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कृषि औद्योगिकी मॉडल बनेगा आजीविका का साधन

Mon, 25 Jun 2018 02:04 AM IST
Updated Mon, 25 Jun 2018 02:04 AM IST
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कृषि औद्योगिकी मॉडल बनेगा आजीविका का साधन
ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
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यमकेश्वर ब्लॉक में पांच युवाओं ने कृषि औद्योगिक मॉडल तैयार करने की योजना बनाई है। योजना के तहत किसान ऐसी फसलों को पैदा करेंगे जिसका कृषि के साथ-साथ कंस्ट्रक्शन इंडस्ट्री में भी उपयोग किया जा सके। दिल्ली की आराम की जिंदगी को अलविदा करके पांच युवाओं की टीम ने पौड़ी जिले के यमकेश्वर ब्लॉक स्थित कंडवाल गांव में अपना वर्क स्पेस बनाया है। यहां वह अपने एग्रो इंडस्ट्रियल मॉडल प्रोजेक्ट को अंजाम दे रहे हैं। पौड़ी जिले का यह प्रखंड यूं तो संसाधनों के लिहाज से सबसे पिछड़ा क्षेत्र माना जाता है, मगर खासकर इन प्रवासी युवाओं के इस ठिकाने कंडवाल गांव की बात करें तो यहां तक न तो सड़क संपर्क है और न ही बिजली व पानी की मुकम्मल व्यवस्था।
लक्ष्मणझूला-कांडी नेशनल हाईवे से इन गांव तक पहुंचने के लिए करीब घंटे भर की खड़ी चढ़ाई से होकर गुजरना पड़ता है। मगर तमाम कठिनाइयों के बावजूद युवा टीम के हौंसले बुलंद हैं। मध्यप्रदेश मूल के टीम के सदस्य गौरव दीक्षित ने बताया कि उत्तराखंड में 3.17 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि बंजर पड़ी है, जिसका प्रमुख कारण सिंचाई संसाधनों की कमी, बंदर, सूअर व अन्य जंगली जानवरों का आतंक और गांव से युवाओं का पलायन करना है। बकौल गौरव, हमने उत्तराखंड में पाए जाने वाली कुछ प्रजातियों के पौधों को चिह्नित किया है, जिन्हें जंगली जानवर नष्ट नहीं करते हैं। इन पौधों को कम पानी की आवश्यकता होती है। युवाओं की टीम ऐसे पौधों से भवन निर्माण सामग्री बनाने को लेकर शोध कार्य कर रही है। टीम ने बताया कि उन्होंने कंडवाल गांव को अपने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुना है, जिसके लिए गांव में करीब आधा हेक्टेयर बंजर पड़ी कृषि भूमि को लीज पर लिया गया है।
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ग्रामीणों को मिलेगा आजीविका का साधन
युवाओं ने बताया कि इस मॉडल से गांव के लोगों को कम रख-रखाव वाले पौधों की खेती करने का अवसर मिलेगा, जिससे उनको आजीविका चलाने का काम मिल सकेगा और गांव में रोजगार मिलने से पलायन कम हो सकेगा। ऐसी सस्टेनेबल भवन निर्माण सामग्री से शहरों में हो रहे निर्माण संबंधी प्रदूषण पर भी लगाम कसेगी। युवा टीम की सदस्य नम्रता कंडवाल का मानना है कि देश को रोटी और कपड़ा किसान देता है। उनका उद्देश्य है कि मकान भी किसान देने लगे, जिससे किसानों की आय दोगुनी करने की प्रधानमंत्री की पहल में हम भी योगदान कर सकें।
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मॉडल प्रोजेक्ट को राज्यपाल ने भी सराहा
गांवों में स्वरोजगार के संसाधन उपलब्ध कराने व पलायन रोकने के मकसद से तैयार किए जा रहे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट को टीम उत्तराखंड के राज्यपाल कृष्णकांत पॉल के समक्ष भी प्रस्तुत कर चुकी है। उन्होंने बताया कि पॉल ने प्रोजेक्ट को काफी सराहा और मार्गदर्शन के तौर पर कुछ सुझाव भी दिए। टीम के सदस्यों ने बताया कि वह क्षेत्रीय विधायक ऋतु खंडूड़ी से भी प्रोजेक्ट पर चर्चा कर चुकी है। जिस पर उन्होंने हरसंभव सहयोग का भरोसा टीम को दिया है।
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