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कानून के प्रावधानों के तहत ही फीस निर्धारित-ᅫ ̄ᅳU₩ᅫ↑
Updated Sun, 01 Apr 2018 12:31 AM IST
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ब्यूरो/ अमर उजाला, देहरादून/डोईवाला
स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी(एसआरएचयू) के हिमालयन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की फीस जारी हो गई है। विवि के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि विवि एक्ट के हिसाब से उत्तराखंड के छात्रों को एमबीबीएस शुल्क में 26 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। यह शुल्क नए सत्र 2018-19 से लागू होगा। गत वर्ष के दाखिलों के शुल्क पर अभी हाईकोर्ट में फैसला होना है। डॉ. धस्माना ने कहा कि शुल्क का निर्धारण कानून के प्रावधानों के तहत ही किया गया है।
स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी जौलीग्रांट के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने प्रेसवार्ता कर मेडिकल फीस बढ़ोतरी के मामले पर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 16 विवि संचालित हो रहे हैं। चूंकि प्रदेश सरकार ने अभी तक कोई अंब्रैला एक्ट नहीं बनाया है, इसलिए निजी विवि में उनके एक्ट के तहत ही प्रवेश और फीस निर्धारित होती है। बीते वर्ष राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने तय किया था कि एसआरएचयू समेत दो अन्य मेडिकल कॉलेजों की फीस का स्ट्रक्चर विभाग तय करेगा, जिसको लेकर विवाद हुआ था। कहा कि कानून के पालन के लिए विश्वविद्यालय, सरकार और जनता प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों में मनमानी नहीं की जा सकती है। देहरादून के एक मेडिकल कॉलेज के कारण उलझन शुरू हुई थी। एसआरएचयू में शुल्क निर्धारण के लिए जिम्मेदार लोगों की कमेटी गठित है। उन्होंने दावा किया कि देश के अन्य मेडिकल कॉलेजों की तुलना में एसआरएचयू सबसे कम फीस ली जाएगी। विवि उत्तराखंड के छात्रों को शुल्क में एक्ट के हिसाब से 26 प्रतिशत की छूट देगा। इसी प्रकार पीजी कोर्सेज में सभी छात्रों को 4.80 लाख रुपये स्टाइपंड दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के छात्रों से एमबीबीएस की ट्यूशन फीस 11.10 लाख रुपये और बाहरी छात्रों से 15 लाख रुपये ली जाएगी। इसी प्रकार, पीजी में सबसे महंगी रेडियो डाइग्नोसिस, ऑब्ट्रैक्ट एंड गाइनी और ऑर्थो कोर्स में सर्वाधिक 30 लाख रुपये शुल्क बाहरी छात्रों के लिए है, जिसमें से 4.80 लाख रुपये स्टाइपंड वापस कर दिया जाएगा। इसी प्रकार, पीजी में इन तीनों कोर्सेज के लिए उत्तराखंड के छात्रों से केवल 17.40 लाख रुपये लिए जाएंगे, जिसमें 4.80 लाख रुपये स्टाइपंड भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर विवि एक्ट से हटकर कोई काम करे तो निश्चित तौर पर सरकार कार्रवाई करे। चूंकि उत्तराखंड में अभी तक यूपी, एमपी और हिमाचल की तरह कोई अंब्रैला एक्ट नहीं बना है, इसलिए शुल्क निर्धारण की आजादी विवि एक्ट के हिसाब से विश्वविद्यालयों के पास ही है। जब एक्ट बन जाएगा तो सरकार के हिसाब से शुल्क तय होगा। इसके अलावा यह शुल्क इस वर्ष से लागू होगा। गत वर्ष का शुल्क निर्धारण का मामला हाईकोर्ट में लंबित है, जिसके लिए सरकार को शुल्क तय करना है। हाईकोर्ट के आदेश के तहत ही गत वर्ष का शुल्क छात्रों को देना होगा।
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स्वामी राम हिमालयन यूनिवर्सिटी(एसआरएचयू) के हिमालयन मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की फीस जारी हो गई है। विवि के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि विवि एक्ट के हिसाब से उत्तराखंड के छात्रों को एमबीबीएस शुल्क में 26 प्रतिशत की छूट दी जाएगी। यह शुल्क नए सत्र 2018-19 से लागू होगा। गत वर्ष के दाखिलों के शुल्क पर अभी हाईकोर्ट में फैसला होना है। डॉ. धस्माना ने कहा कि शुल्क का निर्धारण कानून के प्रावधानों के तहत ही किया गया है।
स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी जौलीग्रांट के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने प्रेसवार्ता कर मेडिकल फीस बढ़ोतरी के मामले पर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 16 विवि संचालित हो रहे हैं। चूंकि प्रदेश सरकार ने अभी तक कोई अंब्रैला एक्ट नहीं बनाया है, इसलिए निजी विवि में उनके एक्ट के तहत ही प्रवेश और फीस निर्धारित होती है। बीते वर्ष राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने तय किया था कि एसआरएचयू समेत दो अन्य मेडिकल कॉलेजों की फीस का स्ट्रक्चर विभाग तय करेगा, जिसको लेकर विवाद हुआ था। कहा कि कानून के पालन के लिए विश्वविद्यालय, सरकार और जनता प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों में मनमानी नहीं की जा सकती है। देहरादून के एक मेडिकल कॉलेज के कारण उलझन शुरू हुई थी। एसआरएचयू में शुल्क निर्धारण के लिए जिम्मेदार लोगों की कमेटी गठित है। उन्होंने दावा किया कि देश के अन्य मेडिकल कॉलेजों की तुलना में एसआरएचयू सबसे कम फीस ली जाएगी। विवि उत्तराखंड के छात्रों को शुल्क में एक्ट के हिसाब से 26 प्रतिशत की छूट देगा। इसी प्रकार पीजी कोर्सेज में सभी छात्रों को 4.80 लाख रुपये स्टाइपंड दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के छात्रों से एमबीबीएस की ट्यूशन फीस 11.10 लाख रुपये और बाहरी छात्रों से 15 लाख रुपये ली जाएगी। इसी प्रकार, पीजी में सबसे महंगी रेडियो डाइग्नोसिस, ऑब्ट्रैक्ट एंड गाइनी और ऑर्थो कोर्स में सर्वाधिक 30 लाख रुपये शुल्क बाहरी छात्रों के लिए है, जिसमें से 4.80 लाख रुपये स्टाइपंड वापस कर दिया जाएगा। इसी प्रकार, पीजी में इन तीनों कोर्सेज के लिए उत्तराखंड के छात्रों से केवल 17.40 लाख रुपये लिए जाएंगे, जिसमें 4.80 लाख रुपये स्टाइपंड भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर विवि एक्ट से हटकर कोई काम करे तो निश्चित तौर पर सरकार कार्रवाई करे। चूंकि उत्तराखंड में अभी तक यूपी, एमपी और हिमाचल की तरह कोई अंब्रैला एक्ट नहीं बना है, इसलिए शुल्क निर्धारण की आजादी विवि एक्ट के हिसाब से विश्वविद्यालयों के पास ही है। जब एक्ट बन जाएगा तो सरकार के हिसाब से शुल्क तय होगा। इसके अलावा यह शुल्क इस वर्ष से लागू होगा। गत वर्ष का शुल्क निर्धारण का मामला हाईकोर्ट में लंबित है, जिसके लिए सरकार को शुल्क तय करना है। हाईकोर्ट के आदेश के तहत ही गत वर्ष का शुल्क छात्रों को देना होगा।
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