{"_id":"5af6020a4f1c1bd5408b497e","slug":"15260718169-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"’भारत माता घायल है गिरवी पैर की पायल है’","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
’भारत माता घायल है गिरवी पैर की पायल है’
Updated Sat, 12 May 2018 02:20 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
‘भारतब्यूरो/अमर उजाला,ऋषिकेश ।
अखिल भारतीय साहित्य परिषद व हिंदी प्रचार समिति के संयुक्त तत्वावधान में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें रचनाकारों ने विभिन्न विषयों पर काव्य प्रस्तुति दी। मनीराम मार्ग स्थित ओमकार आश्रम में आयोजित काव्य गोष्ठी का मुख्य अतिथि विमला रावत व उमा सडाना ने विधिवत शुभारंभ किया। काव्य गोष्ठी में राजेंद्र तिवाड़ी निश्चल ने ‘मैला न करो मां को ये मां है तुम्हारी...’ काव्य की प्रस्तुति दी। कवि धीरेंद्र रांगड़ ने ‘भारत माता घायल है गिरवी पैर की पायल है...’ रचना के जरिए देश के हालातों पर चिंता जताई।
नरेंद्र रयाल ने ‘मैंने मन में ठानी है कलम तलवार बनानी है...’, शिव प्रसाद बहुगुणा ने ‘प्रकृति तुम ही ईश्वर हो’, मनोज गुप्ता ने ‘पत्नी क्या सोचती है’, धनेश कोठारी ने ‘तय मानो देश लुटेगा, बार-बार हर बार लुटेगा’ काव्य रचना प्रस्तुति दी। इस अवसर पर रामकृष्ण पोखरियाल, प्रेम कुमार सडाना, सुनील थपलियाल, महेश चिटकारिया, अशोक क्रेजी ने रचनाएं पेश की। यहां भगवान सिंह रांगड़, महिपाल बिष्ट, सुरेंद्र कैंतुरा, विजयपाल, वीरेंद्र कुमार, मोनिका शर्मा, रमाकांत, विजेंद्र पासवान, प्रिया देवी, कोमल देवी, रीना देवी, चंद्रा शर्मा, मनीष शर्मा, महेश नौटियाल, संतोष गुप्ता, रोहित गुप्ता, नवीन पोखरियाल आदि मौजूद थे।
विज्ञापन
अखिल भारतीय साहित्य परिषद व हिंदी प्रचार समिति के संयुक्त तत्वावधान में काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें रचनाकारों ने विभिन्न विषयों पर काव्य प्रस्तुति दी। मनीराम मार्ग स्थित ओमकार आश्रम में आयोजित काव्य गोष्ठी का मुख्य अतिथि विमला रावत व उमा सडाना ने विधिवत शुभारंभ किया। काव्य गोष्ठी में राजेंद्र तिवाड़ी निश्चल ने ‘मैला न करो मां को ये मां है तुम्हारी...’ काव्य की प्रस्तुति दी। कवि धीरेंद्र रांगड़ ने ‘भारत माता घायल है गिरवी पैर की पायल है...’ रचना के जरिए देश के हालातों पर चिंता जताई।
नरेंद्र रयाल ने ‘मैंने मन में ठानी है कलम तलवार बनानी है...’, शिव प्रसाद बहुगुणा ने ‘प्रकृति तुम ही ईश्वर हो’, मनोज गुप्ता ने ‘पत्नी क्या सोचती है’, धनेश कोठारी ने ‘तय मानो देश लुटेगा, बार-बार हर बार लुटेगा’ काव्य रचना प्रस्तुति दी। इस अवसर पर रामकृष्ण पोखरियाल, प्रेम कुमार सडाना, सुनील थपलियाल, महेश चिटकारिया, अशोक क्रेजी ने रचनाएं पेश की। यहां भगवान सिंह रांगड़, महिपाल बिष्ट, सुरेंद्र कैंतुरा, विजयपाल, वीरेंद्र कुमार, मोनिका शर्मा, रमाकांत, विजेंद्र पासवान, प्रिया देवी, कोमल देवी, रीना देवी, चंद्रा शर्मा, मनीष शर्मा, महेश नौटियाल, संतोष गुप्ता, रोहित गुप्ता, नवीन पोखरियाल आदि मौजूद थे।
विज्ञापन