{"_id":"5b11b17c4f1c1b996e8b5f91","slug":"152788621015-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अल्लाह की बारगाह में उमड़े नमाजी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अल्लाह की बारगाह में उमड़े नमाजी
Updated Sat, 02 Jun 2018 02:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/ अमर उजाला, डोईवाला
माहे रमजान के तीसरे जुमे की नमाज नगर और देहात की मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गई। नमाज से पहले उलमा और पेश इमामों ने रमजान की फजीलतें बयान की। उन्होंने लोगों से समय पर जकात और सदका-ए-फितर अदा करने की अपील की। नमाज के बाद इमामों ने मुल्क और दुनिया में खुशहाली की दुआ कराई।
शुक्रवार को तीसरे जुमे पर नमाज के लिए रोजेदारों ने सुबह से ही तैयारियां शुरू कर दी थी। दोपहर के वक्त रोजेदार नए नए कपड़े पहनकर बच्चों को साथ लेकर मस्जिदों में पहुंचे। डोईवाला नगर, कुडकावाला, भानियावाला आदि कई स्थानों पर मस्जिदें भर जाने की वजह से छतों और मस्जिदों के बाहर शफें बिछाकर नमाज अदा की गई। जामा मस्जिद तेलीवाला के मुफ्ती करामत हुसैन ने रमजान ने रमजान की फजीलतें बयान की। उन्होंने लोगों को जकात के बारे में जानकारी दी। बताया कि इस्लाम में जकात (दान) की बड़ी अहमियत है। जिसके पास 52.5 तोले चांदी या इससे ज्यादा की रकम अथवा संपत्ति हो और उसे उस आदमी के पास एक साल हो गया हो। उस पर 40वां हिस्सा यानी 2.5 प्रतिशत जकात फर्ज है। जकात रोजे की जीनत बढ़ाता है। जकात चांद की तारीख के हिसाब से साल में एक बार देना फर्ज है। रमजान में जकात देना अफजल है, क्योंकि रमजान में अल्लाह हर नेकी के बदले 70 गुना सवाब अता फरमाते हैं। जकात जरूरतमंदों, विधवा, अनाथ, दिव्यांग आदि को दें। अपने जरूरतमंद रिश्तेदार को जकात देना भी अफजल है। उसके बिना मांगे ही जकात दें।
विज्ञापन
माहे रमजान के तीसरे जुमे की नमाज नगर और देहात की मस्जिदों में अकीदत के साथ अदा की गई। नमाज से पहले उलमा और पेश इमामों ने रमजान की फजीलतें बयान की। उन्होंने लोगों से समय पर जकात और सदका-ए-फितर अदा करने की अपील की। नमाज के बाद इमामों ने मुल्क और दुनिया में खुशहाली की दुआ कराई।
शुक्रवार को तीसरे जुमे पर नमाज के लिए रोजेदारों ने सुबह से ही तैयारियां शुरू कर दी थी। दोपहर के वक्त रोजेदार नए नए कपड़े पहनकर बच्चों को साथ लेकर मस्जिदों में पहुंचे। डोईवाला नगर, कुडकावाला, भानियावाला आदि कई स्थानों पर मस्जिदें भर जाने की वजह से छतों और मस्जिदों के बाहर शफें बिछाकर नमाज अदा की गई। जामा मस्जिद तेलीवाला के मुफ्ती करामत हुसैन ने रमजान ने रमजान की फजीलतें बयान की। उन्होंने लोगों को जकात के बारे में जानकारी दी। बताया कि इस्लाम में जकात (दान) की बड़ी अहमियत है। जिसके पास 52.5 तोले चांदी या इससे ज्यादा की रकम अथवा संपत्ति हो और उसे उस आदमी के पास एक साल हो गया हो। उस पर 40वां हिस्सा यानी 2.5 प्रतिशत जकात फर्ज है। जकात रोजे की जीनत बढ़ाता है। जकात चांद की तारीख के हिसाब से साल में एक बार देना फर्ज है। रमजान में जकात देना अफजल है, क्योंकि रमजान में अल्लाह हर नेकी के बदले 70 गुना सवाब अता फरमाते हैं। जकात जरूरतमंदों, विधवा, अनाथ, दिव्यांग आदि को दें। अपने जरूरतमंद रिश्तेदार को जकात देना भी अफजल है। उसके बिना मांगे ही जकात दें।
विज्ञापन