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तीसरे दिन भी जारी रहा रेस्क्यू
Updated Sat, 09 Jun 2018 11:00 PM IST
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थराली। पैनगढ़ गदेरे में लापता मजदूरों की खोज के लिए तीन दिन तक चले रेस्क्यू अभियान में एसडीआरएफ को कोई सफलता नहीं मिली। रेस्क्यू के लिए बीआरओ को बुलाया गया और बीआरओ ने खोज शुरू की तो मलबे में शव दिखाई दिया। बीआरओ के साथ आईटीबीपी और ग्रामीण भी रेस्क्यू अभियान में लगे हुए हैं।
तहसील के पैनगढ़ में मलबे में ग्रामीणों को पांच जून को इंसान का पंजा दिखाई दिया था। साथ ही मलबे से आ रही दुर्गंध की सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी थी। इस पर राजस्व पुलिस ने छह जून को गांव का दौरा किया और मलबे में एक जून से लापता तीन मजदूरों के दबे होने की आशंका जताते हुए सात जून से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। गदेरे में भारी बोल्डर और उपकरणों कमी के कारण तीन दिन में एसडीआरएफ, आईटीबीपी, वन विभाग के कर्मी यहां मलबे में मजदूरों को नहीं ढूंढ पाए। इसके बाद बीआरओ की मदद ली और जब रेस्क्यू शुरू किया तो मलबे में शव दिखाई दिया। नायब तहसीलदार ओमबीर सिंह और राजस्व उपनिरीक्षक चंद्र सिंह बुटोला ने बताया कि बीआरओ के इंजीनियर तामूद के नेतृत्व में दस से अधिक जवान यहां पहुंचे हैं। रेस्क्यू करने के लिए ब्लास्टिंग का सहारा लिया जा सकता है।
तहसील के पैनगढ़ में मलबे में ग्रामीणों को पांच जून को इंसान का पंजा दिखाई दिया था। साथ ही मलबे से आ रही दुर्गंध की सूचना ग्रामीणों ने पुलिस को दी थी। इस पर राजस्व पुलिस ने छह जून को गांव का दौरा किया और मलबे में एक जून से लापता तीन मजदूरों के दबे होने की आशंका जताते हुए सात जून से रेस्क्यू अभियान शुरू किया। गदेरे में भारी बोल्डर और उपकरणों कमी के कारण तीन दिन में एसडीआरएफ, आईटीबीपी, वन विभाग के कर्मी यहां मलबे में मजदूरों को नहीं ढूंढ पाए। इसके बाद बीआरओ की मदद ली और जब रेस्क्यू शुरू किया तो मलबे में शव दिखाई दिया। नायब तहसीलदार ओमबीर सिंह और राजस्व उपनिरीक्षक चंद्र सिंह बुटोला ने बताया कि बीआरओ के इंजीनियर तामूद के नेतृत्व में दस से अधिक जवान यहां पहुंचे हैं। रेस्क्यू करने के लिए ब्लास्टिंग का सहारा लिया जा सकता है।
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