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सात साल में हाथियों ने ली 13 लोगों की जान
Updated Sat, 14 Apr 2018 02:12 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश/रायवाला।
वन विभाग के ऋषिकेश वन क्षेत्र, राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क की मोतीचूर रेंज और गौहरी रेंज के अंतर्गत आबादी वाले इलाकों में जंगली हाथी और लोगों के बीच संघर्ष में अब तक 14 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। जंगली हाथी के हमलों में आठ पुरुष, तीन महिला व तीन मासूम बच्चों की जान गई है। बावजूद इसके वन महकमा लोगों की सुरक्षा के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहा है। संघर्ष को रोकने के लिए विभाग तक कारगर उपाय नहीं कर पाया है, जिससे मौतों का आंकड़ा साल-दर-साल बढ़ रहा है।
सर्वाधिक हाथी के जानलेवा हमले ऋषिकेश रेंज में हुए हैं। रेंज अधिकारी आरपीएस नेगी ने बताया वर्ष 2012 में हाथी के हमले में तीन लोगों की जान गई थी, जिनमें दो पुरुष व एक महिला शामिल हैं। बताया कि वर्ष 2013 में हाथी ने छह लोगों की जान ली थी, जिनमें पांच पुरुष व एक महिला शामिल है। बताया सभी मृतकों के परिवार वालों को नियमानुसार तीन लाख का मुआवजा दिया जा चुका है।
उधर, गौहरी रेंज अधिकारी राजेंद्र नौटियाल ने बताया वर्ष 2016 में हाथी के हमले में पश्चिम बंगाल निवासी किशोरी की मौत हो गई थी। उसके आश्रितों को तीन का मुआवजा दिया जा चुका है। मोतीचूर रेंज अधिकारी विकास रावत ने बताया वर्ष 2010 में हाथी के हमले में मां समेत दो मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। बताया उक्त हमला वन सीमा के भीतर हुआ था। दूसरी ओर डोईवाला स्थित थानों वन रेंज के सौंग कक्ष संख्या चार में बीती आठ फरवरी को हाथी के साथ सेल्फी लेने के जुनून में एक युवक की जान चली गई थी।
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फसल का नहीं मिला मुआवजा
ऋषिकेश। वन सीमा से सटे क्षेत्रों में हाथी के उत्पात में काश्तकारों और किसानों की फसल के नुकसान की भरपाई पिछले दो साल से नहीं हो पाई है। मोतीचूर रेंज के अंतर्गत वर्ष 2014 से अभी तक छह लाख 90 हजार रुपये का मुआवजा प्रभावितों को नहीं दिया गया है। जबकि 58 फसल नुकसान के मामलों की वन विभाग में जांच चल रही है। ऋषिकेश वन रेंज के अंतर्गत फसल नुुकसान का करीब दो लाख का मुआवजा शेष है। अधिकारियों ने बताया बजट नहीं मिलने के कारण मुआवजा राशि नहीं दी जा सकी है।
इतना मिलता है मुआवजा
ऋषिकेश। जंगली हाथी द्वारा नुकसान करने पर अलग-अलग मानकों के आधार पर वन विभाग पीड़ितों को मुआवजा देता है। जिसमें हाथी के हमले में मृत्यु होने पर मृतक के परिवार को तीन लाख, गंभीर घायल 25 हजार, मामूली घायल को 15 हजार का मुआवजा दिया जाता है। वहीं, प्रति एकड़ गेहूं व धान की फसल के नुकसान के लिए 15 हजार और गन्ने की फसल के लिए 25 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाता है। चारदीवारी तोड़ने पर 10 से 15 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है।
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वन विभाग के ऋषिकेश वन क्षेत्र, राजाजी टाइगर रिजर्व पार्क की मोतीचूर रेंज और गौहरी रेंज के अंतर्गत आबादी वाले इलाकों में जंगली हाथी और लोगों के बीच संघर्ष में अब तक 14 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। जंगली हाथी के हमलों में आठ पुरुष, तीन महिला व तीन मासूम बच्चों की जान गई है। बावजूद इसके वन महकमा लोगों की सुरक्षा के प्रति गंभीर नजर नहीं आ रहा है। संघर्ष को रोकने के लिए विभाग तक कारगर उपाय नहीं कर पाया है, जिससे मौतों का आंकड़ा साल-दर-साल बढ़ रहा है।
सर्वाधिक हाथी के जानलेवा हमले ऋषिकेश रेंज में हुए हैं। रेंज अधिकारी आरपीएस नेगी ने बताया वर्ष 2012 में हाथी के हमले में तीन लोगों की जान गई थी, जिनमें दो पुरुष व एक महिला शामिल हैं। बताया कि वर्ष 2013 में हाथी ने छह लोगों की जान ली थी, जिनमें पांच पुरुष व एक महिला शामिल है। बताया सभी मृतकों के परिवार वालों को नियमानुसार तीन लाख का मुआवजा दिया जा चुका है।
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उधर, गौहरी रेंज अधिकारी राजेंद्र नौटियाल ने बताया वर्ष 2016 में हाथी के हमले में पश्चिम बंगाल निवासी किशोरी की मौत हो गई थी। उसके आश्रितों को तीन का मुआवजा दिया जा चुका है। मोतीचूर रेंज अधिकारी विकास रावत ने बताया वर्ष 2010 में हाथी के हमले में मां समेत दो मासूम बच्चों की मौत हो गई थी। बताया उक्त हमला वन सीमा के भीतर हुआ था। दूसरी ओर डोईवाला स्थित थानों वन रेंज के सौंग कक्ष संख्या चार में बीती आठ फरवरी को हाथी के साथ सेल्फी लेने के जुनून में एक युवक की जान चली गई थी।
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फसल का नहीं मिला मुआवजा
ऋषिकेश। वन सीमा से सटे क्षेत्रों में हाथी के उत्पात में काश्तकारों और किसानों की फसल के नुकसान की भरपाई पिछले दो साल से नहीं हो पाई है। मोतीचूर रेंज के अंतर्गत वर्ष 2014 से अभी तक छह लाख 90 हजार रुपये का मुआवजा प्रभावितों को नहीं दिया गया है। जबकि 58 फसल नुकसान के मामलों की वन विभाग में जांच चल रही है। ऋषिकेश वन रेंज के अंतर्गत फसल नुुकसान का करीब दो लाख का मुआवजा शेष है। अधिकारियों ने बताया बजट नहीं मिलने के कारण मुआवजा राशि नहीं दी जा सकी है।
इतना मिलता है मुआवजा
ऋषिकेश। जंगली हाथी द्वारा नुकसान करने पर अलग-अलग मानकों के आधार पर वन विभाग पीड़ितों को मुआवजा देता है। जिसमें हाथी के हमले में मृत्यु होने पर मृतक के परिवार को तीन लाख, गंभीर घायल 25 हजार, मामूली घायल को 15 हजार का मुआवजा दिया जाता है। वहीं, प्रति एकड़ गेहूं व धान की फसल के नुकसान के लिए 15 हजार और गन्ने की फसल के लिए 25 हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजा दिया जाता है। चारदीवारी तोड़ने पर 10 से 15 हजार रुपये का मुआवजा दिया जाता है।