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हिमालयी क्षेत्र के विकास का नया प्रारूप जनजीवन पर पड़ रहा भारी
Updated Thu, 17 May 2018 10:32 PM IST
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श्रीनगर। गढ़वाल विवि के मानव विज्ञान विभाग में ऑल वेदर रोड पर मानव, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव पर एक जन सूचना रिपोर्ट प्रस्तुत की गई, जिसके अनुसार हिमालयी क्षेत्र के विकास का नया प्रारूप जनजीवन पर पड़ रहा भारी है। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि उक्त रिपोर्ट प्रधानमंत्री को भी भेजी जाएगी।
बृहस्पतिवार को गढ़वाल विवि के मानव विज्ञान विभाग, पर्वतीय विकास शोध केंद्र, हिमालय बचाओ आंदोलन एवं अतिरिक्त सोच एवं कार्य नियोजन आयोग की ओर से एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने ऑल वेदर रोड पर मानव, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव पर एक जन सूचना रिपोर्ट प्रस्तुत की। सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि मध्य हिमालयी क्षेत्र के विकास का नया प्रारूप स्थानीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जनजीवन पर भारी पड़ रहा है। सड़क निर्माण, सड़क चौड़ीकरण, जल विद्युत परियोजनाओं व सुरंगों का निर्माण मध्य हिमालयी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा रहे हैं। अनियोजित निर्माण कार्यों का बुरा असर जनजीवन पर पड़ रहा है। मानव विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. विद्या सिंह चौहान ने कहा कि हिमालय की संवेदनशील भू गर्भीय स्थिति को देखते हुए ऑल वेदर रोड के नाम पर उत्तराखंड के हरे वृक्षों को कटान और भारी मशीनों का प्रयोग इन क्षेत्रों के लिए भविष्य में खतरा है। प्रो. चौहान ने कहा कि शोध रिपोर्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व नीति आयोग को प्रेषित की जाएगी। हिमालय बचाओ आंदोलन के संयोजक समीर रतूड़ी ने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान मलबे को सीधे नदी में डालने के बजाय डंपिंग जोन बनाया जाना चाहिए। वहीं पर्वतीय विकास शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डा. अरविंद दरमोड़ा ने कहा कि यह क्षेत्र भूकंप के दृष्टिकोण से संवेदनशील है। अत: इस क्षेत्र में किसी भी निर्माण कार्य से पहले पर्यावरणीय अनुकूलन को देखा जाना चाहिए। सेमिनार में मानव विज्ञान विभाग के शोध छात्र दिनेश गोदियाल, सुरेश भट्ट, उत्तम सिंह राणा, सुरेश कुमार, अनुराग चमोली, मोहित सिंह, राजेंद्र बिष्ट आदि मौजूद थे।
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बृहस्पतिवार को गढ़वाल विवि के मानव विज्ञान विभाग, पर्वतीय विकास शोध केंद्र, हिमालय बचाओ आंदोलन एवं अतिरिक्त सोच एवं कार्य नियोजन आयोग की ओर से एक दिवसीय सेमिनार आयोजित किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने ऑल वेदर रोड पर मानव, सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय प्रभाव पर एक जन सूचना रिपोर्ट प्रस्तुत की। सेमिनार में वक्ताओं ने कहा कि मध्य हिमालयी क्षेत्र के विकास का नया प्रारूप स्थानीय पर्यावरण, पारिस्थितिकी और जनजीवन पर भारी पड़ रहा है। सड़क निर्माण, सड़क चौड़ीकरण, जल विद्युत परियोजनाओं व सुरंगों का निर्माण मध्य हिमालयी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा रहे हैं। अनियोजित निर्माण कार्यों का बुरा असर जनजीवन पर पड़ रहा है। मानव विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. विद्या सिंह चौहान ने कहा कि हिमालय की संवेदनशील भू गर्भीय स्थिति को देखते हुए ऑल वेदर रोड के नाम पर उत्तराखंड के हरे वृक्षों को कटान और भारी मशीनों का प्रयोग इन क्षेत्रों के लिए भविष्य में खतरा है। प्रो. चौहान ने कहा कि शोध रिपोर्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व नीति आयोग को प्रेषित की जाएगी। हिमालय बचाओ आंदोलन के संयोजक समीर रतूड़ी ने कहा कि सड़क निर्माण के दौरान मलबे को सीधे नदी में डालने के बजाय डंपिंग जोन बनाया जाना चाहिए। वहीं पर्वतीय विकास शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डा. अरविंद दरमोड़ा ने कहा कि यह क्षेत्र भूकंप के दृष्टिकोण से संवेदनशील है। अत: इस क्षेत्र में किसी भी निर्माण कार्य से पहले पर्यावरणीय अनुकूलन को देखा जाना चाहिए। सेमिनार में मानव विज्ञान विभाग के शोध छात्र दिनेश गोदियाल, सुरेश भट्ट, उत्तम सिंह राणा, सुरेश कुमार, अनुराग चमोली, मोहित सिंह, राजेंद्र बिष्ट आदि मौजूद थे।
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