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हाईकोर्ट के आदेश का आठ माह बाद हुआ अनुपालन
Updated Sat, 21 Jul 2018 10:44 PM IST
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श्रीनगर। नैनीताल हाईकोर्ट के आदेश के बाद राजकीय मेडिकल कॉलेज में नियत वेतन पर तैनात दो लैब टेक्नीशियन को पुनरीक्षित वेतन के आधार पर बढ़ा वेतन दे दिया गया है। कर्मचारियों के हक मेें फैसला आने के बाद अन्य अस्थायी कर्मचारी भी कोर्ट जाने की तैयारी में हैं, जिससे उन्हें भी समान कार्य-समान वेतन का लाभ मिल सके।
राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में विभिन्न स्रोतों से लगभग 400 अस्थायी कर्मचारी विभिन्न पदों में कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2017 की शुरुआत मेें संशोधित विनियमितीकरण शासनादेश 2013 के अनुसार 15 अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी कर दिया गया। जबकि अन्य विभिन्न वजहों से छूट गए। इनमें से दो लैब टेक्नीशियन उमेश भट्ट व देवेंद्र लखेड़ा ने हाईकोर्ट में शासनादेश के अनुसार विनियमित किया जाने और विनियमितीकरण नहीं होने तक न्यूनतम वेतन (समान कार्य-समान वेतन) दिया जाए को लेकर याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 29 नवंबर 2017 को याचिकाकर्ताओं को न्यूनतम वेतनमान देने के आदेश दिए, लेकिन लंबे समय तक शासन ने इस पर कार्रवाई नहीं की। इस वजह से याचिकाकर्ता पुन: कोर्ट चले गए। न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए चिकित्सा शिक्षा सचिव को तत्काल कार्रवाई करने के आदेश दिए। इसके बाद इसी जुलाई माह में शासन ने चिकित्सा शिक्षा निदेशक को पत्र भेजकर दोनों याचिकाकर्ताओं को न्यूनतम वेतन देने के लिए कार्रवाई करने को कहा। पहले दोनों कर्मचारियों को 17 हजार 600 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। आदेश के बाद 29 हजार 200 रुपये के अनुसार वेतन दे दिया गया है। वित्त नियंत्रक मेडिकल कॉलेज श्रीनगर विवेक स्वरूप ने कहा कि दोनों कर्मचारियों को आदेश के अनुसार न्यूनतम वेतनमान दे दिया गया है। अप्रैल माह से उक्त कर्मचारियों की तैनाती का नवीनीकरण नहीं हुआ है।
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राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में विभिन्न स्रोतों से लगभग 400 अस्थायी कर्मचारी विभिन्न पदों में कार्य कर रहे हैं। वर्ष 2017 की शुरुआत मेें संशोधित विनियमितीकरण शासनादेश 2013 के अनुसार 15 अस्थायी कर्मचारियों को स्थायी कर दिया गया। जबकि अन्य विभिन्न वजहों से छूट गए। इनमें से दो लैब टेक्नीशियन उमेश भट्ट व देवेंद्र लखेड़ा ने हाईकोर्ट में शासनादेश के अनुसार विनियमित किया जाने और विनियमितीकरण नहीं होने तक न्यूनतम वेतन (समान कार्य-समान वेतन) दिया जाए को लेकर याचिका दायर की। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने 29 नवंबर 2017 को याचिकाकर्ताओं को न्यूनतम वेतनमान देने के आदेश दिए, लेकिन लंबे समय तक शासन ने इस पर कार्रवाई नहीं की। इस वजह से याचिकाकर्ता पुन: कोर्ट चले गए। न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए चिकित्सा शिक्षा सचिव को तत्काल कार्रवाई करने के आदेश दिए। इसके बाद इसी जुलाई माह में शासन ने चिकित्सा शिक्षा निदेशक को पत्र भेजकर दोनों याचिकाकर्ताओं को न्यूनतम वेतन देने के लिए कार्रवाई करने को कहा। पहले दोनों कर्मचारियों को 17 हजार 600 रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता था। आदेश के बाद 29 हजार 200 रुपये के अनुसार वेतन दे दिया गया है। वित्त नियंत्रक मेडिकल कॉलेज श्रीनगर विवेक स्वरूप ने कहा कि दोनों कर्मचारियों को आदेश के अनुसार न्यूनतम वेतनमान दे दिया गया है। अप्रैल माह से उक्त कर्मचारियों की तैनाती का नवीनीकरण नहीं हुआ है।
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