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व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ पर्यावरण को भी रखे स्वच्छ
Updated Thu, 19 Jul 2018 01:56 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, डोईवाला।
हिमालयन इंस्टीट्यूट हास्पिटल ट्रस्ट के वॉटर एंड सैनिटेशन विभाग और रिसोर्स सेंटर की ओर से तीन दिन दिवसीय खुले में शौच मुक्ति स्थायित्व और ठोस तरल कूड़ा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार से शुरू हो गया है। बागेश्वर के 32 ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकत्री और स्वेच्छाग्राही प्रतिभाग कर रहे हैं। इंस्टीट्यूट के आरडीआई सभागार में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ ओएसडी वाइस चांसलर साधना मिश्रा ने प्रतिभागियों के साथ संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। उन्होंनेे कहा कि हम व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ पर्यावरण को भी स्वच्छ रखने में योगदान दें।
स्वजल परियोजना उत्तराखंड सरकार के वीरेंद्र भट्ट ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण में सीखे गए व्यवहारिक अनुभव को अन्य लोगों तक पहुंचाने की बात कही। मुख्य प्रशिक्षक नितिश कौशिक ने प्रतिभागियों को गांवों में निर्मित शौचालयों का निरंतर प्रयोग करने, व्यक्ति को खुले में शौच जाने के लिए हतोत्साहित करना, ठोस और तरल कूड़े करकट का सुरक्षित प्रबंधन और अन्य लोगों को इसके लिए कैसे प्रेरित करने संबंधी जानकारियां दी। ट्रेनर अश्वनी कुमार सक्सेना और मदनमोहन डोभाल ने गांव की नालियों की निरंतर सफाई, कूड़े गड्ढे कंपोस्ट और सोकपिट निर्माण के बारे में जरूरी जानकारियों से अवगत कराया। इस दौरान राजकुमार वर्मा, नरेश थपलियाल, नीलम पांडे, गिरवीर नेगी आदि थे।
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हिमालयन इंस्टीट्यूट हास्पिटल ट्रस्ट के वॉटर एंड सैनिटेशन विभाग और रिसोर्स सेंटर की ओर से तीन दिन दिवसीय खुले में शौच मुक्ति स्थायित्व और ठोस तरल कूड़ा प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम बुधवार से शुरू हो गया है। बागेश्वर के 32 ग्राम पंचायतों के प्रतिनिधियों, आंगनबाड़ी कार्यकत्री और स्वेच्छाग्राही प्रतिभाग कर रहे हैं। इंस्टीट्यूट के आरडीआई सभागार में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ ओएसडी वाइस चांसलर साधना मिश्रा ने प्रतिभागियों के साथ संयुक्त रूप से दीप जलाकर किया। उन्होंनेे कहा कि हम व्यक्तिगत स्वच्छता के साथ-साथ पर्यावरण को भी स्वच्छ रखने में योगदान दें।
स्वजल परियोजना उत्तराखंड सरकार के वीरेंद्र भट्ट ने प्रतिभागियों को प्रशिक्षण में सीखे गए व्यवहारिक अनुभव को अन्य लोगों तक पहुंचाने की बात कही। मुख्य प्रशिक्षक नितिश कौशिक ने प्रतिभागियों को गांवों में निर्मित शौचालयों का निरंतर प्रयोग करने, व्यक्ति को खुले में शौच जाने के लिए हतोत्साहित करना, ठोस और तरल कूड़े करकट का सुरक्षित प्रबंधन और अन्य लोगों को इसके लिए कैसे प्रेरित करने संबंधी जानकारियां दी। ट्रेनर अश्वनी कुमार सक्सेना और मदनमोहन डोभाल ने गांव की नालियों की निरंतर सफाई, कूड़े गड्ढे कंपोस्ट और सोकपिट निर्माण के बारे में जरूरी जानकारियों से अवगत कराया। इस दौरान राजकुमार वर्मा, नरेश थपलियाल, नीलम पांडे, गिरवीर नेगी आदि थे।
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