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पुलिसकर्मी नदारद, ट्रैफिक व्यवस्था बदहाल
Updated Mon, 02 Jul 2018 02:12 AM IST
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लिस की लापरवाही से शहर में रोज लग रहा जाम, हाईवे के किनारे बनी फुटपाथ पर अतिक्रमण, सड़क को बना दिया पार्किंग
ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
शहर की ट्रैफिक व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। पुलिस की लापरवाही से शहर के बीच होकर गुजर रहे हाईवे के किनारे बनी फुटपाथ पर दुकानदारों ने कब्जा किया हुआ और सड़क पर पार्किंग बना दी गई है। इस वजह से रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके जिम्मेदार पुलिस-प्रशासन के अधिकारी आरामतलबी हो गए हैं। रविवार को भी दिनभर रोड पर जाम की स्थिति रही लेकिन कोई पुलिसकर्मी यातायात सुचारु करने नहीं आया। इससे लोगों में रोष बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो अब स्कूल खुलने पर सुबह और दोपहर में हालात और खराब हो सकते हैं।
शहर की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा रही है। लोग रोजाना जाम में फंस रहे हैं। जाम लगने के दौरान भी चौक-चौराहों पर कोई पुलिसकर्मी नहीं दिखता है। हालत ये है कि जैसे यहां कोई व्यवस्था ही नहीं है। वाहन चालक मनमर्जी से आड़े-तिरछे वाहन खड़े कर देते हैं। रविवार को भी मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति रहीं। लोग परेशान होते रहे। गीता भवन, पहाड़ी गली, सिनेमा गली, हास्पिटल रोड, अमर स्वीट्स शॉप, डाक पत्थर चौराह में एक भी पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था।
शहर से पर्यटक क्षेत्र त्यूनी, चकराता की तरफ भारी संख्या में लोग निकलते हैं। ऐसे में उन्हें जाम का सामना करना पड़ता है। वहीं हनोल स्थित महासू देवता मंदिर होने के चलते बड़ी तादाद में लोग मंदिर जाते हैं। पुलिस की लापरवाही से उनको शहर में जाम से जूझना पड़ता है।
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यहां भी दून जैसी कार्रवाई की जरूरत
लोगों का कहना है कि विकासनगर में भी देहरादून जैसी कार्रवाई की जरूरत है। तभी यहां जाम से निजात मिल सकती है। यदि यही हालात रहे तो शहरवासी भी हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करेंगे ताकि जाम और अवैध कब्जों से निजात मिल सके। उल्लेखनीय है कि एक जनहित याचिका पर राजधानी में हाईकोर्ट के आदेश पर चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान सख्ती से चलाया जा रहा है। शहर भर में किए गए अतिक्रमण को हटाया जा रहा है। साथ ही अवैध कब्जे वाले कांप्लेक्स और भवनों को सील किया जा रहा है।
टैक्सी और थ्री व्हीलर लगाते अधिक जाम
टैक्सी स्टेंड होने के बावजूद टैक्सी और थ्री व्हीलर चालक सड़क किनारे वाहन खड़ा करके सवारियां भरते हैं, जिसके कारण शहर में जाम लग रहा है। शहर के हर चौराहे पर टैक्सी चालक सवारियां भरती देखी जा सकती हैं। यही हाल थ्री व्हीलर चालकों का भी है। वाहन चालकों द्वारा सवारियां भरने के चलते पीछे से आने वाले वाहनों का रास्ता नहीं मिल पाता, ऐसे में लंबा जाम लग जाता है।
गंगोत्री और यमुनोत्री जाने का है मार्ग
चारधाम में से दो धामों गंगोत्री और यमुनोत्री के लिए भी शहर से ही मार्ग है। विकासनगर से अंबाड़ी, जीवनगढ़, कालसी और हथियारी होते हुए तीर्थयात्री दोनों धामों को जाते हैं, लेकिन शहर से गुजरने में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यह समस्या वीकेंड के दिनों में और भी बढ़ जाती है।
विभागों में समन्वय की कमी
ट्रैफिक कंट्रोल करने और सड़कों पर वाहन पार्क कर सवारियां बिठाने को लेकर कार्रवाई पुलिस और आरटीओ की है, लेकिन दोनों विभागों में समन्वय न होने के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इस बारे में एसपी सरिता डोभाल का कहना है कि समय-समय पर आरटीओ विभाग से बात की जाती है, वाहन चालकों पर कार्रवाई आरटीओ ने करनी है इसलिए दोबारा इस बारे में उनसे बातचीत की जाएगी।
कोट
