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हाईकोर्ट के आदेशों की पहले दिन ही उड़ी धज्जियां
Updated Sat, 23 Jun 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश।
हाईकोर्ट के आदेश का ऋषिकेश में पहले ही दिन पालन नहीं हुआ। शुक्रवार को गंगा में राफ्टिंग गतिविधियां दिन भर जारी रही। इससे साफ जाहिर होता है कि राज्य सरकार व टिहरी जिले के अधिकारियों के लिए उच्च न्यायालय का आदेश कोई मायने नहीं रखता है। उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकार को रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और अन्य जल क्रीड़ाओं के लिए दो सप्ताह में उचित नियम व नीति बनाने के आदेश राज्य सरकार को दिए थे। इसके साथ ही नियम व नीति बनने तक तमाम साहसिक व जल क्रीड़ाओं पर पाबंदी के आदेश भी जारी किए हैं। इसके बावजूद कौड़ियाला-मुनिकीरेती राफ्टिंग जोन में राफ्टिंग होती रही।
कौड़ियाला-मुनिकीरेती राफ्टिंग जोन में बीते वर्ष 2017 में 30 अक्टूबर को चेन्नई निवासी 25 वर्षीय डी. सुभाषनी की जान राफ्टिंग के दौरान चली गई थी। इसके बाद तीन जनवरी-2018 को भगवती वर्मन निवासी लक्ष्मीनगर, दिल्ली की मौत भी राफ्टिंग करते वक्त हुई थी। जिलाधिकारी टिहरी ने मामले की जांच कराई थी, जिसमें संबंधित राफ्टिंग कंपनियों को एसडीएम ने दोषी पाया था। दोनों ही कंपनियों के लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति कर उसे संबंधित विभाग को भी भेजा गया था।
समिति की शुल्क वसूली जारी
पर्यटन विभाग के निर्देश पर टिहरी जिला प्रशासन द्वारा गठित गंगा नदी राफ्टिंग प्रबंधन समिति की ओर से राफ्टिंग संचालकों से शुल्क वसूला जाता है, जिसे राफ्टिंग के लिए आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाएं जुटाने पर खर्च किया जा रहा है। राफ्टिंग कंपनियों के संचालकों का कहना था कि हाईकोर्ट के आदेश का वह पालन करते हैं। प्रशासन ने उन्हें राफ्टिंग रोकने के लिए कहना तो दूर, बल्कि समिति की ओर से वसूले जाने वाले शुल्क की शुक्रवार को भी वसूली की गई।
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कोट्स
हाईकोर्ट का आदेश फिलहाल प्रशासन तक नहीं पहुंचा है। आदेश प्राप्त होने पर इसका पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
- लक्ष्मीराज चौहान, उपजिलाधिकारी नरेंद्रनगर, टिहरी गढ़वाल।
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हजारों लोग होंगे बेरोजगार
हाईकोर्ट के नियमावली के बिना प्रदेश में राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग आदि पर्यटक गतिविधियों पर रोक के आदेश से साहसिक खेल गतिविधियों से जुड़े संचालकों परेशान हैं। कोर्ट के आदेश पर गंगा में राफ्टिंग आदि साहसिक खेलों की गतिविधियां पूरी तरह से बंद होती हैं, तो इससे सीधे तौर पर इन कंपनियों से जुड़े करीब 12 हजार लोगों का रोजगार प्रभावित हो जाएगा। इनके अलावा मुनिकीरेती से कौडियाला तक संचालित होटल, रेस्टोरेंटों व अन्य रोजगार से जुड़े लगभग 50 हजार लोग व उनके परिवार भी इससे प्रभावित होंगे। तीर्थनगरी में गंगा स्नान व तीर्थाटन के अलावा पर्यटन गतिविधियों के तौर पर राफ्टिंग, कैंपिंग क्याकिंग, पैराग्लाइडिंग, बंजी जंप आदि गतिविधियों के लिए सबसे अधिक पर्यटक पहुंचते हैं।
एनजीटी के आदेश पर पहले हट चुके कैंप
उत्तरांचल फाइनेस्ड आउटडोर के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह रावत की मानें तो जिस याचिका पर न्यायालय द्वारा आदेश पारित किया गया है, उक्त याचिका शिवपुरी क्षेत्र में गंगा किनारे संचालित दो कैंपों के विरुद्ध वर्ष 2014 में हाईकोर्ट में डाली गई थी। उन्होंने बताया कि इसके बाद 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने गंगा किनारे संचालित तमाम बीच कैंपों पर रोक लगा दी थी, उक्त दोनों कैंप भी एनजीटी के आदेश के तहत हटा दिए गए हैं। उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा राफ्टिंग गतिविधियों पर दिए गए आदेश को राज्य सरकार की न्यायालय में कमजोर पैरवी बताया। कहा कि सरकार को राफ्टिंग कंपनियों का पक्ष न्यायालय में रखना चाहिए।
