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एम्स में हुआ सीवीसी व कैथीटेराइजेशन कार्यशाला का आयोजन
Updated Sun, 08 Jul 2018 02:00 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
एम्स ऋषिकेश में फैकल्टी रेजिडेंट चिकित्सकों व नर्स के लिए पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की ओर से शनिवार को सेेमीनार का आयोजन किया गया। जिसमें बच्चों व नवजात शिशुओं में सीवीसी सेंट्रल वेनस एक्सेस और कैथीटेराइजेशन विषय पर चर्चा की गई।
एम्स के निदेशक प्रोफेसर डॉ. रवि कांत ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस मौके पर डॉ. रवि कांत ने कहा कि मेडिकल और नर्सिंग की पढ़ाई का एक अहम मॉड्यूल होना चाहिए। मेडिकल पेशे में अक्सर सीवीसी व कैैथीटेराइजेशन तकनीक की आवश्यकता होती है। उत्तराखंड जैसे राज्य में नवजात शिशु मृत्यु दर अधिक है। ऐसे में यहां नवजात शिशुओं और बच्चों से जुड़े इमरजेंसी मामलों में यह तकनीक वरदान है। एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मुकेश त्रिपाठी ने बताया कि बच्चों में मल्टीपल पंक्चर के बजाय सीवीसी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बेहद सावधानी बरतनी पड़ती है। सीवीसी का इस्तेमाल अन्य मरीजों में भी होता है, जिनमें मुंह के रास्ते भोजन न दिया जा सके या शरीर में बार-बार पंक्चर की जरूरत पड़ती हो। कार्यशाला में पीजीआई चंडीगढ़ के प्रोफेसर रविप्रकाश कन्नौजिया, मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के डॉ. अब्दुल राशिद, राजीव गांधी कैंसर अस्पताल के डॉ. संदीप गुप्ता आदि ने भी विचार रखे।
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एम्स ऋषिकेश में फैकल्टी रेजिडेंट चिकित्सकों व नर्स के लिए पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग की ओर से शनिवार को सेेमीनार का आयोजन किया गया। जिसमें बच्चों व नवजात शिशुओं में सीवीसी सेंट्रल वेनस एक्सेस और कैथीटेराइजेशन विषय पर चर्चा की गई।
एम्स के निदेशक प्रोफेसर डॉ. रवि कांत ने कार्यशाला का शुभारंभ किया। इस मौके पर डॉ. रवि कांत ने कहा कि मेडिकल और नर्सिंग की पढ़ाई का एक अहम मॉड्यूल होना चाहिए। मेडिकल पेशे में अक्सर सीवीसी व कैैथीटेराइजेशन तकनीक की आवश्यकता होती है। उत्तराखंड जैसे राज्य में नवजात शिशु मृत्यु दर अधिक है। ऐसे में यहां नवजात शिशुओं और बच्चों से जुड़े इमरजेंसी मामलों में यह तकनीक वरदान है। एम्स के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मुकेश त्रिपाठी ने बताया कि बच्चों में मल्टीपल पंक्चर के बजाय सीवीसी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए बेहद सावधानी बरतनी पड़ती है। सीवीसी का इस्तेमाल अन्य मरीजों में भी होता है, जिनमें मुंह के रास्ते भोजन न दिया जा सके या शरीर में बार-बार पंक्चर की जरूरत पड़ती हो। कार्यशाला में पीजीआई चंडीगढ़ के प्रोफेसर रविप्रकाश कन्नौजिया, मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के डॉ. अब्दुल राशिद, राजीव गांधी कैंसर अस्पताल के डॉ. संदीप गुप्ता आदि ने भी विचार रखे।
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