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सूरज की तपिश में झुलसने लगा आलू
Updated Tue, 24 Apr 2018 02:32 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला/साहिया।
सिंचाई के पर्याप्त साधन न होने और दिन-प्रतिदिन चढ़ते पारे के कारण क्षेत्र में आलू की फसल झुलसा रोग की चपेट में आ गई हैं। अब तक करीब 20 फीसदी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। खेत में पानी लगाते ही पौधा मुरझा रहा है, पत्ते काले पड़ रहे हैं।
कालसी तहसील के गांवों में आलू की अच्छी पैदावार होती है। यहां के आलू की बाहरी मंडियों में खासा डिमांड है। अपने स्वाद और आकार के कारण यहां का आलू बाजार में हाथों-हाथ बिकता है। यहां से आलू की दिल्ली, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, लुधियाना, जालंधर मंडियों में डिलिवरी होती है, लेकिन इन दिनों रोग की चपेट में आकर फसल चौपट हो रही है। काश्तकार आदि का कहना है कि उन्होंने महंगा कृषि ऋण लेकर आलू की बुआई की थी, लेकिन अब फसल रोग की चपेट में आने से पत्ते काले पड़ने लगे हैं। आल की फसल जनवरी अंत और फरवरी के प्रथम सप्ताह में बुआई के बाद जून प्रथम सप्ताह में फसल तैयार हो जाती है। जिससे यहां के किसानों को अच्छी आमदनी कर लेते हैं।
20 से अधिक गांवों में प्रकोप
जड़वाला, सेवना, मोकाड़ खेड़ा, क्वानूू खेड़ा, जामुवा, सिलीगाड़, सकनी, अलसी, चरगाड़ खड्ड समेत 20 से अधिक गांवों में इन दिनों आलू की फसल झुलसा रोग की चपेट में है।
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ऐसे करें उपाय
कॉपर आक्सी क्लोराइड की दो ग्राम मात्रा एक लीटर पानी और मैलाथियान की एक मिली मात्रा एक लीटर पानी में घोल मिलाकर छिड़काव करने से बीमारी का प्रकोप कम होता है। 15 दिन के बाद दूसरा छिड़काव करें। इसके साथ ही एम-45 की दो ग्राम मात्रा एक लीटर पानी में घोल मिलाकर छिड़काव करने से बीमारी की रोकथाम होती है।
अचानक तापमान बढ़ने के कारण फसल रोग की चपेट में आ रही है। दवाओं के छिड़काव से बीमारी की रोकथाम संभव है।
- डॉ. रामकुमार, उद्यान प्रभारी
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सिंचाई के पर्याप्त साधन न होने और दिन-प्रतिदिन चढ़ते पारे के कारण क्षेत्र में आलू की फसल झुलसा रोग की चपेट में आ गई हैं। अब तक करीब 20 फीसदी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। खेत में पानी लगाते ही पौधा मुरझा रहा है, पत्ते काले पड़ रहे हैं।
कालसी तहसील के गांवों में आलू की अच्छी पैदावार होती है। यहां के आलू की बाहरी मंडियों में खासा डिमांड है। अपने स्वाद और आकार के कारण यहां का आलू बाजार में हाथों-हाथ बिकता है। यहां से आलू की दिल्ली, सहारनपुर, मेरठ, गाजियाबाद, मुरादाबाद, बरेली, लुधियाना, जालंधर मंडियों में डिलिवरी होती है, लेकिन इन दिनों रोग की चपेट में आकर फसल चौपट हो रही है। काश्तकार आदि का कहना है कि उन्होंने महंगा कृषि ऋण लेकर आलू की बुआई की थी, लेकिन अब फसल रोग की चपेट में आने से पत्ते काले पड़ने लगे हैं। आल की फसल जनवरी अंत और फरवरी के प्रथम सप्ताह में बुआई के बाद जून प्रथम सप्ताह में फसल तैयार हो जाती है। जिससे यहां के किसानों को अच्छी आमदनी कर लेते हैं।
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20 से अधिक गांवों में प्रकोप
जड़वाला, सेवना, मोकाड़ खेड़ा, क्वानूू खेड़ा, जामुवा, सिलीगाड़, सकनी, अलसी, चरगाड़ खड्ड समेत 20 से अधिक गांवों में इन दिनों आलू की फसल झुलसा रोग की चपेट में है।
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ऐसे करें उपाय
कॉपर आक्सी क्लोराइड की दो ग्राम मात्रा एक लीटर पानी और मैलाथियान की एक मिली मात्रा एक लीटर पानी में घोल मिलाकर छिड़काव करने से बीमारी का प्रकोप कम होता है। 15 दिन के बाद दूसरा छिड़काव करें। इसके साथ ही एम-45 की दो ग्राम मात्रा एक लीटर पानी में घोल मिलाकर छिड़काव करने से बीमारी की रोकथाम होती है।
अचानक तापमान बढ़ने के कारण फसल रोग की चपेट में आ रही है। दवाओं के छिड़काव से बीमारी की रोकथाम संभव है।
- डॉ. रामकुमार, उद्यान प्रभारी