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शक्तियों का उपयोग नहीं कर पा रहा है देश: निश्चलानंद
Updated Mon, 18 Jun 2018 10:28 PM IST
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कर्णप्रयाग। गोवर्धन पीठ (पुरी) के शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि देश में ऊर्जा के प्राकृतिक स्रोतों से अति छेड़छाड़ ही दैवी आपदाओं का कारण है। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष की मेधा, रक्षा, श्रम और वाणिज्य शक्ति आज विश्व में नंबर एक पर है, लेकिन अपने लिए देश का तंत्र इन शक्तियों का उपयोग नहीं कर पा रहा है।
कर्णप्रयाग प्रवास के दौरान आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि पृथ्वी, जल, वायु, प्रकाश और अग्नि पांच तत्वों से मानव शरीर बना है, लेकिन आज आधुनिकतावाद में इन पांच ऊर्जा के तत्वों से ही सर्वाधिक छेड़छाड़ की जा रही है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर अत्यधिक और अनियोजित निर्माण, जल पर जगह-जगह बांध और अनियमित दोहन, वायु, प्रकाश और अग्नि के साथ जो खिलवाड़ किया जा रहा है उसका ही नतीजा है कि भूकंप, बाढ़, प्रलय, भूस्खलन सहित कई दैवी आपदाएं आ रही हैं। यही नहीं इसका प्रभाव मानव शरीर पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे वेद और शास्त्रों से विज्ञान चलता है। संस्कृत भाषा में यदि रोजगार के अवसर पैदा हों और ज्योतिष के साथ ही वेदों का ज्ञान शिक्षा में अनिवार्य हो तो विज्ञान के क्षेत्र में देश सबसे आगे होगा। इस दौरान व्योम मिश्रा और गोविंदा नंद सरस्वती सहित कई लोग मौजूद थे।
कर्णप्रयाग प्रवास के दौरान आयोजित प्रवचन कार्यक्रम में शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने कहा कि पृथ्वी, जल, वायु, प्रकाश और अग्नि पांच तत्वों से मानव शरीर बना है, लेकिन आज आधुनिकतावाद में इन पांच ऊर्जा के तत्वों से ही सर्वाधिक छेड़छाड़ की जा रही है। उन्होंने कहा कि पृथ्वी पर अत्यधिक और अनियोजित निर्माण, जल पर जगह-जगह बांध और अनियमित दोहन, वायु, प्रकाश और अग्नि के साथ जो खिलवाड़ किया जा रहा है उसका ही नतीजा है कि भूकंप, बाढ़, प्रलय, भूस्खलन सहित कई दैवी आपदाएं आ रही हैं। यही नहीं इसका प्रभाव मानव शरीर पर भी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे वेद और शास्त्रों से विज्ञान चलता है। संस्कृत भाषा में यदि रोजगार के अवसर पैदा हों और ज्योतिष के साथ ही वेदों का ज्ञान शिक्षा में अनिवार्य हो तो विज्ञान के क्षेत्र में देश सबसे आगे होगा। इस दौरान व्योम मिश्रा और गोविंदा नंद सरस्वती सहित कई लोग मौजूद थे।
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