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एनओसी के फेर में लटकी सड़क, ग्रामीण कर रहे पलायन
Updated Mon, 25 Jun 2018 02:08 AM IST
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- आजादी के सात दशक बाद भी जगथान और बुराइला गांव में नहीं सड़क
- गांवों में सड़क ने होने से 34 परिवार कर चुके हैं पलायन
ब्यूरो/अमर उजाला/चकराता।
आजादी के सात दशक बाद भी जगथान और बुराइला गांवों के लिए सड़क किसी सपने से कम नहीं है। बीते डेढ़ साल से ग्रामीणों की सड़क वन विभाग की एनओसी के फेर में उलझी हुई है। ग्रामीणों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए 10 किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ती है। वहीं अब सड़क निर्माण न होने से ग्रामीण धीरे-धीरे पलायन करने को मजबूर हो रहे है। बीते डेढ़ साल में करीब 34 परिवार गांव से पलायन कर चुके हैं। शीघ्र सड़क निर्माण कार्य शुरू करने की मांग पर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
भेजे गए ज्ञापन में लोगों ने बताया कि पांच वर्ष पूर्व तक जगथान और बुराइला गांवों में 120 परिवार निवास करते थे, लेकिन सड़क बनने की आस छोड़ चुके 34 परिवार पलायन कर अन्य जगह बस गए हैं। वर्तमान में इन दोनों गांवों में मात्र 86 परिवार रह गए हैं। उनमें से भी कई परिवार अन्य जगह जाने की तैयारी कर रहे हैं। कहा कि डेढ़ वर्ष पूर्व गांव के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई थी, लेकिन वन विभाग की एनओसी न मिलने से आज तक सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
गांव में सड़क न होने से मरीजों को कंडी-डंडी के सहारे कमर पर लाद 10 किलोमीटर दूर कोटी-मीनस मोटर मार्ग पर लाना पड़ता है। जिसके चलते पिछले 2 साल में 10 मरीजों को समय पर इलाज न मिलने के कारण अपनी जान गवां चुके हैं। सड़क निर्माण न होने से दोनों गांवों का विकास थमा हुआ है। उधर, डीएफओ चकराता दीप चंद आर्य ने बताया कि लोनिवि के प्रस्ताव में कुछ खामियां हैं, जिसे दूर करने के लिए लोनिवि के नोडल अधिकारी को पत्र भेजा गया है। ज्ञापन भेजने वालों में चमन सिंह, जोधवीर माली, सुरेंद्र सिंह, रघुवीर सिंह, राजेंद्र सिंह, यशवीर सिंह, जालम सिंह, ध्यान सिंह, महावीर चौहान आदि शामिल रहे।
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- गांवों में सड़क ने होने से 34 परिवार कर चुके हैं पलायन
ब्यूरो/अमर उजाला/चकराता।
आजादी के सात दशक बाद भी जगथान और बुराइला गांवों के लिए सड़क किसी सपने से कम नहीं है। बीते डेढ़ साल से ग्रामीणों की सड़क वन विभाग की एनओसी के फेर में उलझी हुई है। ग्रामीणों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए 10 किमी की पैदल दूरी नापनी पड़ती है। वहीं अब सड़क निर्माण न होने से ग्रामीण धीरे-धीरे पलायन करने को मजबूर हो रहे है। बीते डेढ़ साल में करीब 34 परिवार गांव से पलायन कर चुके हैं। शीघ्र सड़क निर्माण कार्य शुरू करने की मांग पर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा।
भेजे गए ज्ञापन में लोगों ने बताया कि पांच वर्ष पूर्व तक जगथान और बुराइला गांवों में 120 परिवार निवास करते थे, लेकिन सड़क बनने की आस छोड़ चुके 34 परिवार पलायन कर अन्य जगह बस गए हैं। वर्तमान में इन दोनों गांवों में मात्र 86 परिवार रह गए हैं। उनमें से भी कई परिवार अन्य जगह जाने की तैयारी कर रहे हैं। कहा कि डेढ़ वर्ष पूर्व गांव के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़क निर्माण को स्वीकृति प्रदान की गई थी, लेकिन वन विभाग की एनओसी न मिलने से आज तक सड़क का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
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गांव में सड़क न होने से मरीजों को कंडी-डंडी के सहारे कमर पर लाद 10 किलोमीटर दूर कोटी-मीनस मोटर मार्ग पर लाना पड़ता है। जिसके चलते पिछले 2 साल में 10 मरीजों को समय पर इलाज न मिलने के कारण अपनी जान गवां चुके हैं। सड़क निर्माण न होने से दोनों गांवों का विकास थमा हुआ है। उधर, डीएफओ चकराता दीप चंद आर्य ने बताया कि लोनिवि के प्रस्ताव में कुछ खामियां हैं, जिसे दूर करने के लिए लोनिवि के नोडल अधिकारी को पत्र भेजा गया है। ज्ञापन भेजने वालों में चमन सिंह, जोधवीर माली, सुरेंद्र सिंह, रघुवीर सिंह, राजेंद्र सिंह, यशवीर सिंह, जालम सिंह, ध्यान सिंह, महावीर चौहान आदि शामिल रहे।
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