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उतराखंड परिवहन निगम के श्रीनगर डिपो ने लक्ष्य से ज्यादा किया हासिल
Updated Thu, 07 Jun 2018 10:27 PM IST
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श्रीनगर। सुविधाएं नहीं होने के बावजूद उत्तराखंड परिवहन निगम (रोडवेज) का श्रीनगर डिपो देहरादून मंडल में कमाई में सबसे आगे रहा है। श्रीनगर डिपो ने मंडल मुख्यालय की ओर से दिए गए लक्ष्य से ज्यादा कमाई की है। डिपो की कमाई 101 प्रतिशत रही है। इसकी तुलना में रुड़की, हरिद्वार और देहरादून जैसे डिपो पिछड़ गए। यदि श्रीनगर डिपो में बसों की संख्या के साथ ही संसाधन बढ़ा दिए जाए, तो रोडवेज की आमदनी में और इजाफा हो सकता है।
उत्तराखंड परिवहन निगम ने श्रीनगर डिपो के संचालन को शुरू से ही गंभीरता से नहीं लिया। यही वजह रही कि यह डिपो 12 साल तक सिर्फ बस स्टापेज के रुप में काम करता रहा। 8 नवंबर 2004 को तत्कालीन परिवहन मंत्री हीरा सिंह बिष्ट ने श्रीनगर डिपो का उद्घाटन किया था। तब 18 बसें इस डिपो को मिली थी, लेकिन-तीन चार दिन बाद ही इनमें से अधिकतर बसें ऋषिकेश और कोटद्वार डिपो को दे दी गई। बाद में यहां तैनात स्टाफ भी अन्यत्र तैनात कर दिया गया। डिपो के पुन: संचालन के लिए प्रगतिशील जनमंच के बैनर तले क्षेत्र की जनता ने आंदोलन चलाया। लंबे संघर्ष के बाद 9 नवंबर 2016 से डिपो ने पुन: विधिवत काम करना शुरू कर दिया।
अब इस डिपो के पास सिर्फ 10 बसें ही हैं। यह बसें मैदानी क्षेत्रों के लिए संचालित होती हैं। पहाड़ के लिए यहां से सेवाएं नहीं हैं। लगभग दशक पुराने भवन में डिपो संचालित हो रहा है। इस भवन की हालत बहुत खराब है। डिपो में ड्राइवर सहित ऑफिस स्टाफ की भी भारी कमी है। संसाधनों की कमी के बाजवूद मई माह में डिपो ने लक्ष्य से ज्यादा आमदनी हासिल की है। देहरादून मंडल मुख्यालय ने डिपो को मई माह में 37 लाख 20 हजार रुपये का लक्ष्य दिया था। डिपो को इसके सापेक्ष 37 लाख 72 हजार रुपये की आय हुई है। यदि श्रीनगर डिपो से पहाड़ी क्षेत्रों के लिए भी बस सेवाएं शुरू कर दी जाएं तो स्थानीय लोगों को सुविधा तो मिलेगी ही, साथ ही निगम की आय भी बढ़ेगी।
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कोट------------
डिपो की ओर से पांच नई बसों की डिमांड की गई है। गुड़गांव, कोटद्वार, हल्द्वानी और गुप्तकाशी सहित अन्य क्षेत्रों के लिए बस सेवा शुरू करने की योजना है। आठ ड्राइवर भी मांगे गए हैं।
-पूजा जोशी, एजीएम, श्रीनगर डिपो
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उत्तराखंड परिवहन निगम ने श्रीनगर डिपो के संचालन को शुरू से ही गंभीरता से नहीं लिया। यही वजह रही कि यह डिपो 12 साल तक सिर्फ बस स्टापेज के रुप में काम करता रहा। 8 नवंबर 2004 को तत्कालीन परिवहन मंत्री हीरा सिंह बिष्ट ने श्रीनगर डिपो का उद्घाटन किया था। तब 18 बसें इस डिपो को मिली थी, लेकिन-तीन चार दिन बाद ही इनमें से अधिकतर बसें ऋषिकेश और कोटद्वार डिपो को दे दी गई। बाद में यहां तैनात स्टाफ भी अन्यत्र तैनात कर दिया गया। डिपो के पुन: संचालन के लिए प्रगतिशील जनमंच के बैनर तले क्षेत्र की जनता ने आंदोलन चलाया। लंबे संघर्ष के बाद 9 नवंबर 2016 से डिपो ने पुन: विधिवत काम करना शुरू कर दिया।
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अब इस डिपो के पास सिर्फ 10 बसें ही हैं। यह बसें मैदानी क्षेत्रों के लिए संचालित होती हैं। पहाड़ के लिए यहां से सेवाएं नहीं हैं। लगभग दशक पुराने भवन में डिपो संचालित हो रहा है। इस भवन की हालत बहुत खराब है। डिपो में ड्राइवर सहित ऑफिस स्टाफ की भी भारी कमी है। संसाधनों की कमी के बाजवूद मई माह में डिपो ने लक्ष्य से ज्यादा आमदनी हासिल की है। देहरादून मंडल मुख्यालय ने डिपो को मई माह में 37 लाख 20 हजार रुपये का लक्ष्य दिया था। डिपो को इसके सापेक्ष 37 लाख 72 हजार रुपये की आय हुई है। यदि श्रीनगर डिपो से पहाड़ी क्षेत्रों के लिए भी बस सेवाएं शुरू कर दी जाएं तो स्थानीय लोगों को सुविधा तो मिलेगी ही, साथ ही निगम की आय भी बढ़ेगी।
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डिपो की ओर से पांच नई बसों की डिमांड की गई है। गुड़गांव, कोटद्वार, हल्द्वानी और गुप्तकाशी सहित अन्य क्षेत्रों के लिए बस सेवा शुरू करने की योजना है। आठ ड्राइवर भी मांगे गए हैं।
-पूजा जोशी, एजीएम, श्रीनगर डिपो