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नाटकों के माध्यम से सरकारी सिस्टम पर किया प्रहार
Updated Mon, 14 May 2018 10:32 PM IST
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कर्णप्रयाग।
राजकीय इंटर कालेज लंगासू में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने नाटकों के जरिए सरकारी सिस्टम पर प्रहार किया। दिखाया कि कैसे सरकारी सिस्टम की प्रक्रिया लंबी होने के कारण एक युवक की जान चली जाती है। साथ ही पहाड़ की संस्कृति और परंपराओं को लोकनृत्य और जागरों के माध्यम से बताया। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य आरसी ध्यानी और राकेश पल्लव ने प्रशिक्षितों को प्रमाणपत्र बांटे।
संस्कृति विभाग की ओर से 29 अप्रैल से कालेश्वर में अभिनय और कला प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सोमवार को कार्यक्रम के अंतिम दिन जीआईसी लंगासू में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। कलाकारों ने गढ़वाली नाटक ‘देवदार का पेड़’ की प्रस्तुति दी। नाटक में दिखाया गया कि टूटे हुए पेड़ के नीचे दबे एक युवक को निकालने के लिए ग्रामीणों और परिजनों को कैसे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े और युवक की मौत के बाद भी पेड़ नहीं हट पाया। यही नहीं ‘चीड़ का पेड़’ नाटक में यह बताने की कोशिश की गई कि बदलते दौर में कैसे लोग कानून से बच निकलते हैं। वहीं अन्य कलाकारों ने कृष्ण गोपियों का संग..., लाली हो लाली... सहित फ्यूलड़िया त्वे देखिके.... आदि लोक गीतों पर प्रस्तुति दी। नव संजीवनी वेलफेयर सोसाइटी की ओर से चलाए गए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में फिल्म निर्माता और निर्देशक मनोज पांगती ने बताया कि 12 से 25 साल तक के 50 छात्र-छात्राओं को अभिनय की विभिन्न विधाएं सिखाई गईं हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता जीआईसी के प्रधानाचार्य टीएस असवाल ने की। इस अवसर पर संस्था की मंजू शर्मा, संजय बड़ोनी, व्यापार संघ अध्यक्ष कैलाश खंडूड़ी, क्षेत्र पंचायत सदस्य महेंद्र कुमार, विधायक प्रतिनिधि शांति लाल, बीपी डिमरी सहित शिक्षक और अभिभावक आदि मौजूद थे।
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राजकीय इंटर कालेज लंगासू में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने नाटकों के जरिए सरकारी सिस्टम पर प्रहार किया। दिखाया कि कैसे सरकारी सिस्टम की प्रक्रिया लंबी होने के कारण एक युवक की जान चली जाती है। साथ ही पहाड़ की संस्कृति और परंपराओं को लोकनृत्य और जागरों के माध्यम से बताया। मुख्य अतिथि सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य आरसी ध्यानी और राकेश पल्लव ने प्रशिक्षितों को प्रमाणपत्र बांटे।
संस्कृति विभाग की ओर से 29 अप्रैल से कालेश्वर में अभिनय और कला प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सोमवार को कार्यक्रम के अंतिम दिन जीआईसी लंगासू में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति दी गई। कलाकारों ने गढ़वाली नाटक ‘देवदार का पेड़’ की प्रस्तुति दी। नाटक में दिखाया गया कि टूटे हुए पेड़ के नीचे दबे एक युवक को निकालने के लिए ग्रामीणों और परिजनों को कैसे सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े और युवक की मौत के बाद भी पेड़ नहीं हट पाया। यही नहीं ‘चीड़ का पेड़’ नाटक में यह बताने की कोशिश की गई कि बदलते दौर में कैसे लोग कानून से बच निकलते हैं। वहीं अन्य कलाकारों ने कृष्ण गोपियों का संग..., लाली हो लाली... सहित फ्यूलड़िया त्वे देखिके.... आदि लोक गीतों पर प्रस्तुति दी। नव संजीवनी वेलफेयर सोसाइटी की ओर से चलाए गए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में फिल्म निर्माता और निर्देशक मनोज पांगती ने बताया कि 12 से 25 साल तक के 50 छात्र-छात्राओं को अभिनय की विभिन्न विधाएं सिखाई गईं हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता जीआईसी के प्रधानाचार्य टीएस असवाल ने की। इस अवसर पर संस्था की मंजू शर्मा, संजय बड़ोनी, व्यापार संघ अध्यक्ष कैलाश खंडूड़ी, क्षेत्र पंचायत सदस्य महेंद्र कुमार, विधायक प्रतिनिधि शांति लाल, बीपी डिमरी सहित शिक्षक और अभिभावक आदि मौजूद थे।
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