{"_id":"5aae9a9b4f1c1bb1758b6143","slug":"15213925313-shrinagar-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"माता के जयकारों व बाध्य यंत्रों से गूंजे स्नान घाट व मंदिर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
माता के जयकारों व बाध्य यंत्रों से गूंजे स्नान घाट व मंदिर
Updated Sun, 18 Mar 2018 10:32 PM IST
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श्रीनगर/देवप्रयाग/ कीर्तिनगर। चैत्र नवरात्र के पहले दिन देवप्रयाग संगम व ढुंडप्रयाग सहित क्षेत्र के अलकनंदा नदी स्थित विभिन्न स्नान घाटों पर लोग बड़ी संख्या में स्नान करने पहुंचे। इस दौरान ढोल दमाऊं की ध्वनि के साथ देव डोलियों व देव निशानों को गंगा स्नान करवाकर उनकी पूजा अर्चना की गई।
रविवार को देवप्रयाग संगम पर भुवनेश्वरी मंदिर पुंडल में संपुट चण्डी पाठ से पहले देवी को गंगा स्नान करवाया गया। इसके बाद क्षेत्रीय विधायक ने संगम से मंदिर तक गंगा कलश यात्रा का शुभारंभ किया। जबकि सिद्धपीठ मां चंद्रबदनी मंदिर में घट स्थापना के साथ ही हरियाली बोई गई। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग चंद्रबदनी के दर्शनों को पहुंचे। नवरात्र के पहले दिन टिहरी पौड़ी जिले के ग्राम कोठी, खेड़ा, सौड़, लीई, कुंडी, उमरासू, कांडाधार, कोटी आदि गांवों के साथ ही शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। इस मौके पर रघुनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की।
दूसरी ओर कीर्तिनगर के ढुंडप्रयाग में भी दूर दराज क्षेत्रों से पहुंची देव डोलियों व श्रद्धालुओं ने अकलनंदा में स्नान किया। रानीहाट राजराजेश्वरी मंदिर में भी पूजा अर्चना की गई। जबकि धारी देवी, देवलगढ़ में गौरा देवी व राजराजेश्वरी मंदिरों में घट स्थापना की गई। इस मौके पर दिन भर मंदिरों में माता के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
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श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की पूजा की
कर्णप्रयाग/थराली/गैरसैंण। रविवार को चैत्र माह की नवरात्रि के पावन पर्व पर क्षेत्र के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। कर्णप्रयाग के पौराणिक उमा देवी मंदिर, राज राजेश्वरी चंडिका मंदिर सिमली, लंगासू, मैखुरा, दशमद्वार महाकाली मंदिर कंडारा और गौचर, नंदा देवी मंदिर नौटी थराली के बधांणगढ़ी देवी मंदिर और गैरसैंण आदिबदरी, नारायणबगड़, देवाल के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां दुर्गा की पूजा की।
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संगम तट से निकाली जल कलश यात्रा
कर्णप्रयाग। रविवार को कर्णप्रयाग संगम तट से जल कलश यात्रा और लाटू देवता की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पौराणिक महादेव मंदिर बगोली में श्रीमद्भागवत कथा पुराण का शुभारंभ हो गया है।
