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श्रावण मास में शिव अराधना मनुष्य के लिए फलदाई
Updated Wed, 01 Aug 2018 02:09 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, मुनिकीरेती ।
कथा वाचक आचार्य शिव स्वरूप नौटियाल ने कहा कि श्रावण मास में भगवान शिव की कथा श्रवण करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। इस माह में शिव की आराधना करना सबसे उत्तम माना जाता है। श्री शिव महापुराण कथा यज्ञ समिति, चौदहबीघा ढालवाला की ओर से मंगलवार को शिव महापुराण कथा का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस मौके पर त्रिवेणीघाट गंगा तट से चौदहबीघा स्थित कथा स्थल तक भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस दौरान कलश पूजन के साथ ही भगवान शिव की आरती उतारी गई।
धार्मिक अनुष्ठान में कथा प्रवचन करते हुए आचार्य शिवस्वरूप नौटियाल ने कहा कि श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना मनुष्य के फलदायी सिद्ध होती है। शिव कथा श्रवण मात्र से ही मनुष्य की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। इस दौरान सभी श्रद्धालु भगवान शिव के भजनों पर झूमकर भक्ति विभोर हो उठे। धार्मिक अनुष्ठान में आयोजन समिति की अध्यक्ष सरस्वती जोशी, संयोजक उषा बडोला, इंदिरा आर्य, निर्मला उनियाल, सरिता भंडारी, सीमा बिजल्वाण, मीना मदवाण, दीपा भट्ट, विमला आर्य, सुंदरी बिजल्वाण, हेमलता मदवाण, रामप्यारी सेमवाल, राजकुमारी जखमोला, सूर्यचंद्र सिंह चौहान, सुरेंद्र कुलियाल, आशीष कुकरेती, सूरजमणि भट्ट, राकेश भट्ट आदि मौजूद थे।
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कथा वाचक आचार्य शिव स्वरूप नौटियाल ने कहा कि श्रावण मास में भगवान शिव की कथा श्रवण करने से मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। इस माह में शिव की आराधना करना सबसे उत्तम माना जाता है। श्री शिव महापुराण कथा यज्ञ समिति, चौदहबीघा ढालवाला की ओर से मंगलवार को शिव महापुराण कथा का विधिवत शुभारंभ किया गया। इस मौके पर त्रिवेणीघाट गंगा तट से चौदहबीघा स्थित कथा स्थल तक भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस दौरान कलश पूजन के साथ ही भगवान शिव की आरती उतारी गई।
धार्मिक अनुष्ठान में कथा प्रवचन करते हुए आचार्य शिवस्वरूप नौटियाल ने कहा कि श्रावण मास में भगवान शिव की आराधना मनुष्य के फलदायी सिद्ध होती है। शिव कथा श्रवण मात्र से ही मनुष्य की हर मनोकामना पूर्ण हो जाती है। इस दौरान सभी श्रद्धालु भगवान शिव के भजनों पर झूमकर भक्ति विभोर हो उठे। धार्मिक अनुष्ठान में आयोजन समिति की अध्यक्ष सरस्वती जोशी, संयोजक उषा बडोला, इंदिरा आर्य, निर्मला उनियाल, सरिता भंडारी, सीमा बिजल्वाण, मीना मदवाण, दीपा भट्ट, विमला आर्य, सुंदरी बिजल्वाण, हेमलता मदवाण, रामप्यारी सेमवाल, राजकुमारी जखमोला, सूर्यचंद्र सिंह चौहान, सुरेंद्र कुलियाल, आशीष कुकरेती, सूरजमणि भट्ट, राकेश भट्ट आदि मौजूद थे।
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