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गुणवतापरक जल का इस्तेमाल करें
Updated Fri, 30 Mar 2018 02:04 AM IST
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ब्यूरो/अमर उजाला
डोईवाला।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के जल प्रौद्योगिकी पहल कार्यक्रम के तहत जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में गुणवत्तापरक जल का इस्तेमाल करने समेत जल संरक्षण पर जोर दिया गया।
ब्लाक सभागार में विज्ञान प्रौद्योगिकी परिषद, जल संस्थान और डीएवी महाविद्यालय की ओर से दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन यूकास्ट के निदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जल एक मुख्य संसाधन है। जल के समुचित उपयोग और दोहन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। गुणवत्तापरक जल का ही इस्तेमाल करना चाहिए जिससे बीमारियों से बचा जा सके। डॉ. डोभाल ने विकसित किए गए लो कोस्ट और पर्यावरणीय स्नेही जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए विशेष फील्ड टेस्टिंग किट का लोकार्पण किया। किट का उपयोग लच्छीवाला ग्राम सभा के आसपास के स्रोतों की गुणवत्ता परीक्षण के लिए किया जाएगा।
क्षेत्रीय आवश्यकता के अनुरूप आठ महत्वपूर्ण जल गुणवत्ता मानकों की जांच कर सकेंगे। विशिष्ट अतिथि जल संस्थान के सुबोध कुमार ने पानी की गुणवत्ता जांच की उपयोगिता और वर्तमान समय में जरूरत पर प्रकाश डाला। डीएवी महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन और डॉ. प्रशांत सिंह ने जल की गुणवत्ता के बारे में बताया। कार्यशाला में लच्छीवाला ग्राम प्रधान गीता सावन, डॉ. रविंद्र असवाल, डॉ. विकास कंडारी, स्निग्धा पुंडीर, यशवंत सिंह, भास्कर पंत, गिरीश जगूडी आदि मौजूद थे।
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डोईवाला।
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के जल प्रौद्योगिकी पहल कार्यक्रम के तहत जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में गुणवत्तापरक जल का इस्तेमाल करने समेत जल संरक्षण पर जोर दिया गया।
ब्लाक सभागार में विज्ञान प्रौद्योगिकी परिषद, जल संस्थान और डीएवी महाविद्यालय की ओर से दो दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन यूकास्ट के निदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने किया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड में जल एक मुख्य संसाधन है। जल के समुचित उपयोग और दोहन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। गुणवत्तापरक जल का ही इस्तेमाल करना चाहिए जिससे बीमारियों से बचा जा सके। डॉ. डोभाल ने विकसित किए गए लो कोस्ट और पर्यावरणीय स्नेही जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए विशेष फील्ड टेस्टिंग किट का लोकार्पण किया। किट का उपयोग लच्छीवाला ग्राम सभा के आसपास के स्रोतों की गुणवत्ता परीक्षण के लिए किया जाएगा।
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क्षेत्रीय आवश्यकता के अनुरूप आठ महत्वपूर्ण जल गुणवत्ता मानकों की जांच कर सकेंगे। विशिष्ट अतिथि जल संस्थान के सुबोध कुमार ने पानी की गुणवत्ता जांच की उपयोगिता और वर्तमान समय में जरूरत पर प्रकाश डाला। डीएवी महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. देवेंद्र भसीन और डॉ. प्रशांत सिंह ने जल की गुणवत्ता के बारे में बताया। कार्यशाला में लच्छीवाला ग्राम प्रधान गीता सावन, डॉ. रविंद्र असवाल, डॉ. विकास कंडारी, स्निग्धा पुंडीर, यशवंत सिंह, भास्कर पंत, गिरीश जगूडी आदि मौजूद थे।
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