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बांड तोडने पर एक और डाक्टर ने कराए 24 लाख जमा
Updated Tue, 26 Jun 2018 11:00 PM IST
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श्रीनगर। राजकीय मेडिकल कालेज श्रीनगर से पास आउट एक और एमबीबीएस डाक्टर ने सरकारी सेवा अनिवार्यता अनुबंध तोड़ने पर 24 लाख की धनराशि कालेज के खाते में जमा कराई है। पूर्व में भी एक डाक्टर बांड तोड़ने पर 30 लाख रुपये कालेज में जमा करा चुका है। उक्त दोनों डाक्टरों ने सरकारी क्षेत्र में कार्य न करने की इच्छा जताई है।
उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कालेजों में रियायती दर पर मेडिकल की पढ़ाई करने के एवज में छात्रों को संस्थान से अनुबंध करना पड़ता है। अनुबंध के तहत छात्रों को पांच साल तक प्रदेश के दुर्गम स्थानों में स्थित अस्पतालों में सेवाएं देनी होती है, जबकि बांड तोड़ने पर साढे़ चार साल का शुल्क ब्याज सहित भरना पड़ता है। वर्तमान समय में ऐसे कई डाक्टर हैं, जिन्होंने राजकीय मेडिकल कालेज से पासआउट होने के बाद सरकारी सेवा ज्वाइन नहीं की है। कालेज प्रबंधन ने ऐसे डाक्टरों को नोटिस जारी किए हैं।
प्राचार्य डा. सीएमएस रावत ने बताया कि वर्ष 2008 बैच के डा. सागर भटनागर निवासी बिजनौर (उत्तर प्रदेश) ने मंगलवार को कालेज के खाते में 24 लाख रुपये जमा कराए हैं। डा. भटनागर ने पिछले चार वर्षों से सरकारी सेवा ज्वाइन नहीं की है। पूर्व में वर्ष 2010 बैच के डा. इंद्रेश विक्रम ने अनुबंध तोड़ने के एवज में मेडिकल कालेज के खाते में 30 लाख रुपये जमा कराए थे। प्राचार्य डा. रावत ने बताया कि अब तक कालेज के खाते में 54 लाख रुपये जमा कराए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि दो अन्य डाक्टरों को भी बांड तोड़ने के आरोप में नोटिस भेजा गया है। यदि उक्त डाक्टर धनराशि जमा नहीं कराते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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उत्तराखंड के सरकारी मेडिकल कालेजों में रियायती दर पर मेडिकल की पढ़ाई करने के एवज में छात्रों को संस्थान से अनुबंध करना पड़ता है। अनुबंध के तहत छात्रों को पांच साल तक प्रदेश के दुर्गम स्थानों में स्थित अस्पतालों में सेवाएं देनी होती है, जबकि बांड तोड़ने पर साढे़ चार साल का शुल्क ब्याज सहित भरना पड़ता है। वर्तमान समय में ऐसे कई डाक्टर हैं, जिन्होंने राजकीय मेडिकल कालेज से पासआउट होने के बाद सरकारी सेवा ज्वाइन नहीं की है। कालेज प्रबंधन ने ऐसे डाक्टरों को नोटिस जारी किए हैं।
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प्राचार्य डा. सीएमएस रावत ने बताया कि वर्ष 2008 बैच के डा. सागर भटनागर निवासी बिजनौर (उत्तर प्रदेश) ने मंगलवार को कालेज के खाते में 24 लाख रुपये जमा कराए हैं। डा. भटनागर ने पिछले चार वर्षों से सरकारी सेवा ज्वाइन नहीं की है। पूर्व में वर्ष 2010 बैच के डा. इंद्रेश विक्रम ने अनुबंध तोड़ने के एवज में मेडिकल कालेज के खाते में 30 लाख रुपये जमा कराए थे। प्राचार्य डा. रावत ने बताया कि अब तक कालेज के खाते में 54 लाख रुपये जमा कराए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि दो अन्य डाक्टरों को भी बांड तोड़ने के आरोप में नोटिस भेजा गया है। यदि उक्त डाक्टर धनराशि जमा नहीं कराते हैं, तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
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