीं कर पाया।
प्रेमचंद की रचनाएं आम पाठक को उत्साहित करती हैं। वरिष्ठ शिक्षक बीडी ममंगाई और नरेश वर्मा ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाओं में तत्कालीन समाज के दर्शन होते हैं, साथ ही उन्होंने अपनी रचनाओं में भविष्य को दिखाने का प्रयास किया था। गोष्ठी संयोजक हिंदी विभागाध्यक्ष अश्वनी गुप्ता ने कहा कि प्रेमचंद की रचनाएं वर्तमान समय में अधिक प्रासंगिक हो गई है। गोष्ठी में आरपी बड़ोनी, जेपी चमोली, रत्नेश द्विवेदी, ओमप्रकाश काला, आशुतोष डबराल, चेतन कोठारी, वेदप्रकाश धीमान और मदनलाल थपलियाल आदि तमाम लोग मौजूद रहे थे।
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