बगलेश्वर महादेव मंदिर बगोली में ब्रह्मबेला से आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महादेव और लाटू देवता की पूजा अर्चना की। उसके बाद गांव की महिलाओं और अन्य श्रद्धालुओं ने कर्णप्रयाग संगम तट से उमा देवी मंदिर और मुख्य बाजार से बगलेश्वर महादेव मंदिर बगोली तक भव्य जल कलश यात्रा निकाली। प्रथम दिन कथा वाचक आचार्य जयदेव बिजल्वाण ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य के समस्त सांसारिक कष्ट दूर हो जाते हैं। इस मौके पर मंदिर के महंत नंदन गिरी महाराज, शिवानंद गिरी महाराज, महादेव गिरी महाराज, शंकर गिरी महाराज, नंदा गिरी माई, शांता गिरी माई, जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र सिंह नेगी, नरेंद्र सिंह नेगी सहित बगोली, स्यान, चूला, गबनी, पूर्णा, नौली, कर्णप्रयाग, सिमली, नारायणबगड़ आदि क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। उधर, मैखुरा के पौराणिक चंडिका मंदिर और सिलंगी गांव में नवरात्रि के पावन पर्व से श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हो गया है।
नवरात्र पर देवी मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
उत्तरकाशी।
चैत्र नवरात्र के पहले दिन जिले के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं और मंदिर देवी के जयकारों से गूंज उठे।
जिला मुख्यालय स्थित शक्ति मंदिर, कुटेटी देवी, महिषासुर मर्दिनी, अन्नपूर्णा, ज्ञानसू स्थित काली माता, मल्ला में चंदोमति माता, धनारी में नागणी माता आदि तमाम देवी मंदिरों में सुबह से ही दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगनी शुरू हो गई थी। भक्तों ने देवी मंदिरों में पूजा-अर्चना कर सुख, शांति एवं खुशहाली की कामना की। इस पर्व के लिए देवी मंदिरों को विशेष तौर पर सजाया गया है। कुटेटी देवी मंदिर के पुजारी ललित प्रसाद नौटियाल ने बताया कि इस सिद्धपीठ के प्रति लोगों की अगाध आस्था है। नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
उत्तरकाशी से सूर्यप्रकाश नौटियाल।
नवरात्र के पहले दिन देवी शैलपुत्री की हुई पूजा
देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुबह से उमड़ी भीड़
पौड़ी।
चैत्र नवरात्र पूजन के पहले दिन मंदिरों में देवी दर्शन व विशेष पूजा अर्चना के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। पहले दिन शैलपुत्री की पूजा की गई।
पौड़ी के खांड्यूसैंण स्थित वैष्णो देवी मंदिर व अछरीखाल देवी मंदिर में नवरात्र पूजन पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। मंदिर समिति के अध्यक्ष बीरेंद्र बिजल्वाण, सचिव बलवंत रावत और संस्थापक राजेंद्र रावत ने बताया कि मंदिर नवरात्रों में भजन-कीर्तन के साथ महाविद्या पाठ, चंडी पाठ, रूद्री पाठ के साथ ही कई धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। 24 मार्च को रात्रि जागरण और 25 मार्च को रामनवमी के अवसर पर यत्र के साथ ही भंडारा लगाया जाएगा। इसके अलावा पौड़ी के ज्वालपा देवी, लक्ष्मीनारायण, भुवनेश्वरी आदि मंदिरों और घरों में श्रद्धालुओं ने अपने परिजनों और विश्व शांति की कुशलता व सुख समृद्धि के लिए विशेष पूजा-अर्चना की।
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शैलपुत्री के पूजा के साथ नवरात्र शुरू
गोपेश्वर/जोशीमठ। चैत्र नवरात्र के पहले दिन तड़के से ही देवी मंदिरों में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। घुड़साल की इंद्रामति देवी मंदिर में जल कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हो गया है। जोशीमठ के नव दुर्गा मंदिर व गढ़ी मंदिर में भी वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ नवरात्रा का शुभारंभ हुआ। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गई। पीपलकोटी के धनेश्वरी देवी मंदिर, दशमद्वार कालीमठ, कुरुड़ नंदा देवी और गोपेश्वर के चंडिका देवी मंदिर में दिनभर भक्तों का हुजूम उमड़ा रहा। वहीं, बिरही के वीर भद्रेश्वर मंदिर में जल कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा और यज्ञ का शुभारंभ हो गया है। इस दौरान भक्तों ने वीर भद्रेश्वर के दर्शन किए।
