{"_id":"5b2546594f1c1bc96b8b67cb","slug":"15291694994-shrinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एनआइटी के लिए एनओसी देने के लिए एक हफ्ते का समय","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एनआइटी के लिए एनओसी देने के लिए एक हफ्ते का समय
Updated Sat, 16 Jun 2018 10:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रीनगर। एनआईटी स्थायी कैंपस को बिना शर्त जमीन देने के लिए जलेथा के ग्रामीणों को मनाने उच्च शिक्षा मंत्री एक बार फिर गांव पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि प्रभावितों के हितों को ध्यान में रखकर कार्य किए जाएंगे। ग्रामीणों से अनुरोध करते हुए उन्होंने आपस में मिल बैठकर एक सप्ताह में एनओसी (अनापत्ति प्रमाण पत्र) को लेकर निर्णय देने की बात कही।
वर्ष 2009 में स्वीकृत एनआईटी वर्तमान में श्रीनगर के भक्तियाना में आईटीआई व पॉलीटेक्निक के भवनों में अस्थायी रुप से संचालित हो रहा है। स्थायी कैंपस के लिए श्रीनगर के समीप सुमाड़ी गांव में जमीन देखी गई थी, लेकिन इसको निर्माण के लिए अनुपयुक्त पाया गया, जिसके बाद बुघाणी के समीप जलेथा गांव के ग्रामीणों ने भूमि देने की बात कही। यहां सरकारी और निजी लगभग 100 हेक्टेअर जमीन है, लेकिन ग्रामीण भूमि के बाजार रेट से मुआवजा और रोजगार की मांग कर रहे हैं। जो केंद्र सरकार के अधिग्रहण के प्राविधान में नहीं है। पूर्व में राज्य मंत्री धन सिंह समेत राजस्व विभाग के अधिकारी ग्रामीणों के साथ कई दौर की बात कर चुके हैं। शनिवार को धन सिंह एसडीएम श्रीनगर मायादत्त जोशी और तहसीलदार सुनील राज के साथ फिर गांव में पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जमीन देने वालों के हित प्रभावित नहीं होंगे। रोजगार हो या अन्य मुद्दा सरकार किसी का अहित नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण मिल बैठक कर निर्णय ले। इस मौके पर ग्राम प्रधान गुड्डी देवी, दिगंबर भंडारी, धीरेंद्र भंडारी, सौरभ और फते सिंह आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
वर्ष 2009 में स्वीकृत एनआईटी वर्तमान में श्रीनगर के भक्तियाना में आईटीआई व पॉलीटेक्निक के भवनों में अस्थायी रुप से संचालित हो रहा है। स्थायी कैंपस के लिए श्रीनगर के समीप सुमाड़ी गांव में जमीन देखी गई थी, लेकिन इसको निर्माण के लिए अनुपयुक्त पाया गया, जिसके बाद बुघाणी के समीप जलेथा गांव के ग्रामीणों ने भूमि देने की बात कही। यहां सरकारी और निजी लगभग 100 हेक्टेअर जमीन है, लेकिन ग्रामीण भूमि के बाजार रेट से मुआवजा और रोजगार की मांग कर रहे हैं। जो केंद्र सरकार के अधिग्रहण के प्राविधान में नहीं है। पूर्व में राज्य मंत्री धन सिंह समेत राजस्व विभाग के अधिकारी ग्रामीणों के साथ कई दौर की बात कर चुके हैं। शनिवार को धन सिंह एसडीएम श्रीनगर मायादत्त जोशी और तहसीलदार सुनील राज के साथ फिर गांव में पहुंचे। इस मौके पर उन्होंने कहा कि जमीन देने वालों के हित प्रभावित नहीं होंगे। रोजगार हो या अन्य मुद्दा सरकार किसी का अहित नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि ग्रामीण मिल बैठक कर निर्णय ले। इस मौके पर ग्राम प्रधान गुड्डी देवी, दिगंबर भंडारी, धीरेंद्र भंडारी, सौरभ और फते सिंह आदि मौजूद थे।
विज्ञापन