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हाईकोर्ट के आदेश का ऋषिकेश में पहले ही दिन पालन नहीं हुआ। शुक्रवार को गंगा में राफ्टिंग गतिविधियां दिन भर जारी रही। इससे साफ जाहिर होता है कि राज्य सरकार व टिहरी जिले के अधिकारियों के लिए उच्च न्यायालय का आदेश कोई मायने नहीं रखता है। उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को राज्य सरकार को रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और अन्य जल क्रीड़ाओं के लिए दो सप्ताह में उचित नियम व नीति बनाने के आदेश राज्य सरकार को दिए थे। इसके साथ ही नियम व नीति बनने तक तमाम साहसिक व जल क्रीड़ाओं पर पाबंदी के आदेश भी जारी किए हैं। इसके बावजूद कौड़ियाला-मुनिकीरेती राफ्टिंग जोन में राफ्टिंग होती रही।
कौड़ियाला-मुनिकीरेती राफ्टिंग जोन में बीते वर्ष 2017 में 30 अक्टूबर को चेन्नई निवासी 25 वर्षीय डी. सुभाषनी की जान राफ्टिंग के दौरान चली गई थी। इसके बाद तीन जनवरी-2018 को भगवती वर्मन निवासी लक्ष्मीनगर, दिल्ली की मौत भी राफ्टिंग करते वक्त हुई थी। जिलाधिकारी टिहरी ने मामले की जांच कराई थी, जिसमें संबंधित राफ्टिंग कंपनियों को एसडीएम ने दोषी पाया था। दोनों ही कंपनियों के लाइसेंस निरस्त करने की संस्तुति कर उसे संबंधित विभाग को भी भेजा गया था।
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समिति की शुल्क वसूली जारी
पर्यटन विभाग के निर्देश पर टिहरी जिला प्रशासन द्वारा गठित गंगा नदी राफ्टिंग प्रबंधन समिति की ओर से राफ्टिंग संचालकों से शुल्क वसूला जाता है, जिसे राफ्टिंग के लिए आने वाले पर्यटकों के लिए सुविधाएं जुटाने पर खर्च किया जा रहा है। राफ्टिंग कंपनियों के संचालकों का कहना था कि हाईकोर्ट के आदेश का वह पालन करते हैं। प्रशासन ने उन्हें राफ्टिंग रोकने के लिए कहना तो दूर, बल्कि समिति की ओर से वसूले जाने वाले शुल्क की शुक्रवार को भी वसूली की गई।
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हाईकोर्ट का आदेश फिलहाल प्रशासन तक नहीं पहुंचा है। आदेश प्राप्त होने पर इसका पालन सुनिश्चित कराया जाएगा।
- लक्ष्मीराज चौहान, उपजिलाधिकारी नरेंद्रनगर, टिहरी गढ़वाल।
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हजारों लोग होंगे बेरोजगार
हाईकोर्ट के नियमावली के बिना प्रदेश में राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग आदि पर्यटक गतिविधियों पर रोक के आदेश से साहसिक खेल गतिविधियों से जुड़े संचालकों परेशान हैं। कोर्ट के आदेश पर गंगा में राफ्टिंग आदि साहसिक खेलों की गतिविधियां पूरी तरह से बंद होती हैं, तो इससे सीधे तौर पर इन कंपनियों से जुड़े करीब 12 हजार लोगों का रोजगार प्रभावित हो जाएगा। इनके अलावा मुनिकीरेती से कौडियाला तक संचालित होटल, रेस्टोरेंटों व अन्य रोजगार से जुड़े लगभग 50 हजार लोग व उनके परिवार भी इससे प्रभावित होंगे। तीर्थनगरी में गंगा स्नान व तीर्थाटन के अलावा पर्यटन गतिविधियों के तौर पर राफ्टिंग, कैंपिंग क्याकिंग, पैराग्लाइडिंग, बंजी जंप आदि गतिविधियों के लिए सबसे अधिक पर्यटक पहुंचते हैं।
एनजीटी के आदेश पर पहले हट चुके कैंप
उत्तरांचल फाइनेस्ड आउटडोर के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह रावत की मानें तो जिस याचिका पर न्यायालय द्वारा आदेश पारित किया गया है, उक्त याचिका शिवपुरी क्षेत्र में गंगा किनारे संचालित दो कैंपों के विरुद्ध वर्ष 2014 में हाईकोर्ट में डाली गई थी। उन्होंने बताया कि इसके बाद 2015 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने गंगा किनारे संचालित तमाम बीच कैंपों पर रोक लगा दी थी, उक्त दोनों कैंप भी एनजीटी के आदेश के तहत हटा दिए गए हैं। उन्होंने हाईकोर्ट द्वारा राफ्टिंग गतिविधियों पर दिए गए आदेश को राज्य सरकार की न्यायालय में कमजोर पैरवी बताया। कहा कि सरकार को राफ्टिंग कंपनियों का पक्ष न्यायालय में रखना चाहिए।