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देवी मंदिरों में पूजा-अर्चना को उमड़ी भीड़
नई टिहरी/घनसाली। चैत्र नवरात्र के पहले दिन पूजा-अर्चना के लिए सिद्धपीठ सुरकंडा, कुंजापुरी, चंद्रबदनी मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ा रहा। भिलंगना ब्लॉक के तिसरियाणा गांव से सिद्धपीठ ज्वालामुखी मंदिर तक जल कलश यात्रा निकाली गई। तिसरियाणा गांव से ज्वालामुखी की डोली देवढुंग मंदिर के गर्भ गृह में पहुंची। नौ दिन तक देवी की मूर्ति देवढुंग मंदिर में ही विराजमान रहेगी। ज्वालामुखी मंदिर में देवी भागवत कथा और श्रीमद्भागत शुरू हो गई। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष बचन रावत, उपाध्यक्ष अमनदीप भट्ट, मनमोहन डिमरी, सोहन रतूड़ी, अमर सिंह राणा, किशन सिंह रावत आदि उपस्थित रहे। ब्यूरो
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जड़धार गांव पहुंची मां सुरकंडा की डोली
चंबा (टिहरी)। सिद्धपीठ मां सुरकंडा की डोली जड़धार गांव पहुंच गई। ढ़ोल-नगाड़ों के साथ जड़धार गांव के लोगों ने डोली का स्वागत किया। अब नवरात्र में देवी की पूजा जड़धार गांव स्थित सुरकंडा मंदिर में की जाएगी।
मां सुरकंडा की डोली को हर तीसरे साल नवरात्र पर सुरकंडा मंदिर से ग्रामीण जड़धार गांव लाते हैं। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ डोली को मंदिर के पुजारियों ने जड़धार गांव के लिए रवाना किया। डोली के ढोल-नगाड़ों के साथ जड़धार गांव पहुंचने पर पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। ग्रामीण भी देवी दर्शनों के लिए गांव में पहुंचे। सुबह देवी की विशेष पूजा-अर्चना कर मंदिर में हरियाली बोई गई। सुरकंडा मंदिर के पुजारी रमेश लेखवार ने बताया कि नवरात्र पूजा के बाद ग्रामीण डोली को विधि-विधान के साथ विदा करेंगे।
चैत्र नवरात्र के शुभारंभ पर देवी मंदिरों में दिनभर उमड़े श्रद्धालु
दानकोट, फेगू व कोठियाड़ा गांव में देवी अनुष्ठान शुरू
रुद्रप्रयाग। चैत्र नवरात्र के शुभारंभ पर जनपद के तीनों ब्लाकों में स्थित प्राचीन देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की खूब भीड़ रही। इस दौरान अगस्त्यमुनि के ग्राम दानकोट, ऊखीमठ के फेगू और जखोली के कोठियाड़ा गांव में अराध्य मां भगवती का विशेष अनुष्ठान शुरू हो गया है। यहां पहले दिन कलश यात्रा के साथ भक्तों ने अराध्य को भोग लगाया और पूजा-अर्चना की। शक्तिपीठ कालीमठ, शक्तिपीठ मठियाणाखाल, हरियाली देवी जसोली, मां त्रिपुरा सुंदरी ललिता माई, मां चामुड़ा के मंदिर में भक्तों की खूब भीड़ रही।
रविवार को जसोली हरियाल से मां हरियाली की डोली दोपहर बाद अपने मायके दानकोट पहुंची। यहां पर तिबरी में डोली को विराजमान किया गया। इस मौके पर भक्तों ने अराध्य के दर्शन कर भोग लगाया। इसके उपरांत आचार्य गिरीश चंद्र शैली ने विशेष पूजा-अर्चना कर देवी अनुष्ठान शुरू किया। उन्होंने श्रीमद्देवी भागवत कथा पुराण का वाचन करते हुए पहले दिन मां भगवती के शैलपुत्री स्वरूप का विस्तार से वर्णन किया। इधर, केदारघाटी के फेगू गांव में मां दुर्गा की विशेष पूजा शुरू हुई। उधर, जखोली के कोठियाड़ा में भव्य जलकलश यात्रा के साथ श्रीमद्देवी भागवत पुराण शुरू हुआ।
