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बदरीनाथ में श्री पुरुषोतम मास महोत्सव का पूर्णाहूति के साथ हुआ समापन
Updated Sat, 02 Jun 2018 10:48 PM IST
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बदरीनाथ। विश्व शांति के लिए बदरीनाथ धाम में सात दिनों से चल रहे श्री पुरुषोत्तम मास महोत्सव का पूर्णाहुति के साथ समापन हो गया। महोत्सव के अंतिम दिन स्वर्ण पुष्प से महायज्ञ कुंड में मंत्रों की आहुतियां दी गईं। हजारों श्रद्धालुओं ने महायज्ञ में शामिल होकर पुण्य अर्जित किया। महोत्सव के बाद भंडारे का आयोजन भी हुआ।
पुरुषोत्तम मास महोत्सव के दौरान श्री झालरिया पीठाधीश्वर स्वामी श्री घनश्यामाचार्य जी महाराज ने कहा कि जहां संस्कार होते हैं, वहीं शुभ कृत्य होते हैं। श्रद्धापूर्वक की गई सेवा हमेशा फलदायी होती है। उन्होंने कहा कि पुत्र की ओर से किए गए पुण्यों का फल उसके पितरों को मिलता है। सत्कर्म के लिए एक हाथ उठता है तो हजारों हाथ उसके सहयोगी हो जाते हैं। जरूरत है तो सिर्फ किसी के पहल करने की। श्री पुरुषोत्तम मास महोत्सव के तहत 144 कुंडीय श्री महालक्ष्मी महायज्ञ, रामार्चा महायज्ञ, लक्षार्चना महायज्ञ, कल्याणोत्सव और सहस्रकलशाभिषेक अनुष्ठान हुए। महोत्सव के दौरान श्रीमद्भागवत कथा का व्याख्यान कर रहे कथावाचक युवराज स्वामी भागवत भूषण श्री भूदेवाचार्य जी महाराज ने परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वाचन किया। उन्होंने कहा कि ब्रह्म दंड से शापित होने के बाद भी श्रद्धापूर्वक श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने से परीक्षित परमपद के अधिकारी बने। महोत्सव के दौरान 108 आचार्य ब्राह्मणों ने वेद पाठ और पारायण किया।
पुरुषोत्तम मास महोत्सव के दौरान श्री झालरिया पीठाधीश्वर स्वामी श्री घनश्यामाचार्य जी महाराज ने कहा कि जहां संस्कार होते हैं, वहीं शुभ कृत्य होते हैं। श्रद्धापूर्वक की गई सेवा हमेशा फलदायी होती है। उन्होंने कहा कि पुत्र की ओर से किए गए पुण्यों का फल उसके पितरों को मिलता है। सत्कर्म के लिए एक हाथ उठता है तो हजारों हाथ उसके सहयोगी हो जाते हैं। जरूरत है तो सिर्फ किसी के पहल करने की। श्री पुरुषोत्तम मास महोत्सव के तहत 144 कुंडीय श्री महालक्ष्मी महायज्ञ, रामार्चा महायज्ञ, लक्षार्चना महायज्ञ, कल्याणोत्सव और सहस्रकलशाभिषेक अनुष्ठान हुए। महोत्सव के दौरान श्रीमद्भागवत कथा का व्याख्यान कर रहे कथावाचक युवराज स्वामी भागवत भूषण श्री भूदेवाचार्य जी महाराज ने परीक्षित मोक्ष प्रसंग का वाचन किया। उन्होंने कहा कि ब्रह्म दंड से शापित होने के बाद भी श्रद्धापूर्वक श्रीमद्भागवत कथा श्रवण करने से परीक्षित परमपद के अधिकारी बने। महोत्सव के दौरान 108 आचार्य ब्राह्मणों ने वेद पाठ और पारायण किया।
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