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सेना के जवानों के मजबूत इरादों को नहीं डिगा पाया मौसम
Updated Sat, 19 May 2018 10:48 PM IST
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जोशीमठ। सेना के जवानों ने हेमकुंड साहिब के पैदल ट्रैक पर तीन किलोमीटर तक फैले बर्फ को काटकर हेमकुंड साहिब का रास्ता खोल दिया है। इस बार यहां अत्यधिक बर्फबारी होने के बाद भी मात्र नौ दिन में जवानों ने हेमकुंड साहिब तक पैदल रास्ता खोल दिया। अब 22 मई तक हेमकुंड तक खच्चरों की आवाजाही भी शुरू हो जाएगी।
25 मई से हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा शुरू हो जाएगी। हेमकुंड साहिब के पैदल ट्रैक पर अटलाकुड़ी से हेमकुंड साहिब तक (तीन किलोमीटर) करीब चार फीट बर्फ फैली हुई थी। मई माह में बर्फबारी होने से यहां रास्ता खोलना किसी चुनौती से कम नहीं था। इसके बाद भी गत 11 मई से 418 इंजीनियरिंग कोर के 25 जवानों ने सूबेदार इतबाल सिंह के नेतृत्व में बर्फ हटाने का काम शुरू किया था। अटलाकुड़ी में करीब छह फीट का हिमखंड था लेकिन जवानों के मजबूत हौसले के बीच दुश्वारियां भी नतमस्तक हो गईं। बारिश और बर्फबारी के बीच जवानों ने बर्फ हटाने का काम शुरू किया। पैदल दूरी अधिक होने से यहां स्नो कटर भी नहीं ले जाया जा सकता था। लिहाजा जवान गेंती और फावड़े से ही बर्फ हटाने में जुट गए। दल का नेतृत्व कर रहे सूबेदार इतबाल सिंह का कहना है कि हेमकुंड क्षेत्र में पल-पल बदल रहे मौसम के बीच रास्ते को खोल पाना किसी चुनौती से कम नहीं था। अटलाकुड़ी में ग्लेशियर के टूटने का डर और संकरे मार्ग पर बर्फ की दीवार के बीच कार्य करना बढ़ा मुश्किल था, लेकिन जवानों के मजबूत इरादों ने बेहद कम समय में रास्ते से बर्फ हटा दी। अब 22 मई तक हेमकुंड तक खच्चरों की आवाजाही भी शुरू हो जाएगी।
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25 मई से हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा शुरू हो जाएगी। हेमकुंड साहिब के पैदल ट्रैक पर अटलाकुड़ी से हेमकुंड साहिब तक (तीन किलोमीटर) करीब चार फीट बर्फ फैली हुई थी। मई माह में बर्फबारी होने से यहां रास्ता खोलना किसी चुनौती से कम नहीं था। इसके बाद भी गत 11 मई से 418 इंजीनियरिंग कोर के 25 जवानों ने सूबेदार इतबाल सिंह के नेतृत्व में बर्फ हटाने का काम शुरू किया था। अटलाकुड़ी में करीब छह फीट का हिमखंड था लेकिन जवानों के मजबूत हौसले के बीच दुश्वारियां भी नतमस्तक हो गईं। बारिश और बर्फबारी के बीच जवानों ने बर्फ हटाने का काम शुरू किया। पैदल दूरी अधिक होने से यहां स्नो कटर भी नहीं ले जाया जा सकता था। लिहाजा जवान गेंती और फावड़े से ही बर्फ हटाने में जुट गए। दल का नेतृत्व कर रहे सूबेदार इतबाल सिंह का कहना है कि हेमकुंड क्षेत्र में पल-पल बदल रहे मौसम के बीच रास्ते को खोल पाना किसी चुनौती से कम नहीं था। अटलाकुड़ी में ग्लेशियर के टूटने का डर और संकरे मार्ग पर बर्फ की दीवार के बीच कार्य करना बढ़ा मुश्किल था, लेकिन जवानों के मजबूत इरादों ने बेहद कम समय में रास्ते से बर्फ हटा दी। अब 22 मई तक हेमकुंड तक खच्चरों की आवाजाही भी शुरू हो जाएगी।
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