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समावेशी शिक्षा कार्यशाला में दी तकनीकी जानकारी
Updated Fri, 15 Jun 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला,डोईवाला।
उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय और भारतीय पुर्नवास परिषद की ओर से आयोजित की गई तीन दिवसीय समावेशी शिक्षा कार्यशाला का बृहस्पतिवार को समापन हो गया। फतेहपुर टांडा स्थित हिमालयन आयुर्वेदिक कॉलेज में आयोजित कार्यशाला के समापन पर विषय विशेषज्ञ डॉ. मुरली सिंह ने मूक बधिर बच्चों की श्रवण बाधिता की जांच की प्रशिक्षण तकनीक के बारे में जानकारी दी। सविता सिंह ने ऑडियोमीटर द्वारा बोलचाल की तीव्रता नापने का प्रशिक्षण जबकि काशीपुर रिसोर्स सेंटर के सतीश चौहान ने नेत्रहीन दिव्यांग बच्चों को ब्रेल लिपि द्वारा प्रशिक्षित करने की जानकारियां दी। वहीं अनंत मेहरा ने मानसिक रूप से मंद लोगों के प्रकार, अध्ययन, अध्यापन और जीवन कौशल से संबंधित तकनीकी बातों को बताया।
डॉ. हेमचंद रयाल ने कार्यशाला को शिक्षकों के उपयोगी बताते हुए कहा कि मिले अनुभव से समावेशी शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए। गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय पौड़ी परिसर की डॉ. निधि बड़थ्वाल ने कहा कि ऐसे आयोजन दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के लिए कारगर साबित हो सकते हैं। समापन पर कार्यशाला संयोजक डॉ. सिद्धार्थ पोखरियाल ने कार्यशाला की रिपोर्ट पढ़कर सुनाई। बताया कि दिव्यांग बच्चों को सामान्य विद्यालय में प्रवेश देने के साथ ही विशिष्ट शिक्षक का होना आवश्यक है। कार्यशाला के समापन पर तमाम प्रतिभागी शिक्षक मौजूद रहे थे।
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उत्तराखंड मुक्त विश्वविद्यालय और भारतीय पुर्नवास परिषद की ओर से आयोजित की गई तीन दिवसीय समावेशी शिक्षा कार्यशाला का बृहस्पतिवार को समापन हो गया। फतेहपुर टांडा स्थित हिमालयन आयुर्वेदिक कॉलेज में आयोजित कार्यशाला के समापन पर विषय विशेषज्ञ डॉ. मुरली सिंह ने मूक बधिर बच्चों की श्रवण बाधिता की जांच की प्रशिक्षण तकनीक के बारे में जानकारी दी। सविता सिंह ने ऑडियोमीटर द्वारा बोलचाल की तीव्रता नापने का प्रशिक्षण जबकि काशीपुर रिसोर्स सेंटर के सतीश चौहान ने नेत्रहीन दिव्यांग बच्चों को ब्रेल लिपि द्वारा प्रशिक्षित करने की जानकारियां दी। वहीं अनंत मेहरा ने मानसिक रूप से मंद लोगों के प्रकार, अध्ययन, अध्यापन और जीवन कौशल से संबंधित तकनीकी बातों को बताया।
डॉ. हेमचंद रयाल ने कार्यशाला को शिक्षकों के उपयोगी बताते हुए कहा कि मिले अनुभव से समावेशी शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए। गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय पौड़ी परिसर की डॉ. निधि बड़थ्वाल ने कहा कि ऐसे आयोजन दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों के लिए कारगर साबित हो सकते हैं। समापन पर कार्यशाला संयोजक डॉ. सिद्धार्थ पोखरियाल ने कार्यशाला की रिपोर्ट पढ़कर सुनाई। बताया कि दिव्यांग बच्चों को सामान्य विद्यालय में प्रवेश देने के साथ ही विशिष्ट शिक्षक का होना आवश्यक है। कार्यशाला के समापन पर तमाम प्रतिभागी शिक्षक मौजूद रहे थे।
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