जारी -
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रविवार को देवप्रयाग संगम पर भुवनेश्वरी मंदिर पुंडल में संपुट चण्डी पाठ से पहले देवी को गंगा स्नान करवाया गया। इसके बाद क्षेत्रीय विधायक ने संगम से मंदिर तक गंगा कलश यात्रा का शुभारंभ किया। जबकि सिद्धपीठ मां चंद्रबदनी मंदिर में घट स्थापना के साथ ही हरियाली बोई गई। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग चंद्रबदनी के दर्शनों को पहुंचे। नवरात्र के पहले दिन टिहरी पौड़ी जिले के ग्राम कोठी, खेड़ा, सौड़, लीई, कुंडी, उमरासू, कांडाधार, कोटी आदि गांवों के साथ ही शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने गंगा स्नान किया। इस मौके पर रघुनाथ मंदिर में भी श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की।
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दूसरी ओर कीर्तिनगर के ढुंडप्रयाग में भी दूर दराज क्षेत्रों से पहुंची देव डोलियों व श्रद्धालुओं ने अकलनंदा में स्नान किया। रानीहाट राजराजेश्वरी मंदिर में भी पूजा अर्चना की गई। जबकि धारी देवी, देवलगढ़ में गौरा देवी व राजराजेश्वरी मंदिरों में घट स्थापना की गई। इस मौके पर दिन भर मंदिरों में माता के दर्शनों के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।
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श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा की पूजा की
कर्णप्रयाग/थराली/गैरसैंण। रविवार को चैत्र माह की नवरात्रि के पावन पर्व पर क्षेत्र के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना की। कर्णप्रयाग के पौराणिक उमा देवी मंदिर, राज राजेश्वरी चंडिका मंदिर सिमली, लंगासू, मैखुरा, दशमद्वार महाकाली मंदिर कंडारा और गौचर, नंदा देवी मंदिर नौटी थराली के बधांणगढ़ी देवी मंदिर और गैरसैंण आदिबदरी, नारायणबगड़, देवाल के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां दुर्गा की पूजा की।
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संगम तट से निकाली जल कलश यात्रा
कर्णप्रयाग। रविवार को कर्णप्रयाग संगम तट से जल कलश यात्रा और लाटू देवता की वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पौराणिक महादेव मंदिर बगोली में श्रीमद्भागवत कथा पुराण का शुभारंभ हो गया है।
बगलेश्वर महादेव मंदिर बगोली में ब्रह्मबेला से आचार्यों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ महादेव और लाटू देवता की पूजा अर्चना की। उसके बाद गांव की महिलाओं और अन्य श्रद्धालुओं ने कर्णप्रयाग संगम तट से उमा देवी मंदिर और मुख्य बाजार से बगलेश्वर महादेव मंदिर बगोली तक भव्य जल कलश यात्रा निकाली। प्रथम दिन कथा वाचक आचार्य जयदेव बिजल्वाण ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण से मनुष्य के समस्त सांसारिक कष्ट दूर हो जाते हैं। इस मौके पर मंदिर के महंत नंदन गिरी महाराज, शिवानंद गिरी महाराज, महादेव गिरी महाराज, शंकर गिरी महाराज, नंदा गिरी माई, शांता गिरी माई, जिला पंचायत सदस्य देवेंद्र सिंह नेगी, नरेंद्र सिंह नेगी सहित बगोली, स्यान, चूला, गबनी, पूर्णा, नौली, कर्णप्रयाग, सिमली, नारायणबगड़ आदि क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। उधर, मैखुरा के पौराणिक चंडिका मंदिर और सिलंगी गांव में नवरात्रि के पावन पर्व से श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हो गया है।
