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बदरीनाथ में अलकनंदा में गंदगी डालने पर होटल होंगे सीज
Updated Thu, 05 Jul 2018 10:32 PM IST
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गोपेश्वर। बदरीनाथ धाम समेत कस्बों और नगरों में अलकनंदा व सहायक नदियों में गंदगी डालने पर होटल व ढाबों को चिह्नित कर सील करने के निर्देश दिए गए। जिला सभागार में आयोजित जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक में डीएम आशीष जोशी ने कहा कि गंगा नदी से प्रदूषण को समाप्त करने और नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए नमामि गंगे के तहत जिले में गंगा संरक्षण के लिए कार्य शुरू हो गए हैं। उन्होंने गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई जल निगम, सिंचाई, नगर पालिका और स्वजल विभाग को आपसी समन्वय बनाकर गंगा संरक्षण के लिए कार्य करने के निर्देश दिए।
डीएम ने कहा कि बदरीनाथ में होटल व्यवसायियों को एक माह पूर्व नदी में सीवर डालने पर नोटिस दिया गया था, लेकिन अभी भी स्थिति नहीं सुधरी है। अब होटलों को सील करने की कार्रवाई की जाएगी। नदी किनारे बसे ग्राम पंचायतों में गंगा संरक्षण कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए। एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) के कार्यों की समीक्षा करते हुए डीएम ने कहा कि प्रोजेक्ट निर्माण का कार्य शुरू करने से पूर्व सभी समस्याओं का समाधान किया जाए।
डीएम ने इस दौरान जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण और पानी की गुणवत्ता की निगरानी के तहत किए जाने वाले कार्यों की समीक्षा भी की गई। जल निगम के अधिकारियों ने बताया कि नमामि गंगे मिशन के तहत गोपेश्वर में एसटीपी की स्थापना के लिए 61.68 करोड़, नंदप्रयाग में 6.46 करोड़, कर्णप्रयाग में 12.9 करोड़, बदरीनाथ में 18.24 करोड़ और जोशीमठ में 48.43 करोड़ की लागत से प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। इनका प्रथम चरण का कार्य शुरू हो चुका है।
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इंसेट
सिंचाई विभाग के ईई को बैठक से किया बाहर
गोपेश्वर। डीएम आशीष जोशी ने सिंचाई विभाग के ईई बीएस यादव से नमामि गंगे परियोजना के तहत संचालित कार्यों की जानकारी ली तो वे बगलें झांकने लगे। इस पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए उन्हें बैठक से बाहर कर दिया। साथ ही उन्हें परियोजना के तहत सिंचाई विभाग की ओर से किए जा रहे कार्यों की प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
एसडीएम ने किया निर्माण कार्यों का निरीक्षण
कर्णप्रयाग। नमामि गंगे के तहत हो रहे सीवर ट्रीटमेंट और गंगा घाटों का एसडीएम जीआर बिनवाल ने निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि बरसात में होने वाले कामों की जिम्मेदारी विभाग की होगी।
एसडीएम बिनवाल ने कहा कि निर्माणदायी पेयजल निगम और सिंचाई विभाग की ओर से काम बरसात के दौरान शुरू किया गया। ऐसे में अलकनंदा और पिंडर नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। यदि निर्माण कार्य में किसी तरह की दिक्कतें आती है तो विभाग इसका जिम्मेदार स्वयं रहेगा। एसडीएम ने अधिकारियों को समय के साथ-साथ गुणवत्तापरक काम करने के निर्देश दिए। नगर में गंदे नालों की टेपिंग के लिए 12 करोड़ की लागत से सीवर ट्रीटमेंट योजना और नमामि गंगे के तहत करीब सात करोड़ की लागत से गंगा घाटों का निर्माण किया जा रहा है। इस पर बढ़े हुए जलस्तर में भी काम करने की शिकायत लोगों ने तहसील प्रशासन से की थी।
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डीएम ने कहा कि बदरीनाथ में होटल व्यवसायियों को एक माह पूर्व नदी में सीवर डालने पर नोटिस दिया गया था, लेकिन अभी भी स्थिति नहीं सुधरी है। अब होटलों को सील करने की कार्रवाई की जाएगी। नदी किनारे बसे ग्राम पंचायतों में गंगा संरक्षण कार्यक्रमों का प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए। एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट) के कार्यों की समीक्षा करते हुए डीएम ने कहा कि प्रोजेक्ट निर्माण का कार्य शुरू करने से पूर्व सभी समस्याओं का समाधान किया जाए।
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डीएम ने इस दौरान जैव विविधता संरक्षण, वनीकरण और पानी की गुणवत्ता की निगरानी के तहत किए जाने वाले कार्यों की समीक्षा भी की गई। जल निगम के अधिकारियों ने बताया कि नमामि गंगे मिशन के तहत गोपेश्वर में एसटीपी की स्थापना के लिए 61.68 करोड़, नंदप्रयाग में 6.46 करोड़, कर्णप्रयाग में 12.9 करोड़, बदरीनाथ में 18.24 करोड़ और जोशीमठ में 48.43 करोड़ की लागत से प्रोजेक्ट प्रस्तावित हैं। इनका प्रथम चरण का कार्य शुरू हो चुका है।
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सिंचाई विभाग के ईई को बैठक से किया बाहर
गोपेश्वर। डीएम आशीष जोशी ने सिंचाई विभाग के ईई बीएस यादव से नमामि गंगे परियोजना के तहत संचालित कार्यों की जानकारी ली तो वे बगलें झांकने लगे। इस पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए उन्हें बैठक से बाहर कर दिया। साथ ही उन्हें परियोजना के तहत सिंचाई विभाग की ओर से किए जा रहे कार्यों की प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
एसडीएम ने किया निर्माण कार्यों का निरीक्षण
कर्णप्रयाग। नमामि गंगे के तहत हो रहे सीवर ट्रीटमेंट और गंगा घाटों का एसडीएम जीआर बिनवाल ने निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि बरसात में होने वाले कामों की जिम्मेदारी विभाग की होगी।
एसडीएम बिनवाल ने कहा कि निर्माणदायी पेयजल निगम और सिंचाई विभाग की ओर से काम बरसात के दौरान शुरू किया गया। ऐसे में अलकनंदा और पिंडर नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है। यदि निर्माण कार्य में किसी तरह की दिक्कतें आती है तो विभाग इसका जिम्मेदार स्वयं रहेगा। एसडीएम ने अधिकारियों को समय के साथ-साथ गुणवत्तापरक काम करने के निर्देश दिए। नगर में गंदे नालों की टेपिंग के लिए 12 करोड़ की लागत से सीवर ट्रीटमेंट योजना और नमामि गंगे के तहत करीब सात करोड़ की लागत से गंगा घाटों का निर्माण किया जा रहा है। इस पर बढ़े हुए जलस्तर में भी काम करने की शिकायत लोगों ने तहसील प्रशासन से की थी।