{"_id":"5ab170604f1c1b90778b6a22","slug":"152157833210-rishikesh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गंगा किनारे अवैध निर्माण कार्य लगातार जारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गंगा किनारे अवैध निर्माण कार्य लगातार जारी
Updated Wed, 21 Mar 2018 02:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्यूरो/ऋषिकेश। न्यायालय के प्रतिबंध व सरकार के शासनादेश के बावजूद नदी के दो सौ मीटर के दायरे में तपोवन व लक्ष्मणझूला क्षेत्र में लगातार अवैध निर्माण होना जारी है। हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) को न्यायालय द्वारा गंगा से प्रतिबंधित दो सौ मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार के निर्माण कार्य को रोकने की जिम्मेदारी दी गई है, मगर प्राधिकरण के अफसर अनधिकृत निर्माण कार्य रोक नहीं पा रहे हैं।
इन दिनों तपोवन क्षेत्र में आधा दर्जन भवनों का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जोकि गंगा से महज 60 से 70 मीटर की परिधि में हो रहे हैं। यही स्थिति लक्ष्मणझूला क्षेत्र में है। इस क्षेत्र में नदी से पचास मीटर से दो सौ मीटर की परिधि में छह स्थानों पर धड़ल्ले से निर्माण कार्य किया जा रहा है। जबकि जिन इलाकों में यह निर्माण किया जा रहा है, उस दायरे में उच्च न्यायालय का आदेश प्रभावी होता है।
लोगों का आरोप, अफसरों की मिलीभगत से हो रहे निर्माण
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एचआरडीए के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना गंगा के प्रतिबंधित दायरे में निर्माण कार्य नहीं हो सकते। तपोवन निवासी भगवती प्रसाद भट्ट, उदय सिंह पुंडीर, हरि सिंह रावत, लक्ष्मणझूला के देवेंद्र पयाल, स्वर्गाश्रम निवासी डॉ. नारायण सिंह रावत, मुनिकीरेती निवासी सुरेंद्र सिंह भंडारी और चंद्र सिंह पुंडीर का कहना है कि नदी तटीय इलाकों में किए जा रहे एक-एक निर्माण कार्य की जानकारी प्राधिकरण के अधिकारियों के पास होती है, लेकिन अफसर उस पर रोक लगाने को मनमाना तरीका अपनाते हैं। यही वजह है कि प्राधिकरण किसी व्यक्ति को उसके भवन की मरम्मत कराने तक की अनुमति नहीं देता है और कई लोगों को नदी से बीस से पचास मीटर के दायरे में बहुमंजिली इमारतों के निर्माण को छूट दे दी जाती है।
विज्ञापन
क्या कहते हैं प्राधिकरण सचिव
मामला संज्ञान में नहीं है। एई और जेई को साइट पर भेजकर मामले को दिखवाया जाएगा। अगले सप्ताह हम स्वयं क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे, अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- बंशीधर तिवारी, सचिव एचआरडीए, हरिद्वार।
विज्ञापन
इन दिनों तपोवन क्षेत्र में आधा दर्जन भवनों का निर्माण कार्य किया जा रहा है, जोकि गंगा से महज 60 से 70 मीटर की परिधि में हो रहे हैं। यही स्थिति लक्ष्मणझूला क्षेत्र में है। इस क्षेत्र में नदी से पचास मीटर से दो सौ मीटर की परिधि में छह स्थानों पर धड़ल्ले से निर्माण कार्य किया जा रहा है। जबकि जिन इलाकों में यह निर्माण किया जा रहा है, उस दायरे में उच्च न्यायालय का आदेश प्रभावी होता है।
विज्ञापन
लोगों का आरोप, अफसरों की मिलीभगत से हो रहे निर्माण
स्थानीय लोगों का आरोप है कि एचआरडीए के अधिकारियों की मिलीभगत के बिना गंगा के प्रतिबंधित दायरे में निर्माण कार्य नहीं हो सकते। तपोवन निवासी भगवती प्रसाद भट्ट, उदय सिंह पुंडीर, हरि सिंह रावत, लक्ष्मणझूला के देवेंद्र पयाल, स्वर्गाश्रम निवासी डॉ. नारायण सिंह रावत, मुनिकीरेती निवासी सुरेंद्र सिंह भंडारी और चंद्र सिंह पुंडीर का कहना है कि नदी तटीय इलाकों में किए जा रहे एक-एक निर्माण कार्य की जानकारी प्राधिकरण के अधिकारियों के पास होती है, लेकिन अफसर उस पर रोक लगाने को मनमाना तरीका अपनाते हैं। यही वजह है कि प्राधिकरण किसी व्यक्ति को उसके भवन की मरम्मत कराने तक की अनुमति नहीं देता है और कई लोगों को नदी से बीस से पचास मीटर के दायरे में बहुमंजिली इमारतों के निर्माण को छूट दे दी जाती है।
विज्ञापन
क्या कहते हैं प्राधिकरण सचिव
मामला संज्ञान में नहीं है। एई और जेई को साइट पर भेजकर मामले को दिखवाया जाएगा। अगले सप्ताह हम स्वयं क्षेत्र का निरीक्षण करेंगे, अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
- बंशीधर तिवारी, सचिव एचआरडीए, हरिद्वार।