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जीवन की सुरक्षा के लिए पर्यावरण बचाना जरुरी
Updated Mon, 21 May 2018 02:08 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला,मुनिकीरेती ।
परमार्थ निकेतन आश्रम में आशा कार्यकत्रियों को महिला एवं बाल स्वास्थ्य, कैंसर की रोकथाम और जागरूकता एवं स्वच्छता विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में कार्यकत्रियों को विभिन्न विषयों पर ऑडियो-वीडियो संदेश के जरिए स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि 35 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं को अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। राज्य की आशा कार्यकत्रियों को प्रशिक्षित कर स्वास्थ्य जागरूकता संदेश को प्रदेश की प्रत्येक महिला तक पहुंचाना ही इस तरह की कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है।
इस अवसर पर आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य को पर्यावरण सर्वाधिक प्रभावित करता है। महिलाएं व बच्चे प्राकृतिक रूप से प्रकृति एवं पर्यावरण के काफी करीब होते हैं। महिलाओं की पोषण संबंधी समस्याएं आने वाली पीढ़ी के विकास को भी प्रभावित करती हैं। लिहाजा आने वाली पीढ़ियों के विकास के लिए स्वच्छ वातावरण, उत्तम स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ जल की आपूर्ति बेहद जरूरी है। इस ओर सभी को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। कार्यशाला के समापन अवसर पर अतिथियों व आशा कार्यकत्रियों ने आश्रम घाट पर सांध्यकालीन गंगा आरती में प्रतिभाग किया। इस मौके पर मौजूद नारी शक्ति व सभी प्रशिक्षकों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई।
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परमार्थ निकेतन आश्रम में आशा कार्यकत्रियों को महिला एवं बाल स्वास्थ्य, कैंसर की रोकथाम और जागरूकता एवं स्वच्छता विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में कार्यकत्रियों को विभिन्न विषयों पर ऑडियो-वीडियो संदेश के जरिए स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियां दी गई। प्रशिक्षकों ने बताया कि 35 वर्ष की आयु के बाद महिलाओं को अपने स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। राज्य की आशा कार्यकत्रियों को प्रशिक्षित कर स्वास्थ्य जागरूकता संदेश को प्रदेश की प्रत्येक महिला तक पहुंचाना ही इस तरह की कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य है।
इस अवसर पर आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनि ने कहा कि महिलाओं व बच्चों के स्वास्थ्य को पर्यावरण सर्वाधिक प्रभावित करता है। महिलाएं व बच्चे प्राकृतिक रूप से प्रकृति एवं पर्यावरण के काफी करीब होते हैं। महिलाओं की पोषण संबंधी समस्याएं आने वाली पीढ़ी के विकास को भी प्रभावित करती हैं। लिहाजा आने वाली पीढ़ियों के विकास के लिए स्वच्छ वातावरण, उत्तम स्वास्थ्य सुविधाएं, शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छ जल की आपूर्ति बेहद जरूरी है। इस ओर सभी को मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। कार्यशाला के समापन अवसर पर अतिथियों व आशा कार्यकत्रियों ने आश्रम घाट पर सांध्यकालीन गंगा आरती में प्रतिभाग किया। इस मौके पर मौजूद नारी शक्ति व सभी प्रशिक्षकों को पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई।
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