एक दूसरे पर जिम्मा डालने से कुछ नहीं होने वाला। आरटीओ विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन लोग समझने को तैयार नहीं हैं। ऊपर लेवल से यदि पूरी कार्रवाई करने के लिए छूट मिले तो तभी कुछ हो सकता है।
- सुनील शर्मा, आरटीओ, विकासनगर।
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ब्यूरो/अमर उजाला/विकासनगर।
शहर की ट्रैफिक व्यवस्था राम भरोसे चल रही है। पुलिस की लापरवाही से शहर के बीच होकर गुजर रहे हाईवे के किनारे बनी फुटपाथ पर दुकानदारों ने कब्जा किया हुआ और सड़क पर पार्किंग बना दी गई है। इस वजह से रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है। इसके जिम्मेदार पुलिस-प्रशासन के अधिकारी आरामतलबी हो गए हैं। रविवार को भी दिनभर रोड पर जाम की स्थिति रही लेकिन कोई पुलिसकर्मी यातायात सुचारु करने नहीं आया। इससे लोगों में रोष बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि यदि यही हाल रहा तो अब स्कूल खुलने पर सुबह और दोपहर में हालात और खराब हो सकते हैं।
शहर की ट्रैफिक व्यवस्था चरमरा रही है। लोग रोजाना जाम में फंस रहे हैं। जाम लगने के दौरान भी चौक-चौराहों पर कोई पुलिसकर्मी नहीं दिखता है। हालत ये है कि जैसे यहां कोई व्यवस्था ही नहीं है। वाहन चालक मनमर्जी से आड़े-तिरछे वाहन खड़े कर देते हैं। रविवार को भी मुख्य मार्ग पर जाम की स्थिति रहीं। लोग परेशान होते रहे। गीता भवन, पहाड़ी गली, सिनेमा गली, हास्पिटल रोड, अमर स्वीट्स शॉप, डाक पत्थर चौराह में एक भी पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था।
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शहर से पर्यटक क्षेत्र त्यूनी, चकराता की तरफ भारी संख्या में लोग निकलते हैं। ऐसे में उन्हें जाम का सामना करना पड़ता है। वहीं हनोल स्थित महासू देवता मंदिर होने के चलते बड़ी तादाद में लोग मंदिर जाते हैं। पुलिस की लापरवाही से उनको शहर में जाम से जूझना पड़ता है।
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यहां भी दून जैसी कार्रवाई की जरूरत
लोगों का कहना है कि विकासनगर में भी देहरादून जैसी कार्रवाई की जरूरत है। तभी यहां जाम से निजात मिल सकती है। यदि यही हालात रहे तो शहरवासी भी हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करेंगे ताकि जाम और अवैध कब्जों से निजात मिल सके। उल्लेखनीय है कि एक जनहित याचिका पर राजधानी में हाईकोर्ट के आदेश पर चलाए जा रहे अतिक्रमण हटाओ अभियान सख्ती से चलाया जा रहा है। शहर भर में किए गए अतिक्रमण को हटाया जा रहा है। साथ ही अवैध कब्जे वाले कांप्लेक्स और भवनों को सील किया जा रहा है।
टैक्सी और थ्री व्हीलर लगाते अधिक जाम
टैक्सी स्टेंड होने के बावजूद टैक्सी और थ्री व्हीलर चालक सड़क किनारे वाहन खड़ा करके सवारियां भरते हैं, जिसके कारण शहर में जाम लग रहा है। शहर के हर चौराहे पर टैक्सी चालक सवारियां भरती देखी जा सकती हैं। यही हाल थ्री व्हीलर चालकों का भी है। वाहन चालकों द्वारा सवारियां भरने के चलते पीछे से आने वाले वाहनों का रास्ता नहीं मिल पाता, ऐसे में लंबा जाम लग जाता है।
गंगोत्री और यमुनोत्री जाने का है मार्ग
चारधाम में से दो धामों गंगोत्री और यमुनोत्री के लिए भी शहर से ही मार्ग है। विकासनगर से अंबाड़ी, जीवनगढ़, कालसी और हथियारी होते हुए तीर्थयात्री दोनों धामों को जाते हैं, लेकिन शहर से गुजरने में उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। यह समस्या वीकेंड के दिनों में और भी बढ़ जाती है।
विभागों में समन्वय की कमी
ट्रैफिक कंट्रोल करने और सड़कों पर वाहन पार्क कर सवारियां बिठाने को लेकर कार्रवाई पुलिस और आरटीओ की है, लेकिन दोनों विभागों में समन्वय न होने के कारण कार्रवाई नहीं हो पा रही है। इस बारे में एसपी सरिता डोभाल का कहना है कि समय-समय पर आरटीओ विभाग से बात की जाती है, वाहन चालकों पर कार्रवाई आरटीओ ने करनी है इसलिए दोबारा इस बारे में उनसे बातचीत की जाएगी।
कोट
एक दूसरे पर जिम्मा डालने से कुछ नहीं होने वाला। आरटीओ विभाग की ओर से समय-समय पर कार्रवाई की जाती है, लेकिन लोग समझने को तैयार नहीं हैं। ऊपर लेवल से यदि पूरी कार्रवाई करने के लिए छूट मिले तो तभी कुछ हो सकता है।
- सुनील शर्मा, आरटीओ, विकासनगर।