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महिलाओं ने नहर का निर्माण कर खेतों तक पहुंचाया पानी
Updated Sun, 24 Jun 2018 10:36 PM IST
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गोपेश्वर। विभाग और जिला प्रशासन की अनदेखी झेल रहे सांकरी गांव के ग्रामीणों ने स्वयं के प्रयास से क्षतिग्रस्त सिंचाई नहर का निर्माण कर खेतों तक पानी पहुंचा दिया। विभागीय अधिकारियों ने बजट की कमी का हवाला देकर नहर कि मरम्मत करने में असमर्थता जताई तो ग्रामीणों ने स्वयं ही कुदाल, फावड़ा उठाकर नहर की मरम्मत कर दी। एकजुट होकर किए गए इस प्रयास से जहां गांव के खेतों तक पानी पहुंच पाया वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन को भी आइना दिखा दिया।
वर्ष 2010 में आपदा के दौरान पोखरी ब्लॉक के सांकरी गांव की सिंचाई नहर शुरुआत में ही करीब छह सौ मीटर तक क्षतिग्रस्त हो गई थी। ग्रामीणों ने इसकी सूचना जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दी, लेकिन नहर की मरम्मत नहीं हो पाई। ग्रामीण अभी तक धान की रोपाई के दौरान रबड़ के पाइप से खेतों तक पानी पहुंचाते थे, लेकिन वर्ष 2017 को जुलाई माह में अतिवृष्टि से गांव के गदेरे में नहर साइड भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया, जिससे पाइप से भी खेतों तक पानी नहीं पहुंचाया जा सका। इसके बाद गांव की ग्रामीणों ने बैठककर स्वयं नहर की मरम्मत करने का फैसला लिया। गत 21 जून को अपने-अपने घर से कुदाल और फावड़े लेकर नहर का काम शुरू किया। शनिवार शाम तक नहर का काम पूरा कर खेतों तक पानी पहुंचा दिया गया। स्थानीय निवासी मुन्नी देवी, कविता देवी, नंदी देवी और बबीता देवी ने बताया कि गांव में 150 परिवार निवास करते हैं, जिनका मुख्य कार्य कृषि और पशुपालन है। ऐसे में आठ वर्ष से नहर का सुधारीकरण न होने से धान की रोपाई करने में मुश्किल हो रही थी, लेकिन अब समस्या का समाधान हो गया है।
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नहर की मरम्मत के लिए सीमित बजट मिलता है। इसलिए जिले की कई नहरों की मरम्मत नहीं कर पा रहे हैं। सांकरी गांव में जेई को मौके पर भेजा जाएगा और नहर की मरम्मत के लिए आंगणन तैयार कर स्थाई रुप से नहर ठीक करवाई जाएगी।
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अतुल पांडेय, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग
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वर्ष 2010 में आपदा के दौरान पोखरी ब्लॉक के सांकरी गांव की सिंचाई नहर शुरुआत में ही करीब छह सौ मीटर तक क्षतिग्रस्त हो गई थी। ग्रामीणों ने इसकी सूचना जिला प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को दी, लेकिन नहर की मरम्मत नहीं हो पाई। ग्रामीण अभी तक धान की रोपाई के दौरान रबड़ के पाइप से खेतों तक पानी पहुंचाते थे, लेकिन वर्ष 2017 को जुलाई माह में अतिवृष्टि से गांव के गदेरे में नहर साइड भारी मात्रा में मलबा जमा हो गया, जिससे पाइप से भी खेतों तक पानी नहीं पहुंचाया जा सका। इसके बाद गांव की ग्रामीणों ने बैठककर स्वयं नहर की मरम्मत करने का फैसला लिया। गत 21 जून को अपने-अपने घर से कुदाल और फावड़े लेकर नहर का काम शुरू किया। शनिवार शाम तक नहर का काम पूरा कर खेतों तक पानी पहुंचा दिया गया। स्थानीय निवासी मुन्नी देवी, कविता देवी, नंदी देवी और बबीता देवी ने बताया कि गांव में 150 परिवार निवास करते हैं, जिनका मुख्य कार्य कृषि और पशुपालन है। ऐसे में आठ वर्ष से नहर का सुधारीकरण न होने से धान की रोपाई करने में मुश्किल हो रही थी, लेकिन अब समस्या का समाधान हो गया है।
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नहर की मरम्मत के लिए सीमित बजट मिलता है। इसलिए जिले की कई नहरों की मरम्मत नहीं कर पा रहे हैं। सांकरी गांव में जेई को मौके पर भेजा जाएगा और नहर की मरम्मत के लिए आंगणन तैयार कर स्थाई रुप से नहर ठीक करवाई जाएगी।
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अतुल पांडेय, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग