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कोर्ट की अवमानना मामले में 21 जून को होगी सुनवाई
Updated Tue, 19 Jun 2018 10:32 PM IST
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श्रीनगर। गढ़वाल विवि के कुलसचिव ने वर्ष 2009 के बाद विवि से संबद्ध संस्थानों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में बढ़ाई गई सीटों को निरस्त करने का आदेश जारी किया। इसके खिलाफ एक निजी शिक्षण संस्थान ने हाईकोर्ट में आदेश को स्थगित करने की याचिका दायर की थी, जिस पर कोर्ट ने स्थगन आदेश जारी किया था। बावजूद इसके कुलसचिव ने दोबारा सीट निरस्त करने का आदेश दिया। इस पर हाईकोर्ट की ओर से कुलसचिव को अवमानना का नोटिस जारी किया गया, जिस पर विवि प्रशासन 21 जून को कोर्ट में अपना पक्ष रखेगा।
गढ़वाल विवि के कुलसचिव डा. एके झा ने सात जून को आदेश जारी कर वर्ष 2009 के बाद विवि से संबद्ध संस्थानों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में बढ़ाई गई सीटों को निरस्त किया था। आदेश में कहा गया था कि शिक्षण सत्र 2018-19 में विवि से संबद्ध शिक्षण संस्थान वर्ष 2009 में निर्धारित सीटों व पाठ्यक्रमों के आधार पर ही प्रवेश दें। विवि के इस निर्णय से करीब 70 संस्थानों की सात हजार से अधिक सीटें प्रभावित हुई थी। पूर्व में 20 मार्च को भी विवि प्रशासन ने इस संबंध में आदेश जारी किया था, जिसके विरुद्ध एक निजी शिक्षण संस्थान ने हाईकोर्ट से इन सीटों पर यथा स्थिति रखने एवं विवि के आदेश को स्थगित कराने की याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सात मई को स्थगन आदेश जारी किया था। इसके अलावा इस संबंध में हाईकोर्ट में चार अन्य याचिकाएं भी दायर हुई थी। बावजूद इसके कुलसचिव डा. एके झा ने सात जून को फिर इन सीटों को निरस्त करने का आदेश जारी किया, जिस पर याचिकाकर्ता फिर कोर्ट की शरण में गए। मामले में हाईकोर्ट ने विवि के कुलसचिव डा. एके झा को अवमानना का नोटिस जारी कर 21 जून को सुनवाई की तिथि नियत की है। कोर्ट का नोटिस विवि को प्राप्त हो गया है। कुलसचिव ने कहा कि नियत तिथि पर कोर्ट में पक्ष रखा जाएगा।
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गढ़वाल विवि के कुलसचिव डा. एके झा ने सात जून को आदेश जारी कर वर्ष 2009 के बाद विवि से संबद्ध संस्थानों में विभिन्न पाठ्यक्रमों में बढ़ाई गई सीटों को निरस्त किया था। आदेश में कहा गया था कि शिक्षण सत्र 2018-19 में विवि से संबद्ध शिक्षण संस्थान वर्ष 2009 में निर्धारित सीटों व पाठ्यक्रमों के आधार पर ही प्रवेश दें। विवि के इस निर्णय से करीब 70 संस्थानों की सात हजार से अधिक सीटें प्रभावित हुई थी। पूर्व में 20 मार्च को भी विवि प्रशासन ने इस संबंध में आदेश जारी किया था, जिसके विरुद्ध एक निजी शिक्षण संस्थान ने हाईकोर्ट से इन सीटों पर यथा स्थिति रखने एवं विवि के आदेश को स्थगित कराने की याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सात मई को स्थगन आदेश जारी किया था। इसके अलावा इस संबंध में हाईकोर्ट में चार अन्य याचिकाएं भी दायर हुई थी। बावजूद इसके कुलसचिव डा. एके झा ने सात जून को फिर इन सीटों को निरस्त करने का आदेश जारी किया, जिस पर याचिकाकर्ता फिर कोर्ट की शरण में गए। मामले में हाईकोर्ट ने विवि के कुलसचिव डा. एके झा को अवमानना का नोटिस जारी कर 21 जून को सुनवाई की तिथि नियत की है। कोर्ट का नोटिस विवि को प्राप्त हो गया है। कुलसचिव ने कहा कि नियत तिथि पर कोर्ट में पक्ष रखा जाएगा।
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