नवरात्र पर देवी मंदिरों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
उत्तरकाशी।
चैत्र नवरात्र के पहले दिन जिले के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। मंदिरों में पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगी रहीं और मंदिर देवी के जयकारों से गूंज उठे।
जिला मुख्यालय स्थित शक्ति मंदिर, कुटेटी देवी, महिषासुर मर्दिनी, अन्नपूर्णा, ज्ञानसू स्थित काली माता, मल्ला में चंदोमति माता, धनारी में नागणी माता आदि तमाम देवी मंदिरों में सुबह से ही दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालुओं की कतारें लगनी शुरू हो गई थी। भक्तों ने देवी मंदिरों में पूजा-अर्चना कर सुख, शांति एवं खुशहाली की कामना की। इस पर्व के लिए देवी मंदिरों को विशेष तौर पर सजाया गया है। कुटेटी देवी मंदिर के पुजारी ललित प्रसाद नौटियाल ने बताया कि इस सिद्धपीठ के प्रति लोगों की अगाध आस्था है। नवरात्र के दौरान यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
उत्तरकाशी से सूर्यप्रकाश नौटियाल।
नवरात्र के पहले दिन देवी शैलपुत्री की हुई पूजा
देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की सुबह से उमड़ी भीड़
पौड़ी।
चैत्र नवरात्र पूजन के पहले दिन मंदिरों में देवी दर्शन व विशेष पूजा अर्चना के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं। पहले दिन शैलपुत्री की पूजा की गई।
पौड़ी के खांड्यूसैंण स्थित वैष्णो देवी मंदिर व अछरीखाल देवी मंदिर में नवरात्र पूजन पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिली। मंदिर समिति के अध्यक्ष बीरेंद्र बिजल्वाण, सचिव बलवंत रावत और संस्थापक राजेंद्र रावत ने बताया कि मंदिर नवरात्रों में भजन-कीर्तन के साथ महाविद्या पाठ, चंडी पाठ, रूद्री पाठ के साथ ही कई धार्मिक अनुष्ठान किए जा रहे हैं। 24 मार्च को रात्रि जागरण और 25 मार्च को रामनवमी के अवसर पर यत्र के साथ ही भंडारा लगाया जाएगा। इसके अलावा पौड़ी के ज्वालपा देवी, लक्ष्मीनारायण, भुवनेश्वरी आदि मंदिरों और घरों में श्रद्धालुओं ने अपने परिजनों और विश्व शांति की कुशलता व सुख समृद्धि के लिए विशेष पूजा-अर्चना की।
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शैलपुत्री के पूजा के साथ नवरात्र शुरू
गोपेश्वर/जोशीमठ। चैत्र नवरात्र के पहले दिन तड़के से ही देवी मंदिरों में भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा। घुड़साल की इंद्रामति देवी मंदिर में जल कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा का शुभारंभ हो गया है। जोशीमठ के नव दुर्गा मंदिर व गढ़ी मंदिर में भी वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ नवरात्रा का शुभारंभ हुआ। पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा-अर्चना की गई। पीपलकोटी के धनेश्वरी देवी मंदिर, दशमद्वार कालीमठ, कुरुड़ नंदा देवी और गोपेश्वर के चंडिका देवी मंदिर में दिनभर भक्तों का हुजूम उमड़ा रहा। वहीं, बिरही के वीर भद्रेश्वर मंदिर में जल कलश यात्रा के साथ श्रीमद् भागवत कथा और यज्ञ का शुभारंभ हो गया है। इस दौरान भक्तों ने वीर भद्रेश्वर के दर्शन किए।
