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शास्त्रीय गायन को उतराखंड में स्थापित करने में जुटे आशीष

Wed, 25 Jul 2018 02:16 AM IST
Updated Wed, 25 Jul 2018 02:16 AM IST
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शास्त्रीय गायन को उतराखंड में स्थापित करने में जुटे आशीष
ब्यूरो/अमर उजाला, श्यामपुर।
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तीर्थनगरी का युवा आशीष कुकरेती शास्त्रीय गायन को उत्तराखंड में स्थापित करने में जुटे हैं। मूलरूप से पौड़ी जिले की तहसील लैंसडौंन के कठुरबडा गांव निवासी 35 वर्षीय युवा शास्त्रीय गायक आशीष वर्तमान में एम्स के समीप बैराज में रह रहे हैं। पॉलीटेक्निक करने के बाद वह दिल्ली महानगर में अच्छी नौकरी पर थे, मगर उनका रुझान संगीत की ओर लगाव था। लिहाजा उन्होंने 2013 में नौकरी छोड़ दी और शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेने के लिए 2014 में बनारस चले गए। यहां उन्होंने पंडित अनूप मिश्रा से घरानेदार गायकी की तालीम ली।
उनकी शास्त्रीय गायन की तालीम अभी भी जारी है। आशीष कुकरेती का कहना है कि संगीत की तालीम कभी पूरी नहीं हो सकती। यह महासागर है। उनका कहना है कि देश में शास्त्रीय संगीत के श्रोताओं की संख्या बढ़ रही है, मगर उत्तराखंड में शास्त्रीय संगीत के श्रोताओं की संख्या बेहद कमी है। उन्होंने इस बाबत वातावरण बनाने की जरूरत बताई।
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उन्होंने बताया कि अभी इसके लिए उत्तराखंड में काफी कुछ करने की जरूरत है। आशीष अब तक दिल्ली, नेपाल, फ्रांस आदि में अपने शास्त्रीय कार्यक्रम प्रस्तुत कर चुके हैं। वह ऋषिकेश में ही रहकर नार्थ इंडियन क्लासिकल म्यूजिक के लिए कुछ करना चाहते हैं, जिससे उत्तराखंड राज्य में भी यह स्थापित हो सके। उन्होंने इसके लिए एक श्रुति सरिता नामक संस्था बनाई है, जिसके तहत वह शास्त्रीय कार्यक्रम व कार्यशालाएं आयोजित करते हैं। उन्होंने बताया कि बनारस में संकट मोचन फेस्टिवल होता है, जहां शास्त्रीय गायन का लुत्फ उठाने देश- विदेश से श्रोता जुटते हैं।
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विदेशियों में शास्त्रीय संगीत सीखने का जनून
उनका कहना है कि विदेशियों में शास्त्रीय गायन को सीखने का जुनून है। बकौल आशीष कई विदेशी केवल गायन सीखने के लिए ही उनके पास आते हैं। बताया कि ख्याल एक फारसी शब्द है, ख्याल का अर्थ है कल्पना, विचार व संरचना। बताया जब कोई गायक अपनी कल्पना को कुछ नियमों का पालन करते हुए तान के साथ प्रस्तुत करने की शैली ही खयाल है। बताया कि ख्याल गायकी में स्वर सौंदर्य को बहुत अधिक महत्व दिया जाता है । इसमें श्रृंगार रस की भी प्रधानता रहती है।
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