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गढ़वाल विवि का कारनामा

Fri, 27 Jul 2018 10:32 PM IST
Updated Fri, 27 Jul 2018 10:32 PM IST
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गढ़वाल विवि का कारनामा
श्रीनगर। गढ़वाल विवि में इन दिनों एक वाहन बिल चर्चा का विषय बना है। विवि प्रशासन ने एक ट्रंासपोर्ट एजेंसी को मेरठ से श्रीनगर टैक्सी बुकिंग (आना-जाना, 7 दिन ठहरना) के लिए 26 हजार 670 रुपये का भुगतान किया है। बताया जा रहा है कि उक्त बिल में मेरठ से श्रीनगर आने जाने में 1400 किमी का सफर अंकित किया गया है। जबकि मेरठ से श्रीनगर आने-जाने में करीब 600 किमी का सफर तय करना पड़ता है। विवि के कर्मचारियों ने मामले की जांच की मांग की है।
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20 जून को गढ़वाल विवि में कार्यपरिषद की ओर से गठित 3 सदस्यीय कमेटी विभिन्न अनियमिताओं की जांच के लिए पहुंची थी। कमेटी के एक सदस्य यहां मेरठ से पहुंचे थे। इसके लिए मेरठ से फ्रेंड ट्रांसपोर्ट एजेंसी के वाहन को सात दिन के लिए बुक किया था। उक्त सदस्य ने श्रीनगर से मेरठ आने जाने के साथ ही 7 दिनों तक चालक और वाहन के यहां ठहरने का 26 हजार 670 रुपये का क्लेम विवि में किया। विवि के अधिकारियों ने बिल भी पास कर दिया। सूत्रों के अनुसार, ट्रांसपोर्ट एजेंसी के बिल में मेरठ-श्रीनगर-मेरठ की दूरी 1400 किमी अंकित है। जबकि वास्तविकता यह है कि श्रीनगर से मेरठ की दूरी 300 किलोमीटर है। यानि कि आने जाने में करीब 600 किमी का सफर तय करना पड़ता है।
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बिल की पड़ताल के लिए जब अमर उजाला ने उक्त एजेंसी से ग्राहक बन कर बात की तो एजेंसी ने छोटे वाहन का प्रति किमी 10 रुपये के हिसाब से भाड़ा बताया। जिस हिसाब से मेरठ से श्रीनगर आने जाने का भाड़ा 6 हजार बन रहा था। वहीं, ट्रंासपोर्ट एजेंसी ने चालक का प्रतिदिन (भोजन सहित) 400 व वाहन का 200 रुपये अतिरिक्त चार्ज बताया। जो 7 दिनों का 4200 रुपये हो रहा है। इन सब को जोड़ा जाय तो यह बिल करीब 10 हजार 200 हो रहा है। लेकिन विवि ने ट्रांसपोर्ट एजेंसी को 26 हजार 670 का भुगतान कर दिया। विवि के कर्मचारी संतोष मंमगाई ने कहा कि यह घटना कोई पहली बार नहीं हो रही है। यहां अक्सर ऐसे मामले होते हैं। उनका कहना है कि ऐसा संभव नहीं है कि इसमें अधिकारियों की संलिप्तता न हो। उन्होंने इस मामले की जांच की मांग की है। वहीं, वित्त अधिकारी प्रो. एनएस पंवार ने कहा कि बिल का भुगतान मानकों के तहत किया गया होगा।
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राजीव

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