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देवी मंदिरों में पूजा-अर्चना को उमड़ी भीड़
नई टिहरी/घनसाली। चैत्र नवरात्र के पहले दिन पूजा-अर्चना के लिए सिद्धपीठ सुरकंडा, कुंजापुरी, चंद्रबदनी मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ा रहा। भिलंगना ब्लॉक के तिसरियाणा गांव से सिद्धपीठ ज्वालामुखी मंदिर तक जल कलश यात्रा निकाली गई। तिसरियाणा गांव से ज्वालामुखी की डोली देवढुंग मंदिर के गर्भ गृह में पहुंची। नौ दिन तक देवी की मूर्ति देवढुंग मंदिर में ही विराजमान रहेगी। ज्वालामुखी मंदिर में देवी भागवत कथा और श्रीमद्भागत शुरू हो गई। इस मौके पर मंदिर समिति के अध्यक्ष बचन रावत, उपाध्यक्ष अमनदीप भट्ट, मनमोहन डिमरी, सोहन रतूड़ी, अमर सिंह राणा, किशन सिंह रावत आदि उपस्थित रहे। ब्यूरो
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जड़धार गांव पहुंची मां सुरकंडा की डोली
चंबा (टिहरी)। सिद्धपीठ मां सुरकंडा की डोली जड़धार गांव पहुंच गई। ढ़ोल-नगाड़ों के साथ जड़धार गांव के लोगों ने डोली का स्वागत किया। अब नवरात्र में देवी की पूजा जड़धार गांव स्थित सुरकंडा मंदिर में की जाएगी।
मां सुरकंडा की डोली को हर तीसरे साल नवरात्र पर सुरकंडा मंदिर से ग्रामीण जड़धार गांव लाते हैं। वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ डोली को मंदिर के पुजारियों ने जड़धार गांव के लिए रवाना किया। डोली के ढोल-नगाड़ों के साथ जड़धार गांव पहुंचने पर पूरा माहौल भक्तिमय हो गया। ग्रामीण भी देवी दर्शनों के लिए गांव में पहुंचे। सुबह देवी की विशेष पूजा-अर्चना कर मंदिर में हरियाली बोई गई। सुरकंडा मंदिर के पुजारी रमेश लेखवार ने बताया कि नवरात्र पूजा के बाद ग्रामीण डोली को विधि-विधान के साथ विदा करेंगे।
चैत्र नवरात्र के शुभारंभ पर देवी मंदिरों में दिनभर उमड़े श्रद्धालु
दानकोट, फेगू व कोठियाड़ा गांव में देवी अनुष्ठान शुरू
रुद्रप्रयाग। चैत्र नवरात्र के शुभारंभ पर जनपद के तीनों ब्लाकों में स्थित प्राचीन देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की खूब भीड़ रही। इस दौरान अगस्त्यमुनि के ग्राम दानकोट, ऊखीमठ के फेगू और जखोली के कोठियाड़ा गांव में अराध्य मां भगवती का विशेष अनुष्ठान शुरू हो गया है। यहां पहले दिन कलश यात्रा के साथ भक्तों ने अराध्य को भोग लगाया और पूजा-अर्चना की। शक्तिपीठ कालीमठ, शक्तिपीठ मठियाणाखाल, हरियाली देवी जसोली, मां त्रिपुरा सुंदरी ललिता माई, मां चामुड़ा के मंदिर में भक्तों की खूब भीड़ रही।
रविवार को जसोली हरियाल से मां हरियाली की डोली दोपहर बाद अपने मायके दानकोट पहुंची। यहां पर तिबरी में डोली को विराजमान किया गया। इस मौके पर भक्तों ने अराध्य के दर्शन कर भोग लगाया। इसके उपरांत आचार्य गिरीश चंद्र शैली ने विशेष पूजा-अर्चना कर देवी अनुष्ठान शुरू किया। उन्होंने श्रीमद्देवी भागवत कथा पुराण का वाचन करते हुए पहले दिन मां भगवती के शैलपुत्री स्वरूप का विस्तार से वर्णन किया। इधर, केदारघाटी के फेगू गांव में मां दुर्गा की विशेष पूजा शुरू हुई। उधर, जखोली के कोठियाड़ा में भव्य जलकलश यात्रा के साथ श्रीमद्देवी भागवत पुराण शुरू हुआ।
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